• The Secret Of The Nagas (Shiva Trilogy-2)

    This is the second novel in the trilogy on Shiva by Amish Tripathy. The book ‘Nagaon Ka Rahasya’ is the Hindi version of the book originally written in English ‘Secrets of Nagas’.

  • Satyayoddha Kalki: Eye of Brahma

    After a defeat at the hands of Lord Kali, Kalki Hari must journey towards the mahendragiri mountains with his companions to finally become the avatar he is destined to be.

  • The Immortals of Meluha

    जब बुराई एक महाकाय रूप धारण कर लेती है, जब ऐसा प्रतीत होता है कि सबकुछ लुप्त हो चुका है, जब आपके शत्रु विजय प्राप्त कर लेंगे, तब एक महानायक अवतरित होगा।

  • तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

    तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। क्यों के अंधेरा होने पर ही रोशनी की जरूरत होती है। और कुछ बुरी सक्ती हमेशा रोशनी को मिटाने के चक्कर में होती है। तो में आप सबको आज ये बताऊंगा के कैसे एक रोशनी के दूत ने अंधेरे का साथ दिया और बन गया अधेरा का सबसे ताकतवर शहंशह.

  • जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग

    वो आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। आगे जानने के लिए यहाँ click करे.

भानगढ़ एक अनसुलझा रहस्य

भानगढ़ एक अनसुलझा रहस्य



भानगढ़ एक ऐसी भूतिया जगह हे जिसका जिक्र बहुत सारी किताबों में हुआ है। पर असल मायने में क्या हकीकत है यह जान पाना बहुत ही मुश्किल है। कहते हैं कई सारे अतृप्त आत्मा है भानगढ़ के किले में जो रात को निकलती तो है पर कोई नहीं जानता कि सुबह होते ही वह कहां गायब हो जाते हैं। पर वहां पर रह रहे लोगों का अक्सर यह मानना है कि रात होते ही अजीब अजीब सी घटनाएं घटने की आहट सुनाई देती है उनको। यूं तो भानगढ़ में हजारों ऐसे किस्से आपको मिल जाएंगे जिन पर यकीन कर पाना वाकई में मुश्किल है । उन सब में से एक घटना मै आजआपको बताने जा रहा हूं।
धवन नाम का एक लड़का अपने कॉलेज के कैरियर से ही फिल्मों में अपना स्क्रिप्ट देने के लिए बहुत उत्साहित था। वह अक्सर भूतों के ऊपर कहानियां लिखा करता था। उसने बहुत सारे जगह पर इंटरव्यू दिया। तभी उसकी मुलाकात एक डायरेक्टर से हुई जिसने उसे भानगढ़ के ऊपर एक शॉर्ट फिल्म स्टोरी लिखने को कहा । उन्होंने धवन को भानगढ़ जाने को कहा और वहां कुछ दिन रेहेके इस विषय पर काम करने को कहा । 
अगले दिन सुबह ही धवन अपने चार दोस्तों के साथ एक टीम बनाकर भानगढ़ के लिए निकल पड़ा। वहां पहुंचने के बाद वह अपनी स्क्रिप्ट को लेकर काम करना शुरू कर देता है। वहां पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों से उसे ऐसी कई सारी कहानियों के बारे में पता चलता है जिसमें भूतिया बातों का जिक्र हुआ हो। अपने काम को लेकर धवन इतना सीरियस था कि उसने सोच लिया था कि वह इस साल का सबसे बढ़िया भूतिया डॉक्यूमेंट्री बनाएगा। इसके लिए बो भानगढ़ में एक रात गुजारना चाहता था। उसने अपने सारे दोस्तों को मना लिया और वहां जाने की तैयारी करने लगा। लेकिन वहां शाम ढलने के बाद भानगढ़ के अंदर जाना नामुमकिन था। उन्होंने कुछ पैसे देकर भानगढ़ के एक कर्मचारी को मना लिया और अपना सारा सामान लेकर भानगढ़ में छुप गए। जैसे ही भानगढ़ बंद हुआ वह अपने काम में लग गए। सर्दी के महीने में भानगढ़ का सन्नाटा किसी भी इंसान को अंदर से हिला डालने की ताकत रखती थी। धवन के साथ प्रीति, अर्जुन और विवेक थे जो उसके साथी थे। प्रीति तो उसकी मंगेतर थी। 

जैसे जैसे रात बढ़ता गया भानगढ़ का सन्नाटा और शोर करने लगा। मनो जैसे खामोशी अपने आप में चिल्ला चिल्ला कर यह कह रही है कि निकल जाओ यहां से। धवन ज्यादा देर ना करते हुए अपना काम शुरू कर देता है। अपने साथ लेकर के सारे कैमरों को अलग-अलग जगह पर फिक्स कर देता है। अब वो सब एक जगह बैठ कर कुछ होने का इंतजार करते हैं। करीब 3 घंटे बीत जाने के बाद करीब रात के 10:45 बजे एक शोर सुनाई देता है। इतनी रात को कौन चिल्ला सकता है ? और वो भी किले के अंदर ? यह सवाल सबके मन में था लेकिन आवाज सबको बराबर सुनाई दे रही थी। सबने अपने कैमरा उठाए और जहां से शोर आरहा था उस दिशा में चल पड़े। वो सब कुछ ही क़दम आगे बढ़े ही थे कि उनके सामने एक औरत भागते हुए रोते हुए आ रही थी। और सीधा इन्हीं चारों के सामने एके रुक गयी। धवन और उनके साथियों को इस बात का यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि कोई और उनके सामने उनकी ओर भागते हुए आ रही है। कुछ ही देर के अंदर बो औरत इनके पास आकर खड़ी हो गई। वह काफी ज्यादा परेशान दिख रही थी उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे

प्लीज मेरे पति को बचा लीजिए प्लीज कुछ कीजिए वरना वो भूतनी इन्हें मार डालेगी। प्लीज मेरी मदद करो। धवन और उनके साथियों को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उनके अलावा किले में और कोई नहीं था। तो फिर ये औरत कहां से आई। यह कोई चुड़ैल या फिर प्रेतात्मा तो नहीं ! इसके बारे में सुबह गांव वाले धवन को बता रहे थे। गांव वालों ने धवन को कहा था कि कीले में ऐसे कई सारी प्रेत आत्मा है जो अनजान लोगों को परेशान करने के लिए किसी का भी रूप लेकर उनके सामने आ जाते हैं। और देखते ही देखते उन्हें मार डालते हैं। धवन ने पूरी सावधानी से उस औरत से पूछा 

कौन हो तुम ? और इतनी अंधेरी रात में अकेले ही इस कीले में क्या कर रही हो? पहले तुम यह बताओ कि तुम कीले के अंदर कैसे अयी ? इस पर प्रीति धवन की ओर देखकर यहां से निकलने को कहती है। पर वो औरत धवन के पैर पड़ जाती है। प्लीज मेरे पति को बचालो वो आत्माओं के चंगुल में फंस गए हैं। अगर हम वहां पर नहीं पहुंचे तो बो सब उन्हें मार डालेंगे। धवन को उस औरत की बात पर यकीन आ गया। उसने प्रीति को समझाकर उस औरत की मदद करने के लिए मना लिया। धवन को इसमें अपना ही फायदा नजर आ रहा था।वह इस औरत का इस्तेमाल अपने डॉक्यूमेंट्री पर करना चाहता था। पर अब सवाल यह था कि उसके पति को  ढूंढे कहां ? 

इसीलिए धवन ने प्रीति और अर्जुन को उस औरत के साथ किले की बाएं और भेजो। और खुद विवेक के साथ दाएं और गया । कुछ देर चलने के बाद धवन को एक आदमी दिखा जो एक कोने में छुप कर बैठा हुआ नजर आया। धवन को लगा कि शायद यह वही आदमी है जो आत्माओं के चंगुल में फंस गया था। उनसे बचने के लिए अब वह यहां आकर छुप कर बैठ गया है। धवन तुरंत ही उसके पास जाता है और उसे सारी बातें पूछता है। वो आदमी जैसे ही धवन और विवेक को देखा तो बोल पड़ा 

प्लीज मुझे बचा लो या आत्माएं मुझे मार डालेंगे मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। जो मैं रात को यहां पर रुका। मुझे मेरी बीवी की बात नहीं माननी चाहिए थी लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है प्लीज मुझे यहां से निकाल दीजिए। में यहांसे निकलने का और एक रास्ता जनता हूँ। यह सब बोलते बोलते उस आदमी की आंखों से आंसू गिरने लगे।
तुम्हें कुछ नहीं होगा हमने तुम्हें ढूंढ लिया है अब हम तुम्हें तुम्हारे पत्नी के पास ले चलेंगे। 
पत्नी !
वह तो मर चुकी है। आत्माओं ने मेरी पत्नी को मार डाला और वह मुझे भी जिंदा नहीं छोड़ेंगे। मैं बड़ी मुश्किल से यहां पर उन सब से छुपा कर बैठ गया था। अच्छा हुआ जो आप लोग मुझे मिल गए हमें यहां से तुरंत निकलना चाहिए नहीं तो वह आत्मा  हमें मार डालेंगे। 

यह क्या बोल रहे हो तुम तुम्हारी बीवी तो हमारे पास आई थी तुम्हारी जान बचाने के लिए हम से मिन्नतें कर रही थी। विवेक ने बड़े ही आश्चर्य होकर उस आदमी से इस सवाल किया।
हे भगवान इसका मतलब वह आत्माएं  आपके पास भी पहुंच गई है। यहां पर आप किसी पर भी भरोसा मत करिए वह आत्माएं किसी का भी रूप लेकर हमारे सामने आ सकती है। और हमें अपनी बातों से बहला-फुसलाकर हमारी जान ले लेते हैं। यह सब सुनके धवन के होस उड़ गए थे। आखिर अगर वह औरत एक भूत है तो फिर प्रीति और अर्जुन की जान खतरे में थी क्योंकि वह दोनों उस औरत के साथ ही गए थे। धवन ने तुरंत ही प्रीति को फोन लगाया। प्रीती और अर्जुन दोनों का फोन स्विच ऑफ आ रहा था। धवन ने उस आदमी को वहीं पर बैठने के लिए कहा वह अपने बाकी साथियों को लेकर उस आदमी के पास वापस लौटेगा ऐसा कहकर धवन तुरंत ही प्रीति और अर्जुन को ढूंढने निकल गया ।

