• The Secret Of The Nagas (Shiva Trilogy-2)

    This is the second novel in the trilogy on Shiva by Amish Tripathy. The book ‘Nagaon Ka Rahasya’ is the Hindi version of the book originally written in English ‘Secrets of Nagas’.

  • Satyayoddha Kalki: Eye of Brahma

    After a defeat at the hands of Lord Kali, Kalki Hari must journey towards the mahendragiri mountains with his companions to finally become the avatar he is destined to be.

  • The Immortals of Meluha

    जब बुराई एक महाकाय रूप धारण कर लेती है, जब ऐसा प्रतीत होता है कि सबकुछ लुप्त हो चुका है, जब आपके शत्रु विजय प्राप्त कर लेंगे, तब एक महानायक अवतरित होगा।

  • तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

    तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। क्यों के अंधेरा होने पर ही रोशनी की जरूरत होती है। और कुछ बुरी सक्ती हमेशा रोशनी को मिटाने के चक्कर में होती है। तो में आप सबको आज ये बताऊंगा के कैसे एक रोशनी के दूत ने अंधेरे का साथ दिया और बन गया अधेरा का सबसे ताकतवर शहंशह.

  • जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग

    वो आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। आगे जानने के लिए यहाँ click करे.

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Corona battle 2021। एक जंग कोरोना के संग। कोरोना का जंग। कोरोना वायरस की कहानी।

corona battle 2021। एक जंग कोरोना के संग। कोरोना का जंग। कोरोना वायरस की कहानी।


कालः पचति भूतानि, कालः संहरते प्रजाः 

कालः सुप्तेषु जागर्ति, कालो हि दुरतिक्रमः || 

काल प्राणियों को निगल जाता है । काल सृष्टि का विनाश कर देता है । यह प्राणियों के सो जाने पर भी उनमें विद्यमान रहता है । इसका कोई भी अतिक्रमण नहीं कर सकता ।
मई 19, 2021 

कहतें हैं की इंसान का बस सिर्फ एक तय सीमा तक ही सिमित है। उसके बाद इंसान बेबस हो जाता हे।  कुछ ऐसा ही हो रहा हे हम सब के साथ। ये जंग अभी भी जारी हे कोरोना का जंग। 
"आप समझ नहीं रहें है।  मेराा वहां जाना बेहद जरूरी है। ये समय बहस करने का नहीं हे। मेरी बीवी अंदर मर रही हे। उसके पास कोई नहीं हे। मुझे अंदर जाने दो" 
ये कहते हुए मैने एक 70 साल के बुजुर्ग आदमी को रोते हुए देखा। मेरे पास उनके करीब जाने का भी वक़्त नहीं था।कुछ देर तक मुझे मेरे चैम्बर तक उनकी आवाज़  सुनाई दी फिर आवाज़ आनी बंद होगयी। अस्पताल के कुछ लोग उन्हें धका मारके बाहर निकाल देते है। मेरे सामने हो रहे इस सर्मनाक बकिए को देख कर में सन्न रह गया। पर बिपति के समय धैर्य रखना ही एक डॉक्टर की पहचान होती हे। तवी मेरे पीछे से आवाज़ आयी 

डॉक्टर आप यहां खड़े है ! चलिए वक़्त बहोत ही कम है। में चाहकर भी उस बूढ़े आदमी की कोई मदत नहीं कर सका । एक के बदले पचास लोगों के जान दाऊ पे लगी थी। एक दरिंदे ने पूरे मानव समाज को अपने कब्जे में कर रखा था। मेरे पूरे डॉक्टर जीवन में ऐसा हालत मैने नहीं देखा था। ये एक महाामारी थी। सच कहूं तो एक चेताबनी। 

मरीज को यहां लाओ। जल्दी करो। उस आदमी को जल्दी से ओक्सीजन दो। डॉक्टर हमारे पास ओक्सीजन की बहोत कमी हे। मरिया ने मुझे धीरे से बताया। मरिया मेरी सबसे अछि दोस्त हे। और एक काबिल नर्स भी। 

डॉक्टर में मरना नहीं चाहता। में सांस नहीं ले परहा। कुछ करो डॉक्टर ।
तुम्हे कुछ नहीं होगा। जल्दी से सिलिंडर लाओ नर्स। मैंने ऊँची आवाज़ में मरिया से कहा। 

हमारे पास और नहीं है डॉक्टर।
क्या मतलब नहीं है? वो इंसान मर जाएगा। हमे बचाना होगा उसे मारिया। वो सांस नहीं ले पा राहा । अब में अपना धैर्य खोने लगा था। 

कहां से लाऊं डॉक्टर । पूरा सिस्टम काम में लग चुका है।
हमे किसिके मरने तक का इंतेज़ार करना होगा। तब जाके सायद एक मिल पाए। ये कह कर मरिया ओक्सीजन के जुगाड़ में लग गयी। 

ये सुनकर मेरे आंखों से आंसुओं की नजाने कितने बूंदे बेहगाए। पर उन्हें खुल कर बेहेने देने की इजाजत नहीं थी मुझे। इंतजार  अलावा  मेरे पास कोई बिकल्प सेस नहीं था।  दर्द भरी इस जुंग में मेरे सामने ही एक जिंदेगी ने उमिद के साथ अपना दम तोड दिया।

करीब आधे घंटे बाद मारिया भाग ते हुए आके बोली - डॉक्टर एक सिलिंडर  खाली हुआ। आप उस मरीज को ले अयी ये।

बोहोत देर होचुकी है मारिया । उम्मीद हार चुकिहे। वो मर चुका है। मुझे टूटता हुआ देख मरिया ने समझते हुए मुझे कहा - नहीं डॉक्टर उम्मीद अभी भी जिंदा है। पूरी दुनिया उमिद पे कायम है। और वो उम्मीद आप हो डॉक्टर। पूरी दुनिया इस भरोसे इस दरिंदे से लड़ रही हे क्यों के उन्हें यकीं हे के डॉक्टर्स उहने बचा लेंगे। आप यूँ पीछे नहीं हैट सकते। 
मैने नम आंखों से मारिया को देखा। लगा जैसे उम्मीद की आखरी किरण अभी भी है।

