• The Secret Of The Nagas (Shiva Trilogy-2)

    This is the second novel in the trilogy on Shiva by Amish Tripathy. The book ‘Nagaon Ka Rahasya’ is the Hindi version of the book originally written in English ‘Secrets of Nagas’.

  • Satyayoddha Kalki: Eye of Brahma

    After a defeat at the hands of Lord Kali, Kalki Hari must journey towards the mahendragiri mountains with his companions to finally become the avatar he is destined to be.

  • The Immortals of Meluha

    जब बुराई एक महाकाय रूप धारण कर लेती है, जब ऐसा प्रतीत होता है कि सबकुछ लुप्त हो चुका है, जब आपके शत्रु विजय प्राप्त कर लेंगे, तब एक महानायक अवतरित होगा।

  • तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

    तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। क्यों के अंधेरा होने पर ही रोशनी की जरूरत होती है। और कुछ बुरी सक्ती हमेशा रोशनी को मिटाने के चक्कर में होती है। तो में आप सबको आज ये बताऊंगा के कैसे एक रोशनी के दूत ने अंधेरे का साथ दिया और बन गया अधेरा का सबसे ताकतवर शहंशह.

  • जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग

    वो आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। आगे जानने के लिए यहाँ click करे.

Horror stories लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Horror stories लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सच्ची भूतिया घटना । एक अनसुलझा true hunted आप बीती 2021।

Hindi most true scary hunted story एक सच्ची घटना 

सबसे खौफनाक कहानी 2021 एक अनसुलझा आप बीती।

ऐसे घटनाये बहोत ही दुर्लभ होतें हे। हर किसी के साथ घटित नहीं होते। इसलिए इस बिषय को लेके समाज में दो मत पाए जाते हैं। जिसके साथ ये घटना घटित हुयी हो वो इस बात को स्वीकार करलेता हे। पर हम सभी किसी न किसी घटना चक्र के चलते इसमें शामिल होते हे। में आपको इसे जुड़े कुछ घटना के बारे में बताने जारहा हूँ जो की मेरे एक दोस्त के साथ घटी थी। ये कहानी एक सच्ची घटना  पर आधारित हे।