वह दोनों उसे एक किले के एक छोटे से टूटे हुए कमरे में मिले। धवन को परेशान देखकर प्रीती बोल पड़ी की क्या बात है तुम दोनों इतने घबराए हुए क्यों  सच में भूत देख लिया क्या? 
जल्दी निकलो यहां से वह औरत जो हमारे साथ आई थी वो जरासर एक भूतनी है।  वह हमें फंसा रही है। यह क्या कह रहे हो तुम ? हमें उसका पति ऊपर मिला था वह बता रहा था कि उसकी पत्नी को भूतों ने मार डाला है। यानी कि हमारे पास जो औरत आई थी वो कोई और नहीं बल्कि एक भूतनी थी। तभी वह औरत सबके सामने आकर खड़ी हो गई। उसे देख कर धवन बोलने लगा यह वह भूतनी हे जो हमारे सामने खड़ी है। ये क्या बोल रहे हो आप मैं भूतनी नहीं हूं मैं यहां पर अपने पति के साथ एक घूमने आई थी। बस मेरे सामने ही उन्होंने मेरे पति पर हमला कर दिया। में जैसे तैसे जिंदा बच के यहां तक आपकी मदद के लिए आई। 

झूठ मत बोलो हमें तुम्हारा पति ऊपर मिला था वह बोल रहा था कि भूतो  ने उसकी पत्नी को यानी कि तुम्हें मार दिया है। तभी प्रीती बोली जो इंसान मर चुकी है वो हमारे सामने कैसे खड़ी हो सकती है?
यह सुनने के बाद वो औरत बहुत जोर जोर से हंसने लगी  ।

तो आखिरकार तुम्हें मेरी सच्चाई के बारे में पता चल ही गया।  मैं सच में एक भूतनी हूं और ऊपर जो मिला था वह मेरा पति ही था। पर अफसोस की बात अब तुम सब यहां से जिंदा बचकर वापस नहीं जा पाओगे। यह सुनकर धवन, प्रीति, अर्जुन और विवेक उसके पति के पास भागे। क्योंकि उसके पति को वहां से बाहर निकलने का रास्ता पता था। वो सब भागने के लिए ऊपर की ओर तोड़े जहां पर उसका पति बैठा हुआ था। सब लोग वहां पर पहुंचने के बाद भगवान ने सब को आगे बढ़ने को कहा। तुम कहां जा रहे हो धवन? प्रीति ने धवन से पूछा । तुम सब चलो मैं बस अपना कैमरा लेकर पहुंचता हूँ। 

 यह कहते हुए धवन जैसे ही उस कमरे में पहुंचा जहां पर उसने अपने सारे कंपनी लैपटॉप और कैमरा सेट किए हुए थे। उसने देखा कि कमरे के अंदर प्रीति और अर्जुन की लाश पड़ी हुई थी। उसे अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था। अगर यह दोनों यहां पर मर चुकी है तो फिर जो मेरे साथ थे वह कौन थे। जिंदगी में पहली बार धवन ने वास्तविक में किसी भूत को देखा था। उसे अब यकीन हो चला था कि आज की रात उसके लिए आखिरी रात है। फिर भी उसने अपने सारे डाक्यूमेंट्स उठाएं और वहां से निकलने के लिए निकल पड़ा। जैसे ही वो पीछे के रास्ते पर किले से बाहर निकलने के लिए क्या तो सारे के सारे फूल उसे मारने के लिए उसके पीछे पड़ गए। धवन के पास और कोई चारा नहीं था उसने एक पत्थर के नीचे छुपने का फैसला किया क्योंकि वह जानता था कि वह एक साथ इतने सारे भूतो से बच नहीं सकता। सुबह होने का इंतजार करने के अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं था। धवन पत्थर के नीचे छुपा आपने मौत का इंतजार कर ही रहा था कि तभी उसके फोन पर अचानक प्रीति का कॉल आया। धवन तुम जहां पर भी हो तुरंत पीछे वाले दरवाजे पर पहुंचो।

 धवन जान चुका था यह प्रीति नहीं बल्कि ये उसका भूत है। धवन ने पति से कहा तुम चाहे कितनी भी कोशिश कर लो मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला। प्रति रो रो के बोलने लगी हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है धवन। हां यह सच है कि मैं अर्जुन और विवेक मर चुके हैं । पर हम तुम्हें यहां से जिंदा निकालेंगे मुझ पर यकीन करो और वहां से पीछे के दरवाजे की ओर भागे। हम ज्यादा देर तक इन आत्माओं को रोक नहीं पाएंगे। धवन की आंखों से आंसू निकल आए। वह जानता था कि प्रीति उसे कभी भी झूठ बोल नहीं सकती। उसने हिम्मत जूता कर पीछे के दरवाजे की ओर भागना शुरू किया। उसने देखा कि प्रीति अर्जुन और विवेक उसकी बाकी भूतों से रक्षा कर रहे हैं। मरने के बाद भी उन तीनों ने अपनी दोस्ती का फर्ज अदा किया। धवन आखिरकार किल्ले के आखिरी दरवाजे से बाहर निकल आया। और जब वापस मुड़कर देखा तो दूर खड़ी प्रीती, अर्जुन और विवेक उसे हाथ हिला रहे थे। और वह पति पत्नी उसे दोबारा उस किले के अंदर बुला रहे थे। अपनी इच्छाओं को पूरा करते चले धवन ने अपने तीन सबसे करीबी दोस्त को खो दिया था। 

एक महीन के बाद जब धवन डायरेक्टर से मिलने आया तो उसने सारी बातें बताई। इसपर डायरेक्टर हस्ते हुए बोला :- इतना भी कहानी में घुसने की जरूरत नहीं है। भूत आम इंसान को नहीं दिखाई देते । लगता है बाहोत थक गए हो। मैने नीचे रिसेप्शन में एक चैक दिया है तुम्हारे नाम का ले जाना। धवन को पता था उसने जो देखा उसपे कोई यकीन नहीं करेगा। वो वहां से चुप चाप चला गया। नीचे जाकर देखा तो रिसेप्शन पे कोई नहीं था। बाहर बैठे चौकीदार से पूछा तो उसने कहा :- अरे जब डायरेक्टर साहब ही नहीं रहे तो फिर रिसेप्शन पर कोन होगा ?
क्या ? डायरेक्टर साहब?
हैं पिछले रात को ही उनकी मृत्यु हुई है।

वैसे भी ये भूत प्रेत आम इंसान को दिखते कहां है ?

आपका दिन शुभ हो।


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दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 2

दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 2

मैने बोहोत कोशिश की पर में आपके बेटे को बचा नहीं सका। ये बात एक माँ को केहपना कितना मुश्किल हे मुझे उसदिन समझ आया। 

मेरे ये सब्द उसदिन एक माँ के सीने पे जो ज़ख्म कर गए उसे सायद ही कोई भर पाए। बहोत मुश्किल होता हे एक डॉक्टर बनना। जिंदगी और मौत के उस सफर को बेहद क़रीबसे महसूस किया हे मेने। बेबस हो जाता हूँ में। किसीको जिंदगी लौटा पाना हमारे बस  में कहाँ ? अपने इस दर्द को हलका करने, में चल पड़ा अपने एक दोस्त के पास जो पैसे से एक पारानोमाल साइंटिस्ट था। 

यूँ तो लोग उसे पागल कहा करते थे। पूरा दिन वो अपने आपको एक घर में बंद कर लेता।कभी कभी समय से परे लगता हे वो मुझे।  उसके घर जाने का मन तो नहीं करता पर आज मन बहोत भारी  हे। सायद वही हे जो मुझे मेरी तकलीफों से निजात दिला सके। में उसके पास अपने दर्द  का इलाज ढूंढ़ने अक्सर जाया करता हूँ । पर आज में वाकई में थक गया था। एक बचे की मौत ने मुझे अंदर से हिला दिया था। 

अरमान और में बचपन के दोस्त हे। बचपन से जनता हूँ उसे। अचानक एक दिन उसके पिताजी गायब हो गये। तबसे लेके आज तक अरमान  के स्वभाब में बहत सारे बदलाब हुए हे। वो अक्सर रात में किसी से बाते करता। उसके पिताजी के चले जाने के बाद मानो किसीने उसके बचपन ही छीन ली हो। अरमान पास में ही एक यूनिवसिटी  में संस्कृत का अध्यापक हे। जवान हे पर सादी नहीं की उसने।

करीब पौने ४ बजे के आस पास में उसके घर पहंचा। अरमान हमेसा के तरा कुर्सी पे बैठा अपने एक हात में कुछ पुरानी किताबे लिए बैठा हुआ था। और साथ में ही उसने एक रुद्राक्ष माला भी पकड़ा हुआ था।  मेने आज तक उस रूद्राक्ष्य माला को पकडे अरमान को कभी नहीं देखा। पर आज अरमान  इतना बिचलित क्यों लग रहा था ? क्या वजह हो सकती हे ? खेर वजह चाहे कुछ भी हो में अंदर चला गया , इस  बात से अनजान के आगे मेरे साथ क्या होने वाला हे।  मेने जैसे ही दरवाजा खोला तो अरमान ने पीछे अपने सर को धीरे से घूमते हुए मुझसे धीमी आवाज़ में कहा " जल्दी से अन्दर आ जाओ , बाहर खतरा हे " मेने उसकी बात मानी और अंदर चला गया।

क्या हुआ अरमान? आज बड़े परेशान लग रहे हो। सब ठीक हैं ना? मैंने हल्की आवाज़ में धीरे से उसके पास बैठते हुए उस से पुछा। तभी मेरा ध्यान उसके बाएं हाथ की ओर गया, उस के बाएँ हात में एक घाव था, एक डॉक्टर होने के नाते मेरा ये फ़र्ज़ बनता हैं के मैं उसका इलाज़ करूँ। पर अरमान ने मुझे रोकते हुए धीमे से कहा, "ये घाव एक ताकत वर प्रेत आत्मा ने बनाया हैं जो ठीक मेरे पीछे बैठी हैं और अगर में थोडासा भी हिला तो मेरे धड़ से मेरी गर्दन को अलग कर देगी।

ये सुनने में जितना ज्यादा डरावना था उससे कहीं ज्यादा अजीब। अपने दुख बाँटने चला में खुद एक बड़ी परेशानी में घिरता हुआ दिख रहा था। मेने ज्यादा सोचने के बजाए  उसके बातो को मान लेना ही ठीक समझा। और हालत के सुधरने का इंतजार करने लगा। कुछ ही देर बाद अरमान  खड़ा हुआ और एक हलकी सी मुस्कराहट के साथ मुझे बोला "तुम आज बच गए मेरे दोस्त " और जोर जोर से हसने लगा।

 ये क्या मजाक हे ? अगर मुझे कुछ होजाता तो ? मेने अभी भी धीमी आवाज़ से उसे कहा।

कैसे कुछ होजाता ? एक तुम ही तो हो डॉक्टर जिसे मुझपे भरोसा हे। में अपने एक लौते भरोसे को कैसे कुछ होने देता। और वैसे भी अब वो प्रेत आत्मा जा चुकी हे।  अब तुम उची आवाज़ में बात कर सकते हो।