लोग हजारों के तादात में मर रहे है। इंसानियत अपने घुटने टेक चुका था। तबाही का वो आलम था जिसे लब्ज़ों  में बयान कर पाना सायाद ही मुमकिन हो पाए।

आज से 55  दिन पहले।

डॉक्टर आपको सादी की पहली सालगिरह मुबरखो। उसदिन हमारी पहली सालगिरह थी। घर पर एक बड़ी पार्टी राखी हुई थी.
क्या बात है आज खूब जच रही है इस पिंक गाउन में।
बस भी करिए डॉक्टर ।
डॉक्टर पूरी दुनिया के लिए हूं। भला कौनसी बीवी ऐसी  होगी जो अपने पति को डॉक्टर केह के बुलाती होगी ?में बुलाती हूं ।
क्यूं के आप दुनिया के सबसे अच्छे डॉक्टर हो।

सही कहा मैडम अपने।
तभी किसीने दरवाजा खट खटाया। 

अरे मारिया आओ आओ।
आप दोनों को सादी की पहली सालगिरह मुबरखो।

बच्चे कहां है तुम्हारे
वो बाहर लॉन में है डॉक्टर।

मारिया मेरी हॉस्पिटल की सबसे काबिल नर्स थी।
और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी।

पूरे 8साल के मेडिकल कैरियर में मैने मारिया जैसी काबिल नर्स नहीं देखा शहर के बड़े बड़े लोग पार्टी में सिरकत करने आए है। उन्मेसे एक मेयर साहब थे। मुझसे बात करते हुए बोले - 
डॉक्टर साहब कैसे है आप?में ठीक हूं मयर सर। आप बताईए।सुना हे आप कुछ  तयार कर रहें हे। 
जी हाँ। मैने हमारे पास वाले टाउन में एक नया हॉस्पिटल बन बाने के लिए एक नया प्रोजेक्ट तैयार किया है। अगर आप मेरी कुछ मदत कर सके ?

हमारे शहर में तीन बेहद बड़े बड़े हॉस्पिटल है डॉक्टर हमें और अस्पताल बनाने की क्या जरूरत है। और आज के दिन में भी आप दूसरे लोगों के बारेमे सोच रहें है। पिछली बार सायद अपने कोरोना को हलके में लेलिया ? आपको क्या लगता हे वो चला गया ? नहीं सर हमे तैयार रहना चाहिए आज भी हमारे पास पर्याप्त चीज़े नहीं हे। आप बीती बातों को भूल जाइये डॉक्टर ये सब पुराना हो गया हे। लोग भूलने लगे हैं।  बेहतर होगा आप भी भूल जाइये। में आप के लिए कहीं घूम के आने का बंदोबस्त करता हूँ। ये कह के वो चले गए। 

मारिया मेरे पास आई और मुझ से कहा कि कोई नहीं डॉक्टर उम्मीद पर दुनिया कायम है। इस साल नहीं तो अगले साल ही सेही पर हम हॉस्पिटल जरूर बनाएंगे।धीरे-धीरे पार्टी खत्म होने लगी।ठीक है डॉक्टर तो फिर मैं चलती हूं कल आपसे मुलाकात होगी। यह कहकर मारिया चली गई ।पार्टी में आए सारे बड़े-बड़े लोग धीरे-धीरे पार्टी खत्म करके जाने लगे ।और आखिरकार पार्टी खत्म होने के बाद मैं और मेरी पत्नी हम दोनों  लन में बैठकर खुली आसमानों में तारे को निहारते रहे। तभी मेरी पत्नी ने मेरे कंधे पर सर रखकर मुझसे बोली -तुम जो हमेशा गरीब लोगों के बारे में सोचते रहते हो तुम्हारी इसी बात पर मुझे बहुत ही ज्यादा प्यार आता है ।

सिर्फ डॉक्टर बन जाना बड़ी बात नहीं है एक अच्छा डॉक्टर बन पाना वो एक अलग ही चीज है। और वह सब मैंने तुम में  पाया है। मैंने हमेशा ही  एक अच्छे डॉक्टर को दिखा इसीलिए हमेशा तुम्हें डॉक्टर के नाम से बुलाती हूं। पता नहीं चल पाया कि वो रात कैसे गुजर गयी ।

सुबह मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि शहर में एक अफरा-तफरी मची हुई है। कुछ लोग हमारे घर के पास खड़े होकर घबराकर पुलिस को कुछ बता रहे थे। तभी अचानक मेरी फोन की घंटी बज उठी मैंने फोन उठाया तो उस तरफ से मरीया ने घबराहट से आवाज से मुझसे कहा डॉक्टर जल्दी आ जाइए अस्पताल । अचानक से कोरोना के दस मरीज़ सामने आये हैं।  और उनमे से दो की हालत बहत नाजुक हे। सायद ये पहले वाले से ज्यादा खतनाक हे। काफी तेज़ी से फेल रहा हे। 
ये सुनते ही में तुरंत निकल पड़ा। बोर्ड की मीटिंग बुलाई गयी थी। 

डॉक्टर आप को मीटिंग में बुलाया गया है । जल्दी से चालिए मीटिंग शुरू हो चुकी है।
मैंने मारिया को गौर से देखा उसकी आंखों में अजीब सी चिंता चाई हो रही थी। एक ऐसी घबराहट मानो जैसे आगे एक बड़ा सा तूफान हम सब का इंतजार कर रहा है । मीटिंग ख़तम करके में अपने चैम्बर लौट रहा था तब मुझे मरिया मिली। 

क्या हुआ डॉक्टर मीटिंग में क्या बताएं ? स्थिति बहुत गंभीर है मारिया शहर में अब तक ऐसे शोकेस आ चुके हैं और यह संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है अगर लोगों को रोका नहीं गया तो यह समस्या बहुत जटिल हो सकती है शायद यह इस वायरस का सबसे ताकतवर स्ट्रेन हो। इस बार संक्रमण होने के आसार पिछली बार से 6 गुना ज्यादा है। यह सुनते ही मारिया के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थी। पिछली बार उसने कई ऐसे हालातों का सामना किया है जिसने उसे अंदर से हिला दिया था। और दोबारा उसे उस हालत में जाने की कोई दिलचस्पी नहीं थी।