पर अरमान  तुम्हारे हातो से ये खून कैसे निकला ?
ये एक लम्बी कहानी हे डॉक्टर किसी और दिन  सुनाऊंगा फुर्सत में। खेर तुम बताओ तुम किसलिए आए थे ? मेरे पास तुम्हारा क्या काम ? तुम ठहरे भगवान को मान ने वाले और हम नास्तिक आदमी। वैसे उदास लग रहे हो। 

में आज टूट सा गया हूँ यार।  एक माँ से उसके बेटे को चीन लिया मैंने।  बचाने की पूरी कोसिश कीथी यार पर नहीं बचा पाया। 

होता हे डॉक्टर कभी कभी होता हे।  सब कुछ हमारे हातों में कहाँ ? खुद को दोस मत दो। ये लो सराब पिलो मन हलका हो जायेगा। ये कहते हुए उसने मुझे एक सरब की बोतल थमा दी। 

 और मेरी बात मनो तो यूँ छोटी छोटी बातों पे दिल को छोटा मत करो। जीबन और मरण बस एक खेल ही तो हे। 

नहीं अरमान ये हलके में लेने वाली बात नहीं हे। उस माँ का उसके बचे के अलावा और कोई नहीं था।  और सायद मेने वो भी छीन लिया।

अरमान ने धीरे से सराब की गिलास को टेबल पर रखते हुए कहा :- अगर तुम कहो तो सायद में उस बचे को बचा सकता हूँ। उसने मेरे कानो के पास धीमी आवाज़ से कहा। 

क्या ? मेने उसके हात पकड़ के उससे दुबारा पुछा। क्या कहा तुमने ?

हाँ तुमने सही सुना में उसे दुबारा बचा सकता हूँ। ला सकता हूँ उसे वापिस। 

कैसे ? ये कैसे मुमकिन हे ? मेडिकल साइंस में ऐसा कोई तरीका नहीं हे। मैंने उसकी और नम आंखोसे देखा। 

हमारी आत्मा हमारी दुनिया छोड़ने के बाद और दूसरी दुनिया में जानेसे पहले एक अलग ही आयाम में रहती हे। जहांसे उसे दुबारा वापस लाया जासकता हे।

मुझे अरमान की बातों पर यकीं नहीं हो रहता। ये सच नहीं हो सकता। ये कैसे मुमकिन हे ? क्या तुम कोई जादूगर हो ? या फिर कोई तांत्रिक जिसका माथा फिर गया हो। मेरी आवाज़ में अब थोडीसी ताल्हिया आने लगी थी। 

जादूगरी आँखों का महज धोका हे। में जो करता हूँ उसके लिए कुर्वानी चाहिए। आत्मा के बदले आत्मा ?

क्या मतलब आत्मा के बदले आत्मा ? में एक डॉक्टर हूँ अरमान। तुम्हारी इन बेतुके, बहियाद जबाब सुनने को  मेरा कोई इरादा नहीं हे। तुम सच पागल हो गए हो अरमान। में इतना कह कर वहां से चला आया।

में सायद दुबारा कभी भी अरमान के पास नहीं जाता, पर अगले सुबह मेने जो देखा उसपे यकीं करपाना मेरे बस में नहीं था। वो बचा मेरे आँखों के सामने खेल रहथा। और पास वही उसकी माँ कड़ी मुझे मुस्कुराती हुई देखि जारही थी।
 
कहानी आगे भी जारी रहेगी












दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 2
















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दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 3

दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 3



रात को सोने से पहले दवा की एक गोली खाली पेट खा लेना। ज्यादा दर्द हुआ तो दोबारा आके मिलना। और हां शराब पीना थोड़ा बंद कर दो मुरारी लाल। अब जाओ चिंता मत करो ठीक हो जाओगे। वाकई में ये काम थका देने वाला है। दो पल के लिए  आँखे बंद किया था कि तभी अचानक एक आवाज आयी 

 एक डॉक्टर का काम बहुत मुश्किल का काम होता है ना बेटा? ये कहते हुए एक अधेड़ उम्र का आदमी हाथ में एक किताब लेके मेरे सामने बैठा था। क्यों डॉक्टर साहब सही कहना मैने।

क्या तकलीफ है आपको ? मैने धीरे से पूछा उसे। पर उस आदमी ने जो कहा वो वाकई में हैरान कर देने वाला था। उसने मुझे कहा :- तकलीफ तो है पर क्या मुझे मेरे रूह का सौदा करना होगा इस तकलीफ  से निजात पाने के लिए। जवाब मेरे पास था नहीं और सच कहूं तो उस आदमी को भी जवाब सुनने की कोई जल्दी नहीं था। में कुछ बोलूं इससे पहले ही वो बोल पड़ा रूह का सौदा करना बेवकूफी नहीं लगता डॉक्टर ? और हस्ते हस्ते निकल गया। तभी अचानक नर्स के जोर जोर से हिलाने से में अपने ख्यालो से  से बाहर आया। डॉक्टर अब बाहर कोई मरीज नहीं है। 

अजीब था पर मैंने हालत पे काबू करते हुए किसी तरह खुद को समझाया। पर जो सब मेरे साथ हो रहा था उसे नजर अंदाज भी तो नहीं किया जा सकता। मैंने तुरंत अपने सामान उठाए और गाड़ी में बैठ कर निकल गया अरमान से मिलने।


तीन महीने से भी ज्यादा वक़्त बित चुके थे उस वाक़िए को।तबसे लेके अबतक मैने अरमान से दूरी बना ली थी। पर अब मुझे जवाब जानना था। शाम का वक़्त हो चला था। मैने धीमे क़दमों से अरमान के घर में क़दम रखा। वही जान लेबा अँधेरा खमोशी से भरा एक कमरा।  बड़े ही धीमे आवाज़ से मेने अरमान को पुकारा , पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।  तभी अचानक मेरे सामने से एक परछाई गुजरी। मुझे लगा सायद अरमान होगा , ये सोचकर में उस परछाई के पीछे गया। उस परछाई का पीछा करते करते में एक अँधेरे कमरे में पहंच गया। कमरा पूरा अँधेरे से भरा पड़ा था।  सिर्फ एक परछाई सी दिख रही थी। मे पसीने से पूरा तर बदर हुआ जा रहा था।  में उस परछाई के करीब गया तो मुझे बड़ी बेचेनिसि होने लगी।  परछाई को छूने  की कोशिश कर है रहा था के तभी पिछेसे अरमान ने मुझे खींच लिया। 


डॉक्टर ! तुम यहाँ , इस  वक़्त ? और इतने  दिनों बाद ? सब  ठीक तो है ना ? अरमान ने बड़े ही सहेज तरीके से मगर धीरेसे पुछा।


इन सारे  सवालों से बड़ा एक और सवाल था, जो मेरे दिल में दस्तक दे रहा था। वो परछाई किसकी थी अरमान?  


पहले तो वो थोड़ा चुप खड़ा रहा फिर धीरे से मुझे लेके एक और कमरे में चला गया।  डॉक्टर मेने तुमसे कहा था के मेरे घर आनेसे पहले मुझे बता दिया करना। पर नहीं तुम तो सीधे ही आ जाओगे। मेरी बात ध्यान से सुनो,  यहाँ तुम्हारे किसी भी सवालों का कोई जवाब नहीं मिल सकता। 

पर क्यों नहीं ? मेरी आवाज़ अब थोडासा सख्त हो चला था। मुझे मेरे सवालों के जवाब चाहिए अरमान। तीन महिनो से में तुमसे भाग रहा हूँ पर कभी कोई न कोई वजह सामने आ हि जाता हे जो मुझे यहाँ आने को मजबूर कर देता हे। आखिर तुमने उस मरे हुए लड़के को जिन्दा कैसे किया ? 


छोडो डॉक्टर मेरे बातो को तुम मानोगे नहीं तो बता के क्या फ़ायदा ? वैसे भी तुम्हारे लिए यही अच्छा हे के तुम जितना हो सके इन सब से दूर ही रहो। कुछ चीज़े हमारे बस में नहीं होती डक्टर।  उन्हें समझने की कोशिस करना बेकार हे। पर अगर तुम वाकई में जानना चाहते हो तो सुनो, ये कहकर अरमान ने मुझे एक अँधेरे कमरे में ले गाया। 


डॉक्टर अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो जैसा मैं कहूं वैसा ही करना। मैंने डरते हुए अपने सर को हाँ में हिलाया। कमरा इतना अँधेरा था के कुछ भी नहीं दिख रहा था। तभी अरमान दोबारा से बोल उठा आज इस कमरे में जो भी होगा उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी।  क्या तुम अभी भी आगे जाना चाहते हो ? एक बार सोच लो ? पर उस वक़्त मुझे सब मंजूर था मेने हामी भरी। अरमान ने मुझे एक धागा देते हुए कहा इसे अपने हात पे बांधलो  । 


लेकिन एक बात का ध्यान रखना डॉक्टर कुछ भी हो जाये इस धागे को निकालना मत। जब तक ये धागा तुम्हारे हात में हे तुम सुरखित हो। इतना केहे कर वो मेरे सामने बैठ गया। कुछ देर तक वो कुछ मन्त्र पढता रहा, फिर अचानक कमरे में सारी  चीज़े हिलने लगी। अरमान ने मुझे सांत रहने को इशारा किया। पर अरमान को देख के लग रहा था के वो बहोत ही बेचैन हे । फिर वो अचानक से सांत होगया। 

 

डॉक्टर पीछे मत देखना बरना वो तुम्हारे दो टुकड़े करदेगी। इस बार में  जान चूका था की अरमान मजाक नहीं कर रहा हे। क्यों के ठीक मेरे कानो के पास किसी के सांसो की गरमाहट  को मेहसूस कर पा राहा था में। मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो चली थी। हम कहाँ पे हे अरमान ? मेने बड़े ही धीमी आवाज़ से पुछा। डॉक्टर हम उस जगह पे हे जहाँ पे इंसानी रूह का सौदा होता हे। यहाँ तुम्हे अपने सारे सवालों के जवाब मिल जायेंगे। तुम अब सवाल पूछ सकते हो। मेने हिमत  के साथ अपने आप पर काबू करते हुए पुछा :- वो लड़का जिससे में बचा नहीं पाया था वो आखिर कर जिन्दा कैसे हे ? तभी पिछेसे आवाज़ आयी :- हर सावल की एक कीमत होती हे डॉक्टर क्या तुम कीमत चुकाने को तैयार हो ? मैंने पूछा कैसी कीमत ? 


फिर से सवाल ? 