जो संख्या सुबह तक मैच 100 तक थी सांस खत्म होते-होते रात को वह संख्या 190 तक पहुंच चुकी थी अभी समझने में ज्यादा वक्त नहीं लगा कि हम उस स्थिति में दोबारा जाने वाले हैं जहां से लौट आने की खुशी हम सबको थी। और इस बार हमसे बहुत बड़ी गलती हो चुकी थी। हमने हमारे दुश्मन को पहलीबर से कमजोर समझने की भूल कर चुके थे। जबकि वह पहले से कहीं और ताकतवर बनकर लौटा था।


देखते ही देखते दो-तीन दिन के अंदर यह तादाद 300 के पार चला गया। देश में जो सारी घटनाएं घट रही थी उसे देखकर यह लग नहीं रहा था कि लोगों को पिछली बार से कोई फर्क पडा है लेकिन फर्क तब पड़ना शुरू हुआ जब अप्रैल की दूसरे हफ्ते की शुरुआत हुई। इंसानियत की एक ऐसी दुर्दशा होने वाली थी जिसे देखकर किसी के भी रूह कांप जाए। जो तादाद 200-300 में अटका हुआ था। अब वह दस हजार के पार चला गया था।अब लोग अस्पतालों में इकट्ठा होने शुरू हो गए ।

हमें इस बार सख्त निर्देश थे कि हम किसी भी तरह स्थिति को नियंत्रण में रखें। इस बार कोरोना से लड़ने के लिए पहले से ज्यादा एक्सपीरियंस था हमारे पास और शायद हम इस बार कॉरोना को हराने में कामयाब हो भी जाते। तब हम सब से हुई एक बहुत बड़ी गलती।जिस गलती ने मुझे और मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल के रख दिया। कोरोना का जंग अब हम हारने वाले थे !

कहानी का दूसरा तथा अंतिम भाग जल्द ही प्रकाशित होगा।

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दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 4

दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 4    

दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 4



डॉक्टर मैं कहां हूं यह कौन सी जगह है ? यह तुम मुझे कहां ले आए ? ऐसेही कुछ सवाल थे जब अरमान को होस आया। 

नर्स जल्दी करो होश आ गया है इसे । इंजेक्शन लाओ, वो जो मैंने कल तुम्हें लाने को कहा था । 
तुम्हें कुछ नहीं होगा अरमान तुम ठीक हो जाओगे । 

डॉक्टर पहले यह तो बताओ कि मैं हूं कहाँ  ? 

तुम मेरे घर में हो अरमान तुम्हें बहुत सारे चोट लगे हैं । पर कोई बात नहीं तुम ठीक हो जाओगे। मैं तुम्हें ठीक कर दूंगा। 

मुझे यह चोट कैसे लगे? 
एक लंबी कहानी है मेरे दोस्त तुम उस वक्त होश में नहीं थे। सब बताऊंगा पर पहले तुम ठीक हो जाओ। 

अरमान जिंदगी और मौत की उस दहलीज  से वापस आया था जहां मैंने उसके लौटने की सारी उम्मीद छोड़ दी थी। उस रात उस दरिंदे ने अरमान की रूह को इतनी चोट पहंचाई की कोई आम इंसान होता तो वो दम तोड़ देता। यह महज एक इत्तफाक नहीं हो सकता कि उस किताब को पढ़ने के बाद अरमान के पिता जी कहां गायब हो गए । हो सकता है कि उस किताब में कुछ ऐसी बातें लिखी हो जिन्हें समझ पाना मेरे बस से बाहर हो, लेकिन आज भी उस किताब में ऐसी कई सारी बातें दर्ज है जिनको समझना और जानना मुझे अब जरूरी लगने लगा था। अरमान को इस हालत में देखना मेरे लिए अब बर्दाश्त से बाहर था । मेरे पूछे गए सवाल के बदले में उस प्रेत आत्मा ने अरमान के शरीर को लहूलुहान कर डाला। मुझे नहीं पता था कि मेरे सवालों की कीमत इतने ज्यादा होंगे। आज इस बकिए को 3 महीने बीत चुके हैं। बड़ी मुश्किल से अरमान को होश आया है। शायद मैं उससे माफी मांगने के लायक भी नहीं रहा। कभी-कभी हम ना चाहते हुए भी उस हद तक चले जाते हैं जहां से लौट के आ पाना हमारे लिए नामुमकिन हो जाता है। धीरे-धीरे वक्त आगे बढ़ता गया।

अरमान को ठीक हुए 1 हफ्ते से भी ज्यादा वक्त हो चुका था। अब वह अपने घर लौट जाना चाहता था। लेकिन अभी भी उसके ज़ख्म हरे थे। चाह कर भी मैं उन जख्मों को पूरी तरह से ठीक नहीं कर पा रहा था। मैं जैसे ही अरमान को उसके घर ड्रॉप करके निकल रहा था तो अरमान ने थोड़ी देर उसके पास बैठने को कहा। बिना कुछ कहे मैं उसके पास थोड़ी देर बैठ गया। न जाने एक अजीबसी खामोशी छा गई थी। पहले भी वह घर किसी बिराने से कम नहीं था। लेकिन आज कुछ अलग ही खामोशी थी। 

मुझे माफ कर देना अरमान मेरी वजह से तुझे तकलीफ उठानी पड़ी अगर मैं उस दिन खामोश रह जाता तो शायद आज तू इतने दर्द में ना होता। तभी अरमान ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रख कर मुस्कुराते हुए मुझसे कहा मेरे दोस्त मैंने कहा था ना हर चीज की एक कीमत होती है । और तू मेरा दोस्त है और मैंने ये कीमत अपनी दोस्ती के लिए अदा की हे। तू दिल पर कोई भी बोझ मत रख अब सब ठीक है।