में समझ गया की अब हमारे  बस में कुछ नहीं था ? मेने हामी भरा। तो ठीक हे डॉक्टर हर सवाल के बदले में तुम्हारे दोस्त के जिस्म से मांस  का एक टुकड़ा खींच लुंगी। ये सुनतेही मेरे पेरो तले से जमीं खिसक गयी। मेने तुरंत ही अरमान को वापस चलने को कहा पर तब तक बहोत देर हो चूका था। सायद अब वहां से लौटना नामुमकिन था। 


कहानी आगे भी जारी रहेगी।



















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दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 1

 दूसरी दुनिया - एक रहस्य rdhindistories प्रस्तुत करता हे एक अनोखी और रोमांचक कहानी - दूसरी दुनिया एक रहश्य !

दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 1

पिताजी, ये दूसरी दुनिया क्या होती है? क्या हमारी दुनिया के अलावा कोई और दुनिया भी है? मेरे इन अनगिनत सवालों ने पिताजी को हमेशा उलझन में डाल दिया था। शायद यह मेरी उम्र का असर था, जिसमें जानने की इच्छा दिल और दिमाग पर हावी हो जाती थी। तब मैं महज आठ साल का था। पिताजी बहुत ही धार्मिक इंसान थे, और भूत-प्रेत की कथाओं में उनका गहरा ज्ञान था। लेकिन वे अपने ज्ञान की टोकरी को कभी-कभार ही खोलते थे।

मेरी माँ अब इस दुनिया में नहीं थीं, पर पिताजी की परवरिश में मुझे कभी उनकी कमी महसूस नहीं हुई। पिताजी सुबह होते ही अपने काम में लग जाते। इसी का फायदा उठाकर मैं अक्सर उन धूल चढ़ी किताबों को अलमारी से बाहर निकालने की कोशिश में लग जाता। मेरी नज़रें अक्सर उन शब्दों पर जाकर रुक जातीं, जिन पर लिखा होता था "दूसरी दुनिया"।

क्या वजह हो सकती है कि पिताजी ने उस किताब को बंद करके रखा हुआ है? क्या उसमें कोई खतरनाक रहस्य छुपा है? मेरी उत्सुकता चरम पर थी, पर मेरी हर कोशिश बेकार जाती। किताब को छूने भर से मेरे दिल की धड़कनें तेज हो जातीं, जैसे उसमें कुछ अदृश्य शक्तियाँ बंद हों।

एक दिन, जब पिताजी अपने काम में व्यस्त थे, मैंने हिम्मत जुटाई और उस धूल भरी लाल किताब को अलमारी से निकाल लिया। किताब का स्पर्श ठंडा और भारी था, मानो उसमें अनकहे रहस्यों का बोझ हो। मैंने उसे अपने कमरे में छिपा दिया, पिताजी के आने से पहले सब कुछ पहले जैसा बना दिया।

किताब के पन्नों में झाँकते ही मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। क्या यह किताब सचमुच दूसरी दुनिया के दरवाजे खोल सकती है? क्या इसमें उन भूत-प्रेत की कहानियाँ हैं, जिनके बारे में पिताजी बताते थे? मेरी जिज्ञासा अब डर में बदल रही थी, पर मैं रुकने वाला नहीं था। उस रात, मैंने तय कर लिया कि मैं उस किताब को खोलूंगा और जानूंगा कि पिताजी ने इसे क्यों छुपाकर रखा है।


एक दिन सुबह जब मेरी नींद टूटी तो मेने पाया के घर पर पिताजी नहीं थे। और तेज़ हवाओं से कुछ टकराने की आवाज़ बार बार मेरे कानो में गूंज रही थी। मेने अचानक देखा की वो अलमीरा खुला छोड़ दिया हे पिता जी ने। में तुरंत उसे बंद करने गया तो मेरी नजर उस धूल से सनी लाल रंग की किताब पर गयी , जिसने अपने पन्नो  में नजाने कितने राज़ छुपाये हुए थे। पिताजी ग़ुस्सा करेंगे इस बात की फ़िक्र से ज्यादा मुझे उन रहस्यों को जानने की ज्यादा रूचि थी। किताब को छूते वक़्त मेरे दिल की धड़कने मानो थम से गए हो। नजाने उस किताब में ऐसा क्या होगा। मेने अलमीरा से उस किताब को निकला और अपने रूम में रख दिया। पिता जी के आनेसे पहले मेने सब कुछ पहले जैसा बना दिया। दिन भर ठीक वैसा ही बिता जैसे हर दिन बीतता हे। पर मेरा मन उस किताब के बारेमे सोचता राहा, कब पिताजी नींद के आगोश में समां जाये और कब में उन किताबों को पढ़ सकूँ इस  बात से मेरा मन बेचैन हुए जा रहा था। आखिर कर वो वक़्त भी आया जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था। पिताजी खाने के बाद जैसे ही सोने के लिए बढे में तुरंत अपने कमरे में चला गया, और अपने कबाड़ से किताब को धीरे से निकाल के अपने सामने रखदिया।  किताब को खलते ही बड़े ही साफ और बड़े बड़े सब्दो में लिखा था :- "डिश किताब को पढ़ने की कीमत अदा करनी होगी" । पर मेरे दिमाग को बस उससे पढ़ना था । मेने उस पने पे दीगयी चेतावनी को नज़र अंदाज़ करते हुए आगे बढ़ा । दूसरी दुनिया ये सब्द मेरे आँखोंके सामने आके थम गए। किताब को लिखने वाले ने मानो जैसे हर सब्द को अपने खून से लिखा हो।  आगे लिखा हुआ होता है :- हमारे पास जो हे वो बस एक छोटासा हिस्सा भर हे आने वाले कल का।इस्वर ने जान बूझ कर हमें भबिस्य देखने से रोका। ताकि इस्वर से आगे कोई न जा सके। वो सिर्फ हमसे प्यार करने का दिखवा करता है। पर सैतान एसा नही है, वो अपने पास आने वाले को हर वो चीज़ देता है जो उसे चाहोए । बदले में चुकानी पड़ती है एक छोटीसी कीमत। तुम्हे हर वो चीज़ मिल सकती हे जो तुम्हे पसंद हो। तुम्हे सिर्फ सैतान को अपनी दुनिया में लाना होगा। उसे दूसरी दुनिया से बुलाना होगा । खुद को उसे सौप देना होगा । उसे वापस लाना होगा ।  किताबो के इस चक्रब्यूह मानो जैसे  में उलझ सा गया। कईं सारे सवाल मेरे मन में दस्तक दे रहे थे। दिल में बस एक ही ख्वाइश थी कास में माँ को वापस ला पाता। पिताजी अक्सर कहा करते थे माँ को दूसरे दुनिया के लोग आके लगाए थे। माँ जब गयी तो में जान भी नहीं सका। आज तक बस माँ की तस्वीर ही नसीब हुई हे मुझे। मनो जैसे दिल में कुछ आस हो की माँ से एक दफा दीदार हो सके। आखिर कर इस किताब में ऐसे काईन राज़ दफन थे जिसे में जानने लगा था धीरे धीरे। फिर मेरी नजर एक पने पे जाके रुक गयी। 

जहाँ लिखाथा 

"अगर कोई इंसान अपने आप को सेतान को सौप दे तो उसके बदले में सेतान उसकी कोई भी तीन इच्छाएं पूरी करने की ताकत रखता हे। तुम्हे बस अपनी रूह को सेतान के हवाले करना होगा।" 

पिताजी को अक्सर मेने एक जगह खडे हो के दूर दूर तक देखते हुए देखा हे। पूछने पर सिर्फ इतना बोलते के उस तरफ मत देखो । मेरी  जिंदगी एक रहस्यों का केंद्र बन चूका था।  आखिर कार मुझे वो किताब मिल गया था जिसकी मुझे तलाश थी । जिससे में कई सारे रहस्यों को सुलझा सकता था। और उन अनगिनत सवालों का जवाब भी पा सकता था। इंतजार था तो सिर्फ एक कदम आगे बढ़ाने का। और वो कदम में ले चूका था। 

क्या सच में सेतान हमारी तीन ख्वाइशे पूरी कर पायेगा ? ये सवाल अपने आपमें ही एक रहस्य था जिसका जवाब सिर्फ सेतान ही देसकता था। मेने बिना देरी किये किताब को पढ़ना सुरु करदिया। रोज नए नए चीज़ों से राबता हो चला था। अब तो में उस किताब की आगोश में धीरे धीरे सामने लगा था। कभी कभी नींद टूटने पर खुद को एक अलग ही दुनिया में पाता। में धीरे धीरे आगे बढ़ने चला था बिना अपने अंजाम से वाकिफ हुए। एक सफर की शुरुआत हो चुकीथी जिस सफर का कोई अंत नहीं था। 

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उससे कभी बी अपना नाम मत बताना 

 सेतनि चुड़ैल जिसे आपके नाम से प्यार हे।  rdhindistories

उससे कभी बी अपना नाम मत बताना


लेज के पास में ही एक खँडहर हुआ करता था। जिस मे जिंदगी ने बरसो पहले ही अपना सारा राबता तोड़ दिया था। अब उस खँडहर में सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा पसरता हे। अंदर जाना साफ साफ सब्दो में मना था। और कलेज का भी कहना था की जो भी उसके करीब घूमता हुआ दिखा उसे कलेज से निकाल दिया जायेगा। पर निशांत को रोक के रख पाना मानो जैसे नामुमकिन था। फोटो ग्राफिक का शौकीन निशांत कही न कही जाके अपने पसंद के फटो ले ही लेता था। अपना कैमरा उठाये निशांत निकल पड़ता हे उस खँडहर के तरफ । अंदर पहंच के उसे पता लगा के ये सब क्या चकर था। क्यों मनाही थी वहां आने जाने पर। rdhindistories

वो जगह बाहत ही ज्यादा गन्दी थी। टूटे फूटे दीवारों पे न सिर्फ मकड़ी के जाले, सीलन थे वल्कि अजीबसी बात ये थी के इन सब में भी एक अजीबसा सन्नाटा था। याहाँ तक छत पे जो काले कवे बैठे थे वो भी सान्त थे। मौत जैसे इस माहौल में भी निशांत को अपने फोटो खींचने की पड़ी थी। उसने अपना कैमरा लिया और ढेर सारा फोटो खींचने लगा। और फिर एक दूसरे कमरे में गया। उस कमरे में काईन सारे धब्बे बने थे वहां दीबारों पे। पास में जाके नाखुनो से खुरेद ने पर पाया के वो सारे धब्बे बहोत ज़माने पहले खून से बने थे। और दिलचस्ब बात ये थी के वो खून अभी भी हल्का हलका नम था। दिवार पे ध्यान से देखने पर पता चला के दीवारों में कुछ लिखा हुआ था ,पर क्या लिखा हुआ था कुछ समझ नहीं आ राहा था। निशांत ने जल्दी जल्दी सारे तस्वीर ली और छुपते छुपते अपने हॉस्टल में पहंच गया। सारे फोटो को लैपटॉप में डाल के चेक करने लगा। जैसे ही उस घर की दीवारों की तस्वीर को उसने खोला तो निशांत उस तसवीर में खो सा गया। बड़ी बारीकी से वो उन फोटो को देखने लगा। तभी उसके सामने एक फोटो आया जिसमे उससे सिर्फ एक साल दिखाई दिया 1965। फिर आगे और बारीकीसे देखने पर उसे दिखाई दिया एक औरत अपने बची को मार रही थी। इन आंकड़ों को तुरंत ही निशांत ने इंटरनेट पे सर्च करना सुरु कर दिया। बहोत सारे डॉक्यूमेंट देखने पर आखिर कार एक न्यूज़ पेपर का आर्टिकल मिला जो उस घटना से तालूक रखता था। उसमे लिखा था के 1965 में एक औरत जिसका नाम मीरा था उसने पागल होके  अपने दो बचो के टुकड़े टुकड़े करके उनको यही  पे दफ़न कर दिया था। और खुद भी खुद खुसी कर लिया था।  निशांत को मानो जैसे कोई कहानी लग रहाथा। rdhindistories