अरमान को उसके घर छोड़ने के बाद मैंने कुछ दिन अकेले में कहीं दूर जा कर घूम आने की सोची। कुछ पल अकेले में बिताना चाहता था। इस भीड़ भरी दुनिया से अलग कुछ पल अकेले सिर्फ अकेले। दिल पर कहीं सारे बोझ थे। तो उन्हें हल्का करने के लिए मैं स्विजरलैंड चला गया। वहां पर दो-तीन हफ्ते बिताने के बाद भी मेरे दिल से वो बोझ हल्का नहीं हो रहा था। सबसे बुरी बात तो यह थी कि मैं किसी साइकैटरिस्ट के पास भी नहीं जा सकता था। एक डॉक्टर होते हुए इन सारी बातों को किसी साइकेट्रिस्ट को बताना मेरे लिए बेवकूफी होती। सोचा समय के साथ सब धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।
अपनी यादों के साथ में वहां से लौटने की तैयारी कर ही रहा था कि तभी अचानक एक रात मुझे अरमान के नंबर से कॉल आया । मेरे फोन उठाते ही अगले ओर से किसी की रोने की आवाज सुनाई दी । पहले तो मैंने नंबर चेक किया यह देखने के लिए कि कॉल अरमान का है या नहीं । लेकिन कॉल अरमान के मोबाइल से ही आया था । पर रोने की आवाज किसी औरत की थी। पता नहीं चल पा रहा था कि वह औरत कौन है । रोते-रोते आवाज में सिर्फ इतना ही सुनाई दिया की अरमान को बचा लो वह उसे ले गई है, मेरे पूछने पर भी उस औरत ने मुझे अपना नाम नहीं बताया।

जीवन के हर मोड़ पर मैंने कुछ ना कुछ खोया था और आज मैं अपने दोस्त को खोना नहीं चाहता था। मेरे लाख पूछने पर भी उस औरत ने अपने बारे में कुछ नहीं बताया बस धीमी आवाज में इतना ही बोल पाई कि वक्त बहुत कम है।

मैं तुरंत ही वहां से निकला अरमान के घर । मुझे पता था यह जो कुछ भी हो रहा है इसके पीछे वजह मैं ही हूं। अगली सुबह जब में अरमान के घर पहुंचा तो मैंने देखा कि दरवाजे खुले हुए हैं और अरमान खून से लथपथ नीचे पड़ा है। उसकी हालत बदतर हो चुकी थी। अचानक उसकी पीठ पर गहरे जख्म बन गए थे। इससे पहले कि मैं कुछ कर पाता अरमान ने मुझे धीरे से अपने पास बुलाया और हल्की आवाज में मेरे कानों में बोल उठा सौदे को आधे में छोड़ कर आने का अंजाम देख लो डॉक्टर । तुम्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। अगर तुम अपने दोस्त को जिंदा देखना चाहते हो तो तुम्हें फिर से इस सौदे को पूरा करना होगा। इतना ही बोल कर अरमान बेहोश हो गया। शायद सच में मेरे पास वक्त बहुत कम था। मेरी जिंदगी अब राख बन चुकी थी। मेरे अपने ही दोस्त को मैंने नर्क में धकेल दिया था। और अब उसे कैसे बचाऊं इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी । अपने दोस्त को अपनी आंखों के सामने तड़प तड़प के मर ता हुआ देखना बहुत ही दर्द भरा था। एक डॉक्टर होते हुए भी अपने दोस्त के जख्मों को भर नहीं पा रहा था मैं। कभी-कभी जिंदगी आपको ऐसे हालात में लाकर खड़ा कर देती है जहां पर आपको ना चाहते हुए भी उन लोगों की मदद लेनी पड़ती है जिन से दोबारा मिलना तक गवारा ना हो। हर्षिता दीवान, कहने को तो हम साथ में पढ़ते थे साथ में हमने डॉक्टर की डिग्री भी हासिल की लेकिन उसकी दिलचस्पी हमेशा से ही भूत प्रेत और नेगेटिव एनर्जी के बारे में ही थी। कभी-कभी वो खुद इतना नेगेटिव बन जाती कि उसकी शक्ल तक देखना मुझे पसंद नहीं आता। पर ऐसी हालत में सिर्फ वही एक ऐसी लोती इंसान थी जो हमारी मदद कर सकती थी। मैं तुरंत ही अरमान को अपने गाड़ी में बिठाया और हर्षिता से मिलने निकल पड़ा। सबसे बड़ी दिक्कत जो हमारे सामने थी वो थी उसे ढूंढना । 2 साल पहले उसकी मां की गुज़र जाने के बाद उसने अपना घर छोड़ दिया और उसके बाद वह कहां है यह किसी को भी नहीं पता। मैंने अपने पूरे फ्रेंड सर्कल में पता लगा लिया पर कोई भी ऐसा नहीं था जो यह बता सके कि हर्षिता दीवान कहां पर है । मुझे किसी भी हालत में उस तक पहुंचना था। हर्षिता बचपन से ही अपनी नानी के घर में पली-बढ़ी थी । और मुझे यह अंदाजा था कि हो ना हो उसका पता शायद उसके नानी के घर में किसी को पता हो । मैंने तुरंत ही अपनी गाड़ी को हर्षिता के नानी के घर की ओर मुड़ा और मेरा अंदाजा सही निकला । वहां जाकर हमें हर्षिता का फोन नंबर और पता मिला। में तुरंत ही उस पते पर निकल पड़ा। वहां पहंच कर मैने घर की घंटी बजाई पर दरवाजा खोलने कोई नहीं आया। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद मैंने कॉल लगाना मुनासिब समझा। मैंने जैसे ही उस नंबर पर कॉल लगाया तो सामने से बहुत धीमी धीमी आवाज आने लगी। आवाज इतनी धीमी थी कि अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो रहा था कि सामने से कोई क्या बोल रहा है। गौर से सुनने पर मुझे सिर्फ इतना सुनाई दिया कि तुम गलत पते पर आ गए हो। और उसके हसने के अंदाजे से पता लग चुका था कि वो हर्षिता नहीं थी। तभी अचानक दरवाजा खुला तो मैंने देखा कि मेरे सामने हर्षिता खड़ी थी पर उसके हाथ में मोबाइल नहीं था। पर मेरे कानों में हंसने की आवाज बराबर आ रही थी।वो कौन थी जो हमारा पीछा साए की तरह कर रही थी। क्या हर्षिता हमारी मदत कर पाएगी। क्या था वो सौदा जो अधूरा रह गायाथा जानेंगे कहानी के अगले भाग में।
कहानी आगे जारी रहेगी। 

दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 3










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दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 2

दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 2

मैने बोहोत कोशिश की पर में आपके बेटे को बचा नहीं सका। ये बात एक माँ को केहपना कितना मुश्किल हे मुझे उसदिन समझ आया। 

मेरे ये सब्द उसदिन एक माँ के सीने पे जो ज़ख्म कर गए उसे सायद ही कोई भर पाए। बहोत मुश्किल होता हे एक डॉक्टर बनना। जिंदगी और मौत के उस सफर को बेहद क़रीबसे महसूस किया हे मेने। बेबस हो जाता हूँ में। किसीको जिंदगी लौटा पाना हमारे बस  में कहाँ ? अपने इस दर्द को हलका करने, में चल पड़ा अपने एक दोस्त के पास जो पैसे से एक पारानोमाल साइंटिस्ट था। 

यूँ तो लोग उसे पागल कहा करते थे। पूरा दिन वो अपने आपको एक घर में बंद कर लेता।कभी कभी समय से परे लगता हे वो मुझे।  उसके घर जाने का मन तो नहीं करता पर आज मन बहोत भारी  हे। सायद वही हे जो मुझे मेरी तकलीफों से निजात दिला सके। में उसके पास अपने दर्द  का इलाज ढूंढ़ने अक्सर जाया करता हूँ । पर आज में वाकई में थक गया था। एक बचे की मौत ने मुझे अंदर से हिला दिया था। 

अरमान और में बचपन के दोस्त हे। बचपन से जनता हूँ उसे। अचानक एक दिन उसके पिताजी गायब हो गये। तबसे लेके आज तक अरमान  के स्वभाब में बहत सारे बदलाब हुए हे। वो अक्सर रात में किसी से बाते करता। उसके पिताजी के चले जाने के बाद मानो किसीने उसके बचपन ही छीन ली हो। अरमान पास में ही एक यूनिवसिटी  में संस्कृत का अध्यापक हे। जवान हे पर सादी नहीं की उसने।

करीब पौने ४ बजे के आस पास में उसके घर पहंचा। अरमान हमेसा के तरा कुर्सी पे बैठा अपने एक हात में कुछ पुरानी किताबे लिए बैठा हुआ था। और साथ में ही उसने एक रुद्राक्ष माला भी पकड़ा हुआ था।  मेने आज तक उस रूद्राक्ष्य माला को पकडे अरमान को कभी नहीं देखा। पर आज अरमान  इतना बिचलित क्यों लग रहा था ? क्या वजह हो सकती हे ? खेर वजह चाहे कुछ भी हो में अंदर चला गया , इस  बात से अनजान के आगे मेरे साथ क्या होने वाला हे।  मेने जैसे ही दरवाजा खोला तो अरमान ने पीछे अपने सर को धीरे से घूमते हुए मुझसे धीमी आवाज़ में कहा " जल्दी से अन्दर आ जाओ , बाहर खतरा हे " मेने उसकी बात मानी और अंदर चला गया।

क्या हुआ अरमान? आज बड़े परेशान लग रहे हो। सब ठीक हैं ना? मैंने हल्की आवाज़ में धीरे से उसके पास बैठते हुए उस से पुछा। तभी मेरा ध्यान उसके बाएं हाथ की ओर गया, उस के बाएँ हात में एक घाव था, एक डॉक्टर होने के नाते मेरा ये फ़र्ज़ बनता हैं के मैं उसका इलाज़ करूँ। पर अरमान ने मुझे रोकते हुए धीमे से कहा, "ये घाव एक ताकत वर प्रेत आत्मा ने बनाया हैं जो ठीक मेरे पीछे बैठी हैं और अगर में थोडासा भी हिला तो मेरे धड़ से मेरी गर्दन को अलग कर देगी।

ये सुनने में जितना ज्यादा डरावना था उससे कहीं ज्यादा अजीब। अपने दुख बाँटने चला में खुद एक बड़ी परेशानी में घिरता हुआ दिख रहा था। मेने ज्यादा सोचने के बजाए  उसके बातो को मान लेना ही ठीक समझा। और हालत के सुधरने का इंतजार करने लगा। कुछ ही देर बाद अरमान  खड़ा हुआ और एक हलकी सी मुस्कराहट के साथ मुझे बोला "तुम आज बच गए मेरे दोस्त " और जोर जोर से हसने लगा।

 ये क्या मजाक हे ? अगर मुझे कुछ होजाता तो ? मेने अभी भी धीमी आवाज़ से उसे कहा।

कैसे कुछ होजाता ? एक तुम ही तो हो डॉक्टर जिसे मुझपे भरोसा हे। में अपने एक लौते भरोसे को कैसे कुछ होने देता। और वैसे भी अब वो प्रेत आत्मा जा चुकी हे।  अब तुम उची आवाज़ में बात कर सकते हो।

पर अरमान  तुम्हारे हातो से ये खून कैसे निकला ?
ये एक लम्बी कहानी हे डॉक्टर किसी और दिन  सुनाऊंगा फुर्सत में। खेर तुम बताओ तुम किसलिए आए थे ? मेरे पास तुम्हारा क्या काम ? तुम ठहरे भगवान को मान ने वाले और हम नास्तिक आदमी। वैसे उदास लग रहे हो। 

में आज टूट सा गया हूँ यार।  एक माँ से उसके बेटे को चीन लिया मैंने।  बचाने की पूरी कोसिश कीथी यार पर नहीं बचा पाया। 

होता हे डॉक्टर कभी कभी होता हे।  सब कुछ हमारे हातों में कहाँ ? खुद को दोस मत दो। ये लो सराब पिलो मन हलका हो जायेगा। ये कहते हुए उसने मुझे एक सरब की बोतल थमा दी। 

 और मेरी बात मनो तो यूँ छोटी छोटी बातों पे दिल को छोटा मत करो। जीबन और मरण बस एक खेल ही तो हे। 

नहीं अरमान ये हलके में लेने वाली बात नहीं हे। उस माँ का उसके बचे के अलावा और कोई नहीं था।  और सायद मेने वो भी छीन लिया।

अरमान ने धीरे से सराब की गिलास को टेबल पर रखते हुए कहा :- अगर तुम कहो तो सायद में उस बचे को बचा सकता हूँ। उसने मेरे कानो के पास धीमी आवाज़ से कहा। 

क्या ? मेने उसके हात पकड़ के उससे दुबारा पुछा। क्या कहा तुमने ?