वो उन फोटो को इतने बारीकीसे देखने में इतना खो गया था के कब उसके पीछे उसके कमरे का दरवाजा खुला उससे पता भी नहीं चला। पर बाहर से अति हुई ठण्ड हवाएं जब निशांत के चेहरे को चुके निकली तब जाके निशांत को अंदाजा हुआ के उसके कमरे का दरवाजा खुला रह गया हे। जैसे ही निशांत अपने दरवाजे को बंद करने गया, किसीने उसे बहार से बंद कर दिया। हो न हो जो भी था वो आस पास ही होना चाहिए। निशांत तुरत दरवाजा खोल के कॉरिडोर के और भागा। पर बाहर कोई नहीं था। वहां कोई भी दिखाई नहीं दे राहा था। निशांत ने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में गया। पर जैसे ही उसने अपने कमरे की और देखा तो उसके आंखे सीधे कुर्शी की और गयी जो दरवाजे की और मुड़ा हुआ था। पर जब निशांत दरवाजा बंद करने गया था तो कुर्सी सीधी ही थी। निशांत कुछ देर तक उसी तरा खड़े होके कुर्शी की और देखता राहा। और सोचता राहा के आखिर कार ये हुआ क्या ? और फिर जब कुछ समझ नहीं आया तो उसने अपना लैपटॉप बंद किया और लेट ने चला गया। rdhindistories

उसने इन सब बातो पर ज्यादा सोचना बंद कर दिया और मोबाइल से दस्तो के साथ चैटिंग करने लगा। कुछ देर तक चाट करने के बाद जब वो सोने गया तो उसके मोबाइल से अभी बी किसी के चाट करने की आवाज सुनाई दी। गरमी के मौसम के वाबजूद उसके हात पैर ठण्ड से कम्पने लगे। उसने धीरेसे मोबाइल को उठाया तो देखा के उसमे बहोत कुछ टाइप होता जा रहा था। उसने मोबाइल को हात में लिया और देखा तो उसे कुछ समझ में नहीं आया। फिर थोड़े देर बाद टाइप होना बंद हो जाता हे। और निशांत को उन अजीबसी लिखाबट में भी वो दो सब्द दिखाई देते हैं जिन्हे उसने खुद कुछ देर पहले पढ़ा था।  वो थे माया और 1965। उसने बड़े ही घबराहट के साथ अपने टेबल पर रखे पानी  के गिलास को उठाया और पानी के दो बून्द ही मुश्किल से उसके हलक से निचे उतरे होंगे के तभी उसकी नजर दरवाजे की और गयी जहाँ पे एक सुन्दर सी औरत खड़ी थी। निशांत की जान उसके हलक में ही अटकी हुई थी। उसने जो कुछ थोड़ी देर पहले ही पढ़ा था, वो सब उसके आँखों के सामने था। वो औरत धीरे से उसके करीब आयी और उसने बड़े ही प्यार से पुछा " तुम्हारा नाम क्या हे ? निशांत उसकी आवाज सुनके थोडासा हल्का महसूस किया। उसने धीमी आवाज में रुक रुक के अपना नाम बताया। rdhindistories

"निशांत। ..... निशांत नाम हे मेरा। और तुम्हारा ? उस औरत ने अपना नाम मीरा बताया। इतना बता ते ही उस औरत ने निशांत के गले को कस के पकड़ लिया। और उसका गाला दबाने लगी। निशांत चाहा कर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। धीरे धीरे उसका साँस लेना भी मुश्किल होता गया। आँखों के सामने  सब कुछ धुंदला होता हुआ नजर आया। तभी अचानक उसकी नींद टूटी। उसने उठ के देखा तो कमरे में कोई भी नहीं था। आखिर कार उसे चैन मिला। पर अजीब बात थी सपने में उसके हात पैर मारने के वजेसे जो सामान कमरे में बिखरे थे वैसे ही सामान सच में उसके कमरे में बिखरे पड़े थे। उसने तुरंत अपना लैपटॉप खोला और ऐसे सपनो का क्या मतलब होता हे ढूंढ़ने लगा। बहोत ढूंढ़ने के बाद उसे हर जगा एक ही जबाब मिला :-

                                                                       "अकाल मृत्यु "

वो तुरंत भागा भगा अपने कमरे से निकला और अपने दोस्त के पास पहंचा। बड़े जोर जोर से उसने दरवाजे को खट खटया। उसका दोस्त सतीश ने दरवाजा खोला तो, निशांत  बहोत घबराया हुआ हे। उसने निशांत को पानी दिया और उसे अपने बिस्तर पर बिठाया फिर उससे पूरी बकिया सुनी। और जोर जोर से हसने लगा। मतलब के तेरी वाली भूतनी तो कमाल की हे यार।  सवाल का सही सही जवाब देने पर भी मारने निकल पड़ती हे। निशांत के लाख समझाने पर भी उसका दोस्त सतीश उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं था। उसने निशांत को अपने कमरे में सोने के लिए दुबारा से भेज दिया। और खुद भी चैन से सो गया। नीद खुलने के साथ ही सतीश ने हस्टेल के कॉरिडोर में अजीबसा सोर सराबा सुना। दरवाजा खोल के बाहर आके देखा तो उसके धड़कन ठन्डे पड़ गए। निशांत की लाश उसके बिस्तर पर पड़ी थी। और एक कागज का टुकड़ा उस के पास हवा में फड़ फडा रहा था। सतीश ने वो टुकड़ा उठा  के देखा तो उसमे लिखा था " चाहे कुछ भी हो जाये उससे अपना नाम मत बताना। rdhindistories

निशांत  के मौत के बाद सतीश एक दम सदमे था। कैसे भी करके उसने एग्जाम दिया और पास भी होगया। पर उसके दिल में हमेसा निशांत की बात रहेगी। अगर उसने निशांत को उस रात अपने साथ रहने दिया होता तो सायद आज निशांत जिन्दा होता। इसी बिच कलेज में नया एडमिशन सुरु हजाता हे। सतीश को रजिस्ट्रशन में बिठा दिया जाता हे। बहत सारे बचे अपना नाम और पता बतातेआते हे और सतीश लिखने लग ता हे । तभी अचानक एक लड़की वाहां फॉर्म भरने आयी। सतीश ने निचे देखते हुए उसका नाम पुछा। उसने काहा "मीरा " और तुम्हारा। सतीश ने निचे देखते हुए हुए काहा "सतीश"। पर जब सतीश ने पता पुछा तो उसने कहा पीछे वाला खँडहर के गली में । सतीश ने तुरंत ऊपर देखा तो एक लड़का खड़ा हुआ था और कह रहा था " अरे पुराना खँडहर नहीं पुराना बंदर गाह के पास जो गली हे वहां " rdhindistories
सतीश जान गया के उससे क्या गलती हुई थी। उसने अपना नाम बता दिया था। उससे। अब उसके पास  कम समये था। वो तुरंत भगा अपने कमरे में और सरे ऐसे चीज़ जिसे उसके जान को खतरा हो उन सबको उठा के पीछे के तालाब में फेक आया। दिन भर के थका बट से चूर होके आखिर कार उसे नींद आहि गयी। रात के करीब आधे पेहेर ही बीते होंगे, अचानक उसके पैर के निचे से कुछ आवाज़े आयी। उस आवाज़ से सतीश की नींद टूटी और उसने आंखे उठा के देखा तो एक कटार लेके एक औरत अपने बचो को मार रही थी। ये कोई और नहीं वही थी जिसको इस वक़्त आप सोच रहे हे। अगले ही सुबह सतीश की लाश उसके कमरे में मिली। rdhindistories

1965 में मीरा नाम की एक औरत काला जादू किया करती थी। काला जादू में और ताकत की लालसा ने उसे अँधा बनादिया था। एक दिन उसने पागल पन में आके अपनी  दो बेटियों को मर दिया । पर उनको मारने के बाद उससे इस बात का एहसास होता हे के उसने कितनी बड़ी बेवकूफी कर दी हे। और इसी के चलते वो खुद खुसी भी कर लेती हे। और आगे चल के दुबारा कोई ये गलती ना करे इसीलिए जो कोई भी इस घटना के वारेमे या मीरा के बारेमे जान लेता हे या फिर कहीं पर भी उसके बारेमे कुछ पढ़ लेता हे वो उसे मार डालती हे। rdhindistories

"वैसे देखा जाये तो अभी अभी आपने भी उसके वारे मे जान लिया हे। कोई अनजान औरत आपसे नाम                                               पूछे तो कहीं आप उसे अपना नाम मत बता बैठ ना। 

            " में हूँ रोहित, और आप पढ़ रहे थे rdhindistories

                                                                      आपका दिन सुभ हो। 



अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग 1


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग















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बुराई के बदले अच्छाई,कितना सम्भब ?

बुरे के साथ अच्छा और अच्छे के साथ बुरा क्यों होता हे ? 

बुराई के बदले अच्छाई,कितना सम्भब ?