हाँ तुमने सही सुना में उसे दुबारा बचा सकता हूँ। ला सकता हूँ उसे वापिस। 

कैसे ? ये कैसे मुमकिन हे ? मेडिकल साइंस में ऐसा कोई तरीका नहीं हे। मैंने उसकी और नम आंखोसे देखा। 

हमारी आत्मा हमारी दुनिया छोड़ने के बाद और दूसरी दुनिया में जानेसे पहले एक अलग ही आयाम में रहती हे। जहांसे उसे दुबारा वापस लाया जासकता हे।

मुझे अरमान की बातों पर यकीं नहीं हो रहता। ये सच नहीं हो सकता। ये कैसे मुमकिन हे ? क्या तुम कोई जादूगर हो ? या फिर कोई तांत्रिक जिसका माथा फिर गया हो। मेरी आवाज़ में अब थोडीसी ताल्हिया आने लगी थी। 

जादूगरी आँखों का महज धोका हे। में जो करता हूँ उसके लिए कुर्वानी चाहिए। आत्मा के बदले आत्मा ?

क्या मतलब आत्मा के बदले आत्मा ? में एक डॉक्टर हूँ अरमान। तुम्हारी इन बेतुके, बहियाद जबाब सुनने को  मेरा कोई इरादा नहीं हे। तुम सच पागल हो गए हो अरमान। में इतना कह कर वहां से चला आया।

में सायद दुबारा कभी भी अरमान के पास नहीं जाता, पर अगले सुबह मेने जो देखा उसपे यकीं करपाना मेरे बस में नहीं था। वो बचा मेरे आँखों के सामने खेल रहथा। और पास वही उसकी माँ कड़ी मुझे मुस्कुराती हुई देखि जारही थी।
 
कहानी आगे भी जारी रहेगी












दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 2
















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दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 3

दूसरी दुनिया एक रहश्य भाग- 3



रात को सोने से पहले दवा की एक गोली खाली पेट खा लेना। ज्यादा दर्द हुआ तो दोबारा आके मिलना। और हां शराब पीना थोड़ा बंद कर दो मुरारी लाल। अब जाओ चिंता मत करो ठीक हो जाओगे। वाकई में ये काम थका देने वाला है। दो पल के लिए  आँखे बंद किया था कि तभी अचानक एक आवाज आयी 

 एक डॉक्टर का काम बहुत मुश्किल का काम होता है ना बेटा? ये कहते हुए एक अधेड़ उम्र का आदमी हाथ में एक किताब लेके मेरे सामने बैठा था। क्यों डॉक्टर साहब सही कहना मैने।

क्या तकलीफ है आपको ? मैने धीरे से पूछा उसे। पर उस आदमी ने जो कहा वो वाकई में हैरान कर देने वाला था। उसने मुझे कहा :- तकलीफ तो है पर क्या मुझे मेरे रूह का सौदा करना होगा इस तकलीफ  से निजात पाने के लिए। जवाब मेरे पास था नहीं और सच कहूं तो उस आदमी को भी जवाब सुनने की कोई जल्दी नहीं था। में कुछ बोलूं इससे पहले ही वो बोल पड़ा रूह का सौदा करना बेवकूफी नहीं लगता डॉक्टर ? और हस्ते हस्ते निकल गया। तभी अचानक नर्स के जोर जोर से हिलाने से में अपने ख्यालो से  से बाहर आया। डॉक्टर अब बाहर कोई मरीज नहीं है। 

अजीब था पर मैंने हालत पे काबू करते हुए किसी तरह खुद को समझाया। पर जो सब मेरे साथ हो रहा था उसे नजर अंदाज भी तो नहीं किया जा सकता। मैंने तुरंत अपने सामान उठाए और गाड़ी में बैठ कर निकल गया अरमान से मिलने।


तीन महीने से भी ज्यादा वक़्त बित चुके थे उस वाक़िए को।तबसे लेके अबतक मैने अरमान से दूरी बना ली थी। पर अब मुझे जवाब जानना था। शाम का वक़्त हो चला था। मैने धीमे क़दमों से अरमान के घर में क़दम रखा। वही जान लेबा अँधेरा खमोशी से भरा एक कमरा।  बड़े ही धीमे आवाज़ से मेने अरमान को पुकारा , पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।  तभी अचानक मेरे सामने से एक परछाई गुजरी। मुझे लगा सायद अरमान होगा , ये सोचकर में उस परछाई के पीछे गया। उस परछाई का पीछा करते करते में एक अँधेरे कमरे में पहंच गया। कमरा पूरा अँधेरे से भरा पड़ा था।  सिर्फ एक परछाई सी दिख रही थी। मे पसीने से पूरा तर बदर हुआ जा रहा था।  में उस परछाई के करीब गया तो मुझे बड़ी बेचेनिसि होने लगी।  परछाई को छूने  की कोशिश कर है रहा था के तभी पिछेसे अरमान ने मुझे खींच लिया। 


डॉक्टर ! तुम यहाँ , इस  वक़्त ? और इतने  दिनों बाद ? सब  ठीक तो है ना ? अरमान ने बड़े ही सहेज तरीके से मगर धीरेसे पुछा।


इन सारे  सवालों से बड़ा एक और सवाल था, जो मेरे दिल में दस्तक दे रहा था। वो परछाई किसकी थी अरमान?  


पहले तो वो थोड़ा चुप खड़ा रहा फिर धीरे से मुझे लेके एक और कमरे में चला गया।  डॉक्टर मेने तुमसे कहा था के मेरे घर आनेसे पहले मुझे बता दिया करना। पर नहीं तुम तो सीधे ही आ जाओगे। मेरी बात ध्यान से सुनो,  यहाँ तुम्हारे किसी भी सवालों का कोई जवाब नहीं मिल सकता। 

पर क्यों नहीं ? मेरी आवाज़ अब थोडासा सख्त हो चला था। मुझे मेरे सवालों के जवाब चाहिए अरमान। तीन महिनो से में तुमसे भाग रहा हूँ पर कभी कोई न कोई वजह सामने आ हि जाता हे जो मुझे यहाँ आने को मजबूर कर देता हे। आखिर तुमने उस मरे हुए लड़के को जिन्दा कैसे किया ? 


छोडो डॉक्टर मेरे बातो को तुम मानोगे नहीं तो बता के क्या फ़ायदा ? वैसे भी तुम्हारे लिए यही अच्छा हे के तुम जितना हो सके इन सब से दूर ही रहो। कुछ चीज़े हमारे बस में नहीं होती डक्टर।  उन्हें समझने की कोशिस करना बेकार हे। पर अगर तुम वाकई में जानना चाहते हो तो सुनो, ये कहकर अरमान ने मुझे एक अँधेरे कमरे में ले गाया। 


डॉक्टर अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो जैसा मैं कहूं वैसा ही करना। मैंने डरते हुए अपने सर को हाँ में हिलाया। कमरा इतना अँधेरा था के कुछ भी नहीं दिख रहा था। तभी अरमान दोबारा से बोल उठा आज इस कमरे में जो भी होगा उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी।  क्या तुम अभी भी आगे जाना चाहते हो ? एक बार सोच लो ? पर उस वक़्त मुझे सब मंजूर था मेने हामी भरी। अरमान ने मुझे एक धागा देते हुए कहा इसे अपने हात पे बांधलो  । 


लेकिन एक बात का ध्यान रखना डॉक्टर कुछ भी हो जाये इस धागे को निकालना मत। जब तक ये धागा तुम्हारे हात में हे तुम सुरखित हो। इतना केहे कर वो मेरे सामने बैठ गया। कुछ देर तक वो कुछ मन्त्र पढता रहा, फिर अचानक कमरे में सारी  चीज़े हिलने लगी। अरमान ने मुझे सांत रहने को इशारा किया। पर अरमान को देख के लग रहा था के वो बहोत ही बेचैन हे । फिर वो अचानक से सांत होगया। 

 

डॉक्टर पीछे मत देखना बरना वो तुम्हारे दो टुकड़े करदेगी। इस बार में  जान चूका था की अरमान मजाक नहीं कर रहा हे। क्यों के ठीक मेरे कानो के पास किसी के सांसो की गरमाहट  को मेहसूस कर पा राहा था में। मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो चली थी। हम कहाँ पे हे अरमान ? मेने बड़े ही धीमी आवाज़ से पुछा। डॉक्टर हम उस जगह पे हे जहाँ पे इंसानी रूह का सौदा होता हे। यहाँ तुम्हे अपने सारे सवालों के जवाब मिल जायेंगे। तुम अब सवाल पूछ सकते हो। मेने हिमत  के साथ अपने आप पर काबू करते हुए पुछा :- वो लड़का जिससे में बचा नहीं पाया था वो आखिर कर जिन्दा कैसे हे ? तभी पिछेसे आवाज़ आयी :- हर सावल की एक कीमत होती हे डॉक्टर क्या तुम कीमत चुकाने को तैयार हो ? मैंने पूछा कैसी कीमत ? 


फिर से सवाल ? 


में समझ गया की अब हमारे  बस में कुछ नहीं था ? मेने हामी भरा। तो ठीक हे डॉक्टर हर सवाल के बदले में तुम्हारे दोस्त के जिस्म से मांस  का एक टुकड़ा खींच लुंगी। ये सुनतेही मेरे पेरो तले से जमीं खिसक गयी। मेने तुरंत ही अरमान को वापस चलने को कहा पर तब तक बहोत देर हो चूका था। सायद अब वहां से लौटना नामुमकिन था। 


कहानी आगे भी जारी रहेगी।



















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दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 1

 दूसरी दुनिया - एक रहस्य rdhindistories प्रस्तुत करता हे एक अनोखी और रोमांचक कहानी - दूसरी दुनिया एक रहश्य !

दूसरी दुनिया - एक रहस्य भाग - 1

पिताजी, ये दूसरी दुनिया क्या होती है? क्या हमारी दुनिया के अलावा कोई और दुनिया भी है? मेरे इन अनगिनत सवालों ने पिताजी को हमेशा उलझन में डाल दिया था। शायद यह मेरी उम्र का असर था, जिसमें जानने की इच्छा दिल और दिमाग पर हावी हो जाती थी। तब मैं महज आठ साल का था। पिताजी बहुत ही धार्मिक इंसान थे, और भूत-प्रेत की कथाओं में उनका गहरा ज्ञान था। लेकिन वे अपने ज्ञान की टोकरी को कभी-कभार ही खोलते थे।

मेरी माँ अब इस दुनिया में नहीं थीं, पर पिताजी की परवरिश में मुझे कभी उनकी कमी महसूस नहीं हुई। पिताजी सुबह होते ही अपने काम में लग जाते। इसी का फायदा उठाकर मैं अक्सर उन धूल चढ़ी किताबों को अलमारी से बाहर निकालने की कोशिश में लग जाता। मेरी नज़रें अक्सर उन शब्दों पर जाकर रुक जातीं, जिन पर लिखा होता था "दूसरी दुनिया"।

क्या वजह हो सकती है कि पिताजी ने उस किताब को बंद करके रखा हुआ है? क्या उसमें कोई खतरनाक रहस्य छुपा है? मेरी उत्सुकता चरम पर थी, पर मेरी हर कोशिश बेकार जाती। किताब को छूने भर से मेरे दिल की धड़कनें तेज हो जातीं, जैसे उसमें कुछ अदृश्य शक्तियाँ बंद हों।

एक दिन, जब पिताजी अपने काम में व्यस्त थे, मैंने हिम्मत जुटाई और उस धूल भरी लाल किताब को अलमारी से निकाल लिया। किताब का स्पर्श ठंडा और भारी था, मानो उसमें अनकहे रहस्यों का बोझ हो। मैंने उसे अपने कमरे में छिपा दिया, पिताजी के आने से पहले सब कुछ पहले जैसा बना दिया।