जिंदगी में आपको काईन बार ऐसा लगा होगा के मेरे ही साथ क्यों बुरा हुआ ? हेना जबकि असल में इस दुनिया में किसीके साथ बुरा नेही होता। परिस्तिथि हमे परखते हे। हमने खुस रहने का अपना ही एक अलग परिभासा बना लिया हे। इंसान ही एक ऐसा प्राणी हे जो अपने से किसी और को श्रेष्ठ नहीं मानता। हलाकि इस संसार में जनमे हर प्राणी अपने आप में ही श्रेष्ठ होते हैं। आज हम एक अनोखे कहानी के जरिये इस पुरे बकिये को समझ ने की कोशिश करेंगे। inspirational short stories about life

एक गाऊँ में सरत चंद्र नामके एक लेखक रहते थे। किताबे ही उनकी जीबन का आदर्श थे। परिबार में अक्सर इसी किताबी प्रेम के चलते उनको बाद बिबाद का भी सामना करना पड़ता था। फिर भी उनकी किताबों के प्रति कभी प्रेम में अंतर नहीं आया। सरत चंद्र जी के परिबार में उनकी एक बूढी माँ और उनके पत्नी के समेत दो बेटिया भी थी। सरत जी जितना भी लिखते पर अंत में  उनके जरूरत के आगे कम पड़ जाते। पर किताबों उन्हें गाऊँ का एक ज्ञानी ब्यक्ति का दर्जा दिलवाया था। सायद एहि वजह रही होगी के उन्होंने अपने ऊपर उठ रहे हर बाद बिबाद को नजर अंदाज कर जाते थे। स्वभाब में बड़े ही सरल थे सरत जी। पर पैसों की कमी के चलते उन्हें  काईन बार उधार में सामान लाना  पड़ जाता था। अपने सरल और सांत स्वभाब के चलते सरत जी को हर कोई पसंद करता था। पर कभी कभी उन्हें गाऊँ के गवार किराने वाले से अपने उधारी को लेके कुछ कटाक्षय सुनने को मिल जाते। लेखक जी को फुरसत मेले तो साहित्य में आलोचना भी अक्सर किया करते हे। inspirational short stories about life

सरत जी की पत्नी प्रतिभा देबि, उनके बारेमे आपको क्या कहें ? सरत जी की जीबन की प्रेरणा  रही हे वो। हलाकि परिबार में अनबन तो होती ही रहती हे पर ईंटे तकलीफ में भी सरत जी को अकेला नहीं छोड़ी। गाओं के स्कूल में पढ़ा ती थी। और घर का पूरा दारो मदार उनपे ही था। परिबार को परिबार बनाये रखने  ही योग दान रहा हे। परिबार में अनुसासन कैसेबनि रहे प्रतिभा जी इसपे काफी अनुध्यान करते थे। inspirational short stories about life

वहीँ दूसरी तरफ अपने गाऊँ के बड़े ब्यापारी के  तोर पे गोविन्द सेठ काफी मशहूर था। उसके बचे सरत  के साथ पढ़ते थे। काफी पैसे होने के वजेसे गोविन्द सेठ इंसानो की कदर नहीं  करते थे। दुसरो को अपने छल  कर अपने ब्यापार को बढ़ाया था उन्होंने। सायद ही कोई गाओं में होगा जिसक गोविन्द सेठ ने परेशान  हो। अपने परिबार के अलावा उसके लिए कोई भी मायने नहीं  रखता था। उसके बिपरीत अपने अभाब के वाबजुत सरत जी अपने से कमजोर की बहत मदत करते थे। एक दिन सरत के बड़े बेटो को बुखार हुआ। बुखार बढ़ता ही चला गया। पैसों के कमी के चलते प्रतिभा  को अपने गेहेने बेचने पड़े। उनका बेटा ठीक होगया। पर घर की माली हालत बहत ही बिगड़ गयी। वहीँ दूसरी और गोविन्द सेठ अपने कारोबार में ऊपर उठता ही गया। पर सरत जी  अभी भी दूसरों की मदत करते रहते थे। उनसे  पड़ता वो करते। एक दिन सरत जी के घर गोविन्द सेठ आए। उनकी नजर सरत जी के छोटीसी जमीं पर थी। पर इतने आर्थिक तंगी के वाबजुत सरत जी ने जमीन का सौदा करने से मना करदिया। और ये बात गोविन्द सेठ को खल गयी। एक रात उसने सरत जी के फसल में आग लगा दिया। सारा फसल गया।  वो फसल उनके आम  दानी का एक अहम् स्रोत था। ये बात सुन के सरत जी के  मा को इतना सदमा लगा के वो  चल बसी। परिबार की माली हालत और निचे गिर गयी। inspirational short stories about life

सब जानते थे ये काम किसने किया हे। पर किसीने भी गोविन्द सेठ के खिलाप सरत जी का साथ नहीं दिया। अंत में सरत जी ने अकेले ही उसके खिलाफ मोर्चा निकला। पर उससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ। परिबार के प्रति वो  जिम्मेदारी निभा नहीं सके। आखिर कार प्रतिभा उन्हें छोड़के चली गयी। उस हादसे को अब  दस  साल बीत चुके हे। जीबन ने उन्हें कभी कुछ नहीं दिया। बल्कि जो भी कुछ था वो भी उनसे चीन लिया ? सरत बाबू अपने घर में अकेले रह गए। अपने बचो से दूर।बच्चे कभी मिलने नहीं आए उनसे आज उनके पास खोने को कुछ नहीं हे ? गोविन्द सेठ आज भी अपने परिबार के साथ खुस हे ? और सरत बाबू किताबों के पनो में उलझी हुई उनके कुछ सवालों मेसे एक सवाल का जवाब आज भी ढूंढ़ते हुए  : - 

        बुरे के साथ अच्छा और अच्छे के साथ बुरा क्यों होता हे ?

लेखक के बिचार : -

इस पुरे कहानी में आप को गोविन्द सेठ बुरा और सरत बाबू सही लगे होंगे पर कहानी का एक दूसरा पेहलु भी हे। सरत जी ने कभी भी सचाई को परखने की कोसिस नहीं की। उन्होंने हमेसा परिस्तिथि के साथ बह चलना चाहा। अपने परिबार के प्रति अपने  जिम्मेदारिओं को पूरी तरा निभा न सके। प्रतिवा देबि एक औरत होते हुए भी परिबार के लिए परिश्रम करती रही। दुसरो के मदत करना उचित हे। पर अपने उपर आश्रित अपने परिबार को अलग करलेना ये भी उचित नहीं। परिबार का मुखिया होने का दर्जा वो खोचुके थे। तर्क का बिसाये अब ये नहीं के कौन सही या फिर कौन गलत ? पर सच ये भी हे के हम खुद हमारे परिस्थितिओं के लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार होतें हे। inspirational short stories about life

ये एक बिचार मात्र हे। कृपया comment bx में आप अपने बिचार देना मत भूलिए

कुलकत होगी अगले भाग में। inspirational short stories about life






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जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग


Horrorstories के  इस भाग में जानेगे एक ऐसी घटना के बारेमे जिससे पूरा का पूरा गाऊँ तबाह होगया।


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग



आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक  बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। मुखिया जी ने उन्हें गाऊँ बुलाने का कारण नेहीं बताया था। मुखिया जी को हवेली में न पाकर दोनों बेटे लॉन में बैठे बैठे उनका इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद मुखिया जी किसी से बात करते हुए अंदर के और आये। तभी उनकी नजर उनके पुरे ख़ानदान पे पड़ी। बेटे ,बहू और पोते पोती सब उनके आँखों के सामने थे। पर उनके चहरे पे खुसी की एक झलक तक नहीं थी। क्यों के उन्हें पता था के वो बुरी प्रेत आत्मा कभी भी उनके परिबार पर हमला कर सकती हे। अपने पिता को  इतने तनाब में देख बड़े  बेटे ने इसका कारण पुछा। मुखिया जी जान गए थे के अब सचाई छुपाने से किसीका भी भला नहीं होने वाला। पर उनको सिर्फ एक ही बात का दर सत्ता रहा था। क्या सेहर में पढ़े लिखे उनके बेटे और बहु इस बात को मानेगे या फिर न चाहते हुए भी उनका मजाक बन जायेगा ? इसी सोच बिचार के चलते हुए उन्हों ने सचाई सब को बता  दिया। rdhindistories
बचपन से दूर रखा आपने हमे पिताजी। ना चाहते हुए भी हम आपसे दूर रहे। इतने बड़े मुसीबत  अपने पुरे जिंदगी अकेले किया। क्या आज हमे अपने बेटे होने का फ़र्ज़ अदा करने का एक मौका मिलसकता हे पिता जी? अपने छोटे बेटे के मुँह से ये सब सुन के मुखिया जी के आँखों में आंसू आगये। कहते हैं पिता की असली ताकत उसके बचो में होती हे। पर आपने हमे अपना ताकत क्यों नहीं बनने नहीं दिया पिताजी ? बड़े बेटे के इस सवाल का मुखिया जी के पास कोई जबाब नहीं था। आज पूरा परिबार आपके साथ हे पिता जी। हम दोनों  बहु नहीं आपके बेटी हे। कमसे कम आप हमे ये सब बता सकते थे पिता जी ? भले ही हम सेहरी रिवाज़ में पले  बड़े हे पर बड़ो की बात सुनना ये भी हमारे रिवाज़ में हे। अपने दोनो बहुओं से ऐसा साथ पाकर मुखिया जी के दिल को बहत सुकून मिला। मुझे माफ़ करदो मेरे बचो, न चाहा ते हुए भी मुझे तुम सब को इस मुसीबत से दूर रखने के लिए झूट का सहारा लेना पड़ा। लेकिन आखिर कार तुम सबने मिलके मेरे दिल का बोझ हल्का करदिया। rdhindistories

तो वो आत्मा अब कहाँ हे ? बड़े बेटे ने मुखिया से पुछा ? rdhindistories
वो कहाँ हे ये कोई नहीं जनता पर इतना मालूम हे के वो आज रात तुम सबको हानि पहंचाने जरूर आएगी। पर डरने की बात नहीं हे। मेरे होते हुए तुम सब को कुछ नहीं होगा। मुखिया जी ने तुरंत ही  जो पबित्र धागा लाये थे सबके हात में बांध दिया। बाबा ने कहा  धागे को  भी अपनी अलग नहीं करेगा। आज रात वो तपस्वी हमारे घर आएंगे माहा काल यज्ञं करने हेतु।  तुम  उस यज्ञं में हिसा लोगे। जब यज्ञं चल रहा होगा वो आत्मा  बहलाएगी फुसलायेगी और भड़कायेगी। पर हमे यज्ञं ख़तम होते तक उठना नहीं हे। ये यज्ञं किसी भी हाल में पूरा होना चाहिए। में खुद इस यज्ञं में  बैठूंगा। हमे सारा ध्यान यज्ञं पे ही रखना होगा। गाऊँ वालों को सख्त निर्देश  थे  सूरज ढलते ही अपने घर से बाहर न निकले। दोपहर  करीब पौने  3 के आस्स पास वो तपस्वी मुखिया जी के पास पहंचे और यज्ञं  सुरु करने लगे। तये समय समये के आस पास सारी तैयारी हो गयी। गाऊँ में अँधेरा छाते ही सब अपने अपने घरों में छिप गए। आज जो भी उस भटकती हुई रुह के सामने आएगा वो जिन्दा नहीं बच पायेगा। मुखिया जी के कुल पुरोहित ने माहा काल के त्रिसूल को बनाने के लिए पबीत्र आत्माओ का आवाहन करने लगे। पूजा की बिधि सुरु हो चुकी थी। वो तपस्वी ने मेहेल के चारों  और पबित्र जल का छिड़काब किया था ताकि  वो आत्मा मेहेल के अंदर न आसके। पर जल्द वाजी में उनसे मेहेल का पीछे वाले दरवाजे के और ध्यान ही नहीं गया। और बद किस्मती से वो दरवाजा खुला भी रेह गया था। जैसे जैसे पूजा की  बिधि पूरी होने लगी सब के मन में खुसी होने लगी। पुरोहित जी ने माहा काल त्रिसूल भी बनवा लिया। पूजा की समाप्ति होने पर सब खुस थे। पर मुखिया जी क आशर्य हुआ के वो आत्मा ने एक बार भी हुम्ला करने की कोसिस तक नहीं की। परिबार की सारे सदस्य बहत खुस थे। इसी बिच बड़ी बहु मिठाई लेने अपने कमरे में गयी। क्यों के उसने मिठाई का डिब्बा अपने कमरे में ही रख आयी थी। मुखिया जी के काफी सवाल तो थे पर आखिर कार उन्होंने भी अपने दिल को समझा  लिया। तपस्वी बाबा भी पूजा पूरी होने के खुसी में वापस चले गए थे। पूजा सन्ति पुर्बक सम्पर्ण हुआ। देखते देखते ही गाऊँ में ये खबर फेल  गयी। एक अजीबसी सन्ति छा  गयी थी। मानो तूफान के पेहेले के जैसी सन्ति हो। खेर अब सब ठिक   होगया था। इसी खुसी में मुखिया जी ने आसमान के और देख कर अपने पूर्बजों को नमन किया। फिर वो मुड़े ही थे घर के अंदर आने के लिए तभी उनकी नजर पिछले दरवाजे पे गयी जो की खुला हुआ था। दरवाजा खुला था ये परेशान की बात नहीं थी परेशान की बात ये थी के उस दरवाजे से किसी के अंदर अनेके पैरों के निसान थे। उन्हें समझ ने में ज्यादा देर नहीं हुई के जिसका डर था वही हुआ हे। वो घर के अंदर आ चुकी थी। rdhindistories

कोई किधर नहीं जायेगा।  सब लोग एक  साथ रहो मुखिया जी चीलाते हुए बोले। क्या हुआ पिताजी ? अब घबराने की कोई जरुरत नहीं हे। वो आत्मा अब हमारा कुछ नहीं कर सकती। बड़े बेटे ने हस्ते हुए कहा। ये क्या ?  वो पबित्र धागा क्यों निकाल दिया ? जरासल पिताजी ये धागा चुभ रहा था तो हमने सोचा के अगर अब पूजा ख़तम हो गयी हे तो हम निकाल देते हैं। अरे चुप करो  सब मुखिया जी ने चीलाते हुए कहा। बड़ी बहु कहाँ हे ? वो तो ऊपर अपने  कमरे में गयी हे। मुखिया जी तुरंत ऊपर की और भागे। बाकि सब भी उनके पिछे पिछे भागे। ऊपर पहंच के उन्हने  देखा के उनकी बड़ी बहु खिड़की के पास खड़ी हे। खिड़की खुल हुई थी। बहु ? बहु ? काईन बार आवाज लगाने पर भी  बहु  ने जब कुछ जबाब नहीं दिया तो बेटे ने जैसे ही पास जाके बुलाया तो बडा सा खंजर उसके सिने से आर पार होते हुए उसकी छाती के दो कुकड़े कर डाल ती हे। देखते ही देखते वो आत्मा मुखिया जी के बड़े बेटे को मार डालती हे। कुछ देर के लिए तो कुछ समझ में नहीं आता। पर हातों में खंजर लिए जब वो  आत्मा अँधेरे मेसे रोशनी की और आयी तब जाके सबने उसके काले  चेहरे को देखा। आंखोसे खून टपक राहा था उसके। rdhindistories

तुम  सब ने क्या सोचा था में चली गयी। आज होगा खूनी खेल। में मेरे मन के आग को सांत करुँगी आज। उसके सफ़ेद आंखोसे मिकलती हुयी खून उससे और भी भयानक रूप दे रहीथी। अपने आँखों के सामने अपने बड़े बेटे को मरते हुए देख मुखिया जी के दिल ने धड़कना लगभग बंद कर दिया था। तू मरेगा मुखिया। में तुझे तड़पा तड़पा के मरूंगी। ये केहने के साथ ही वो आत्मा मुखिया को मरने के लिए खंजर लेके आगे बढ़ती हे। तभी अपने पिता को बचाने के लिए मुखिया जी का छोटा बेटा उनके सामने आजाता हे। अगले ही पल उसकी  कटी हुई सर जमीं पर गिरी मिलती हे। मुखिया जी के सामने उनका परिबार ख़तम हो रहा था और वो  कुछ भी नेही कर पा रहे थे। तभी उनके कुल पुरहित वहाँ से सबको निकालते हुए निचे की और भागे। पर वो घरसे निकल पाते इससे पेहेले माहा काल की वो त्रिसूल पुरोहित के छाती को चीरता हुआ आर पार निकल जाता हे। पुरोहित वहीँ मर जाते हैं। ये त्रिसूल तो अभीमन्त्रित थी, तो फिर इस त्रिसूल को उस प्रेत आत्मा ने उठाया कैसे ? पर ये वक़्त सवालों का नहीं था। वो किसी भी हाल में घर से निकल जातें हे। अपने छोटी बहु और तीन बचो के साथ वो उन तपस्वी बाबा के आश्रम के और निकल पड़ते हे। सिर्फ वही थे जो उनको बचा सकते थे। करीब दो  घंटे के बाद वो बाबा के आश्रम में पहंच ते हैं। उनकी ऐसी हालत देख कर  बाबा को भी समझ आजाता हे के क्या अनर्थ हो गया हे। मुखिया जी बाबा से पूछतें हे के वो त्रिसूल जिससे उस आत्मा ने कुल पुरोहित को मार डाला ऐसा कैसे मुमकिन हो सकता हे। rdhindistories

वो आत्मा पूजा बिधि से पहले ही घर में घुस चुकी थी। इसीलिए पूजा सफल नहीं हो  पाया। और अब दुबारा यज्ञं भी नहीं किया जा सकता। तो अब एक ही रस्ता बचा था। मुखिया जी  को वापस जंगल में जाके उस त्रिसूल को वापस उस आत्मा के कब्र पर रखना होगा। वो भी सूर्य उदय होनेसे पेहेले। पर इसमें उनकी जान का खतरा  भी था। पर  यूँ खड़े खड़े अपने परिबार को  मरते हुए देखना उससे अच्छा तो ये होगा के वो खुद ही उस आत्मा को मार दे। वो तुरंत अपने गाड़ी लेके जंगल की और निकल गए। उसके कब्र पर पहंच के देख तो पाया के वो त्रिसूल  वहां नहीं था। कुछ देर ढूंढ़ने पर उनकी नजर कालिया के लास के ऊपर गिरी। जरासल कालिया उस प्रेत आत्मा से बदला लेने आया था पर खुद मारा गया। उसके लास के थोड़े ही आगे वो त्रिसूल  गिरा था। पर वो उस त्रिसूल के पास पहंच पाते वो आत्मा वहाँ आगयी। मुखिया जी के  सामने खड़ी होगयी। पर जैसे ही उसने मुखिया जी को मरना चाहा तो मुखिया जीके  गले में पड़ा वो कबच मुखिया जी को बचा ले गया। इसका फ़ायदा लेते हुए मुखिया जी त्रिसूल उठाने भागे। पर तभी अचानक उनके बड़ी बहु पिछेसे छिलने लगी " पिता जी  मुझे इससे बचालो " मुखिया एक  पल के लिए रुक जाते हैं। उनके बड़े बहु के गले पर खंजर ताने वो प्रेत आत्मा खड़ी हुई नजर अति हे। मुखिया जी रुक जातें हे। rdhindistories

तुम्हे क्या चाहिए ? मुखिया जी पूछतें हे। मुझे तुम्हारी जान चाहिए। वो कबच निचे रखदो। अगर तुम वो कबच निचे रखदोगे तो में तुम्हारे बड़ी बहु को जाने दूंगी। मुखिया जी उसकी बातों पे राजी हो जाते हैं। और उनके कबच को उतार के निचे रख देतें हे। जैसे ही मुखिया जी ने अपना कबच उतारा , आत्मा ने उसी खंजर से  बड़े बहु के सर को धड़ से अलग कर दिया । मुखिया जी का आधा  ख़ानदान मर चूका हे। ये सोचते ही मुखिया जी का सीना फट पड़ा। उन्होंने उस प्रेत आत्मा से कहा " एक नासमझ इंसान ने तुम्हारे साथ बुरा किया। बदले में तुमने काईन मासूमों को मर डाला। "ये इन्तेक़ाम तुम्हे मुक्ति नहीं दे सकती। इन्तेक़ाम से  आज तक किसीको भी मुक्ति नेही  मिली। इतना कहते कहते मुखिया जी ने वो त्रिसूल उठाया और उस आत्मा के सीने में गाड़ दिया। वो आत्मा चीख उठी और दर्द से छिलाने लगी। इसके पहले वो आत्मा गायब  हो जाये उन्होंने उसी त्रिसूल से  ही उसके कब्र पे उस त्रिसूल को गाड दिया। कुछ समय बाद वो तपस्वी बाबा भी वहां आगये। उन्हने मुखिया जी से काहा के ये आत्मा की मुक्ति अब मुमकिन नहीं इसे हमे कैद करना होगा।हमेसा के लिए। तभी मुखिया जी ने इनकार करते हुए उस आत्मा के करीब गए। वो आत्मा दर्द से घुराह रही थी। rdhindistories

मुझे नहीं पता के मेरे दादा जी ने तुम्हारे साथ ऐसा क्यों किया। सायद तुम्हारे साथ जो हुआ वो गलत हुआ। तुमने दादा जी को मार डाला। जान के बदले जान ले लिया तुमने। पर आज तुमने मेरे दोनों बेटों को मार दिया बड़ी बहु को  मारडाला। में तो वैसे भी मरा हुआ हूँ। 70 साल के उम्र में अपने दोनों बेटों  को खो चूका हूँ। ये जंग  को खत्म करदो। मुझे मारकर तुम्हे सुकून मिले तो मुझे मार डालो, मेरे 3 बचो को मार के अगर तुम्हे  मुक्ति मिल सके तो मार दो हम सब को।  तुम खुद भी आजाद हो जाओ। ये कह कर मुखिया ने आत्मा के सरीर से त्रिसूल निकाल के दूर रख दिया। और छोटी बहु और 3 पोता पोतीओं के साथ उसके सामने आंखे बंद करके बैठ  गए। कुछ देर में सुबह भी हो गयी। जब आंखे खुली तो वो आत्मा वहां से गायब थी। सायद उसे भी समझ आगया था के माफ़ी, बदले से ज्यादा कीमती होती हे। किसीना किसीको तो माफ़ करना ही पड़ता हे। ताकि जिंदगी दुबारा पनप सके । इस हादसे के बाद सबने उस गाऊँ को छोड़ दिया। मुखिया जी अपने परिबार के साथ सेहर चले गए। केहतें हे आज भी वो आत्मा उस जंगल में भटकती हे। पर कभी किसी के मरने की खबर नहीं आयी। rdhindistories