किताब के पन्नों में झाँकते ही मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। क्या यह किताब सचमुच दूसरी दुनिया के दरवाजे खोल सकती है? क्या इसमें उन भूत-प्रेत की कहानियाँ हैं, जिनके बारे में पिताजी बताते थे? मेरी जिज्ञासा अब डर में बदल रही थी, पर मैं रुकने वाला नहीं था। उस रात, मैंने तय कर लिया कि मैं उस किताब को खोलूंगा और जानूंगा कि पिताजी ने इसे क्यों छुपाकर रखा है।


एक दिन सुबह जब मेरी नींद टूटी तो मेने पाया के घर पर पिताजी नहीं थे। और तेज़ हवाओं से कुछ टकराने की आवाज़ बार बार मेरे कानो में गूंज रही थी। मेने अचानक देखा की वो अलमीरा खुला छोड़ दिया हे पिता जी ने। में तुरंत उसे बंद करने गया तो मेरी नजर उस धूल से सनी लाल रंग की किताब पर गयी , जिसने अपने पन्नो  में नजाने कितने राज़ छुपाये हुए थे। पिताजी ग़ुस्सा करेंगे इस बात की फ़िक्र से ज्यादा मुझे उन रहस्यों को जानने की ज्यादा रूचि थी। किताब को छूते वक़्त मेरे दिल की धड़कने मानो थम से गए हो। नजाने उस किताब में ऐसा क्या होगा। मेने अलमीरा से उस किताब को निकला और अपने रूम में रख दिया। पिता जी के आनेसे पहले मेने सब कुछ पहले जैसा बना दिया। दिन भर ठीक वैसा ही बिता जैसे हर दिन बीतता हे। पर मेरा मन उस किताब के बारेमे सोचता राहा, कब पिताजी नींद के आगोश में समां जाये और कब में उन किताबों को पढ़ सकूँ इस  बात से मेरा मन बेचैन हुए जा रहा था। आखिर कर वो वक़्त भी आया जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था। पिताजी खाने के बाद जैसे ही सोने के लिए बढे में तुरंत अपने कमरे में चला गया, और अपने कबाड़ से किताब को धीरे से निकाल के अपने सामने रखदिया।  किताब को खलते ही बड़े ही साफ और बड़े बड़े सब्दो में लिखा था :- "डिश किताब को पढ़ने की कीमत अदा करनी होगी" । पर मेरे दिमाग को बस उससे पढ़ना था । मेने उस पने पे दीगयी चेतावनी को नज़र अंदाज़ करते हुए आगे बढ़ा । दूसरी दुनिया ये सब्द मेरे आँखोंके सामने आके थम गए। किताब को लिखने वाले ने मानो जैसे हर सब्द को अपने खून से लिखा हो।  आगे लिखा हुआ होता है :- हमारे पास जो हे वो बस एक छोटासा हिस्सा भर हे आने वाले कल का।इस्वर ने जान बूझ कर हमें भबिस्य देखने से रोका। ताकि इस्वर से आगे कोई न जा सके। वो सिर्फ हमसे प्यार करने का दिखवा करता है। पर सैतान एसा नही है, वो अपने पास आने वाले को हर वो चीज़ देता है जो उसे चाहोए । बदले में चुकानी पड़ती है एक छोटीसी कीमत। तुम्हे हर वो चीज़ मिल सकती हे जो तुम्हे पसंद हो। तुम्हे सिर्फ सैतान को अपनी दुनिया में लाना होगा। उसे दूसरी दुनिया से बुलाना होगा । खुद को उसे सौप देना होगा । उसे वापस लाना होगा ।  किताबो के इस चक्रब्यूह मानो जैसे  में उलझ सा गया। कईं सारे सवाल मेरे मन में दस्तक दे रहे थे। दिल में बस एक ही ख्वाइश थी कास में माँ को वापस ला पाता। पिताजी अक्सर कहा करते थे माँ को दूसरे दुनिया के लोग आके लगाए थे। माँ जब गयी तो में जान भी नहीं सका। आज तक बस माँ की तस्वीर ही नसीब हुई हे मुझे। मनो जैसे दिल में कुछ आस हो की माँ से एक दफा दीदार हो सके। आखिर कर इस किताब में ऐसे काईन राज़ दफन थे जिसे में जानने लगा था धीरे धीरे। फिर मेरी नजर एक पने पे जाके रुक गयी। 

जहाँ लिखाथा 

"अगर कोई इंसान अपने आप को सेतान को सौप दे तो उसके बदले में सेतान उसकी कोई भी तीन इच्छाएं पूरी करने की ताकत रखता हे। तुम्हे बस अपनी रूह को सेतान के हवाले करना होगा।" 

पिताजी को अक्सर मेने एक जगह खडे हो के दूर दूर तक देखते हुए देखा हे। पूछने पर सिर्फ इतना बोलते के उस तरफ मत देखो । मेरी  जिंदगी एक रहस्यों का केंद्र बन चूका था।  आखिर कार मुझे वो किताब मिल गया था जिसकी मुझे तलाश थी । जिससे में कई सारे रहस्यों को सुलझा सकता था। और उन अनगिनत सवालों का जवाब भी पा सकता था। इंतजार था तो सिर्फ एक कदम आगे बढ़ाने का। और वो कदम में ले चूका था। 

क्या सच में सेतान हमारी तीन ख्वाइशे पूरी कर पायेगा ? ये सवाल अपने आपमें ही एक रहस्य था जिसका जवाब सिर्फ सेतान ही देसकता था। मेने बिना देरी किये किताब को पढ़ना सुरु करदिया। रोज नए नए चीज़ों से राबता हो चला था। अब तो में उस किताब की आगोश में धीरे धीरे सामने लगा था। कभी कभी नींद टूटने पर खुद को एक अलग ही दुनिया में पाता। में धीरे धीरे आगे बढ़ने चला था बिना अपने अंजाम से वाकिफ हुए। एक सफर की शुरुआत हो चुकीथी जिस सफर का कोई अंत नहीं था। 

निचे दिए लिंक पर क्लिक करके इस कहानी के और भी भाग पढ़िए 































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