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2






जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 1



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जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2


मुखिया जी के ख़ानदान पे जो मुसीबत आ पड़ी थी उससे वो भली भांति वाकिफ थे। कालिया ने मौत का खेल फिरसे सुरु करवा दिया था। कालिया का पूरा परिबार मारा जा चूका था। वो अब किसी भी हाल में उस प्रेत आत्मा को मारना चाहा ता था। लेकिन ये कोई भी नेही जनता था के आगे क्या होगा। मुखिया  जी  के दो बेटे थे जो सेहर में रहते थे। मुखिया जी  ने बचपन से ही उनको गाऊँ से दूर रखा था। पर मुखिया जी को उनकी चिंता सताने लगी। कहीं ये प्रेत आत्मा उनका नुकसान न कर बैठे। मुखिया जी ने बिना देरी किये गाऊँ के माहा काल मंदिर जाके अपने कुल पुरोहित से मिले । अब कुछ नहीं हो सकता, कुल पुरोहित ने बड़े ही निरसा से सर को झुका के गहरी सांसे लेते हुए कहा। वो आत्मा अब पहले से काई अधिक ताकत बर हो चुकि हे। उसके सामने जाना अपने मौत को दावत देने जैसा होगा। .माहा काल का कबच हटते ही उस आत्मा को अपनी असीम शक्तियां  वापस मिल गयी हे। और उसके अतृप्त इच्छाओं के साथ वो अब पहेले से काई ज्यादा खतनाक होचुकी होगी। कुल पंडित से निरास होने के बाद उनके पास एक ही रास्ता था के वो अपने परिबार को एकठा करले। और जितना हो सके उस भटकती रूह से दूर चले जाये। पर मुखिया जी को बहत जल्द एहसास होने वाला था के उनके ऊपर कितना बड़ा मुसीबत आने वाला हे। अगले दिन से उस प्रेत आत्मा ने अपना बदला पूरा करने के लिए एक एक कर के गाऊँ वालो को निशाना बनाना सुरु कर दिया। गाऊँ में मेहज  कुछ दिनों में ही कत्ले आम मच गया। हर रात कोई न कोई गायब होने लगा। हर परिबार जो मुखिया जी का सामान करता था उसे उस प्रेत आत्मा का ग़ुस्सा झेलना पड़ता था। धीरे धीरे ये बात साफ हो गयी के गाऊँ में अब जीना मुश्किल हो चूका था। गाऊँ में हवन और पूजा भी करवाया गया पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। गाऊँ वाले इससे परेशान होके गाऊँ छोड़के जाने लगे। ये सब मुखिया जी अपने आँखों के सामने होता हुआ देख रहे थे । इसी के चलते एक दिन मुखिया जी एक बहोत बड़े  तांत्रिक से मिलने जाते हे। और तांत्रिक को गाऊँ में लेके आते हे। तांत्रिक को देख लोगों में एक बिखरी हुई उम्मीद जागने लगता हे। पर खुनी सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले राहा था। गाऊँ में सायद ही अब कोई ऐसा परिबार होगा जिसने अपने परिबार मेसे किसीको न खोया हो। पर मुखिया के प्रति अपने सामान को जताने के खातिर कुछ परिबार अभी बी मुखिया के साथ खड़े थे। hindi stories

गाऊँ के हालत को देखते हुए तांत्रिक को ये जानने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा के गाऊँ पे किसी आत्मा का जबरदस्त केहर हे। उसने मुखिया जी से पूरी दास्ताँ सुनी। फिर उस तांत्रिक ने अपने झोले मेसे कुछ अभीर निकला और मुखिया  जी के घर के ठीक बीचो बिच बैठ गया। वो साधना में लीन होगया। इसीके साथ ही गाऊँ के लोगों में डर बढ़ने लगा। करीब एक घंटे तक साधना में लीन रहने के बाद वो उठा और जा के मुखिया जी के दादा जी के तस्वीर के आगे खड़ा होगया। "ये गाऊँ  सपित हो चुकी हे। वो प्रेत आत्मा बहोत सक्ति  साली हो गयी हे। उसकी अतृप्त इच्छाओं ने उससे और ताकत बर बना दिया हे। अब उससे रोकने का कोई रास्ता नहीं हे। " ये कह कर उस तांत्रिक ने मुखिया  जी के दादा जी के और इशारा किया। सब चौक गए। "क्या हुआ बाबा "मुखिया ने पुछा ? ये कौन हे ? तांत्रिक ने ईशारा करते हुए पुछा। ये मेरे दादा जी हे। मुखिया का जबाब सुनके तांत्रिक बोल उठा ये आत्मा इसके बंस के पीछे यानि के जब तक ये तुम्हारे ख़ानदान को मिटा नेही देती ये चैन से नहीं बैठेगी। मंटा हूँ इसकी दुश्मनी हमसे हे। हमारे से ख़ानदान से हे, तो फिर ये पुरे गाऊँ को अपना निशाना क्यों बना रही हे। मुखिया ने पुछा। वो आत्मा एक दुस्ट आत्मा बन चुकी हे। इसीलिए वो इस पूरे गाऊँ को तभा कर देना चाहती हे। hindi stories

पर इसका कोई इलाज तो होगा न ? मुखिया  जी बड़ी बेचैनी से ये सवाल पूछ रहे थे ।  इसका सिर्फ एक ही रास्ता हे। तांत्रिक ने बड़े ही धीमी आवाज़ में कहा। क्या उपाए हे बोलिये हम सब करेंगे ? तांत्रिक ने काहा के तुम्हारे गले में ये जो माहा काल का कबच हे उससे उतार दो। इस कबच के वजेसे वो आत्मा तुम्हारे नजदीक  नेही आ पारहि हे। और इसके चलते वो आत्मा इन मासूम गाऊँ वालों को अपना निशाना बना रही हे। ये सुनके मुखिया  जी एक दम सन होके अपने कुर्सी पे बैठ गये । गाऊँ  वालोँ के खुसी के खातिर अपने जीबन को खुर्बान  करना स्वीकार कर लिया।  hindi stories

पर सवाल अभी भी वही अटका हुआ था। क्या वो आत्मा सिर्फ मुखिया की जान लेके सबको छोड़ के चली जाएगी ? ऐसा मुमकिन होता हुआ नहीं दिख राहा था। वो कबच ही था जिसने मुखिया को अब तक बचा के रखा था। तभी मुखिया ने एक सुझाब दिया के जैसा कबच उसने पहना हे अगर वैसा ही कबच सारे गाऊँ वालों को पहना दिया जाये तो ? पर उसमे एक दिकत थी। उस कबच को बनाने की बिधि किसीको पता नहीं था। और  जिस किताब में ये बिधी लिखी हुई थी वो किताब कहाँ हे ये किसीको नहीं पता था। पर मुश्किल ये था के इतनेसारे कबच बनाने में बहोत दिन लग जायेंगे। तब तक वो आत्मा किसीको भी जिन्दा नहीं छोड़ेगी। मुखिया  जी को चारो और सिर्फ तबाही ही दिखनी लगी। आखिर कार अपने परिबार को बचाने की हर मुमकिन कोशिश भी ख़तम होती हुई दिख रहीथी। तभी अचानक तांत्रिक ने मुखिया जी को किसी सीधी प्राप्त बाबा का पता दिया। पर दिकत ये थी के वो बाबा हमेसा सीधी में लीन रहते थे। इसीलिए उनके दर्सन  बड़ा ही दुर्लभ था। पर एक आखरी उम्मीद सिर्फ वही थे। जो इस पुरे गाऊँ को बचा सकते थे। अगले दिन सुबह मुखिया जी अपने कुछ भरोसे मंद लोगों साथ उनसे मिलने गए पर उनसे मुलाकात हो पाती तभी तेज़ तूफान के चलते उन्हें एक जगह पर रुकना पड़ा। मुखिया जी को हालत का पूरा इल्म था इसीलिए उन्होंने अपने दोनों बेटों को अपने से दूर ही रखा था। पर सायद उन सबको पास बुलाने का वक़्त आगया था।  hindi stories

उन्होंने अपने दोनों बेटो को फ़ोन करके बुला लिया। इसी दौरान जहाँ उनका रुकना हुआ था वहा एक आदमी दूर एक कोने पे बैठा मुखिया जी को घूरे जा रहा था। कुछ देर बाद वो  खुद अपने जगह से उठ के आया और मुखिया जी के पास बैठ  गया। आप जिससे मिलना चाहते हे वो कहाँ हे में जनता हूँ। ये कहकर वो आदमी दूर काली पाहाडी की और इशारा करता हे । मुखिया जी तुरंत उसके बातये हुए रास्ते पे निकल गए। कुछ दूर चलने के बाद एक जगह पे उन्हें कोई बैठा हुआ दिखाई दिया।  ये वही थे जिनके  मुखिया जी वहां गए थे। वहां वो योगी अपने तपस्या में लीन थे। पूरी रात उनके पास बैठने के बाद जब सुभे सुभे उनकी आंखे खुली तो उनके सामने मुखिया जी खड़े थे। मुखिया जी को देखते ही वो सब जान गए। वो आत्मा तुम्हारे ख़ानदान को मिटा देना चाहती हे। और उससे बचने का कोई भी उपाए नहीं हे। योगी की बात सुन कर मुखिया जी लगभग  टूट ही गए। अब तो उनकी आखरी  उम्मीद भी बेकार हो जाएगी। तवी अचानक वो बाबा मुखिया जी को बोले के एक उपाए हे पर उससे कर पाना बेहद मुश्किल हे। होसकता हे तुम्हारी  जान भी चली जाये। मुखिया जी हर सर्त  पर राजी थे। hindi stories

क्या थे वो सर्त ? आखिर उस प्रेत आत्मा को कैसे हराया जा सकता हे ? क्या होगा अगर मुखिया जी वो उपाए नहीं कर पाएंगे ? ऐसे अनगिनत सवालों के जबाब जानेगे कहानी के अगले और अंतिम भाग में। कहानी जारी हे।  hindi stories


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