यह उन दिनों की बात है जब मैं और मेरा दोस्त अपनी कोचिंग खत्म करके रात के 9:00 बजे के करीब घर वापस आरहे थे. रास्ते में हमारे एक श्मशान घाट आता था हालांकि हम बचपन से उसी शहर में रह रहे थे, और न जाने कितनों बार श्मशान के रास्ते आना-जाना हुआ होगा लेकिन उस दिन हम दोनों के साथ कुछ अजीब सी घटनाएं घटी। बात को शुरू करने से पहले मैं एक चीज पर आपका ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा कि कभी भी अगर सुनसान रास्ते पर आपको किसी की सांस लेती हुई आवाज बार-बार सुनाई दे और देखने पर भी आसपास कोई नजर ना आए तो कभी भी गाड़ी से मत उतरियेगा । और किसी भी परिस्थिति में एक जगह पर स्थिर होकर खड़े मत रहिएगा। में आपको ये चीज़ इशलिये बता रहा हूँ क्यों के उस दिन की एक घटना से इसका संबध है। जो मैं अभी आप सबके साथ साझा करने वाला हूं। तो बात ये है कि हर रोज की तरह जब हम उस दिन भी अपने घर वापस आ रहे थे न जाने क्यों मेरे बदन में थोड़ी सी पीड़ा होने लगी । गंभीर वाली बात तो नहीं लेकिन ना जाने क्यों मुझे कुछ ऐसा लगा कि मुझे कुछ देर रुक जाना चाहिए। मेरे घुटनों में अचानक से दर्द होने लगे। ऐसा लगने लगा कि बुखार आ जाएगा सर्दी का मौसम रास्ता एकदम सुनसान । रात के 9:30 बज चुके थे क्योंकि यह हमारा रोज का आने जाने वाला रास्ता था इसलिए हमें ज्यादा डर तो नहीं लगा था लेकिन उस दिन वाकई में कुछ अजीब सा लगने लगा। और यहां मेरे पैर में उठा दर्द की वजह से मैं चल भी नहीं पा रहा था। मेरे दोस्त के बोलने पर भी मैंने उसे कुछ समय रुकने के लिए बोला। मेरी हालत देखकर मेरा दोस्त आखिरकार मान गया ।वहां पर थोड़ी देर हमने हमारी साइकिल खड़ी की और उतर कर एक जगह बैठ गए। वहां से महज कुछ ही कदम के आगे श्मशान घाट आता है। हम वहासे जल्दी निकल जाना चाहते थे। सर्द हवाएं और कोहरा आगे देखने में अवरोध पैदा कर रहीथी। तभी अचानक मुझे ऐसा लगा कि कोई इंसान हमारे आस पास बैठा है। कोहरा कितना ज्यादा था आप इस बातसे अंदाजा लगा सकते हो के हम से 5 गज की दूरी के आगे देख पाना भी संभव नहीं था। लेकिन उसकी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। मुझे लगा कि कोई आम इंसान ही होगा क्योंकि अक्सर यहां पर कुछ लोग बैठा करते हैं और कोई आदमी सर्दी के वजह से सायद कम्प कम्पा रहा होगा। मैंने आवाज को गौर से सुनने की कोशिश की कभी-कभी वह आवाज तेज से आती तो कभी-कभी रुक जाती । लेकिन आश्चर्य की ये बात ये हे की मेरे दोस्त जो की मेरे बगल में बैठा था उसे कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। उसने मुझसे कहा मैं ही हूं जो बार-बार सांस ले रहा है वह मुझे सुनाई दे रहा होगा। मेने ज्यादा बेहेस तो नहीं किया लेकिन वहां से जितनी जल्दी हो सके निकल जाना सही लगा । मुझे अब दर लगने लगा था । वहां बैठे हुए हमें बस 2 से 3 मिनट ही हुए होंगे मैंने तुरंत अपने दोस्त से कहा कि हमें यहां से निकलना चाहिए। यह कहकर मैं तुरंत वहांसे उठा और साइकिल निकल कर आगे बढ़ने लगा पर जब मैंने पीछे मुड़ कर अपने दोस्त को दोबारा पुकारा कि जल्दी चलो यहां से तो मैंने देखा कि मेरा दोस्त दूसरी तरफ मुंह करके बैठा है । मैंने उससे थोड़ी ऊंची आवाज में बुलाया और इस बार मुझे सांस लेने की आवाज कुछ ज्यादा ही तेजी से सुनाई दे रही थी। में तुरंत अपने दोस्त के पास गया और जैसे ही मैंने उसके हाथ को छुआ तो मुझे भीषण गर्मी का एहसास हुआ। वो दर से कम्प रहा था। मैंने उसकी आंखों में देखो वह किसी और देख कर बड़ी ही बुरी तरीके से कांप रहा था । अब मुझे डर लगने लगाथा। इतनी सर्दी में भी मेरे पसीने छूटने लगे थे। अब मुझे लगने लगा था कि आज कुछ असुभ होने वाली है। तभी अचानक वहां कुछ अघोरी आगये जो वहां से गुजर रहे थे उन्हें देख कर थोड़ी हिमत आयी। मैंने कैसे भी करके अपने दोस्त को वहां से खींच कर साइकिल पर बिठाया और मेरे घुटनों में दर्द होने के बावजूद साइकिल जोर-जोर से चलाते हुए शमशान को पार किया। बड़े आश्चर्य की बात थी कि जैसे ही हमने श्मशान को पार किया उसकी बुखार अचानक से गायब हो गए। देखकर आश्चर्य हुआ लेकिन मेरा दोस्त अभी भी घबराया हुआ था। मैंने पहले उसे उसके घर छोड़ा और फिर अपने घर पहुंचा । आखिर वो क्या था जिसे देख कर मेरा दोस्त इतनी भयंकर रूपसे दर गया था। ये जानने के लिए में सुभे उठ के तुरंत ही अपने दोस्त से मिलने गया वहां जाकर पता चला के पूरी रत उसे बुखार रहने के वजेसे उसे हस्पताल लेकर गएँ हे। में वहां उनके घर बैठा उसका इंतजार करता रहा। जब वो लौटे तो उनकी माँ बहत ही चिंतित थी और मुझे दन्त ते हुए बोली तुम दोनों को कितनी बार कहा हे की रात में उस सैमसन वाले रस्ते से मत आया करो। वैसे और एक रास्ता तो हे घर आने का पर वो रास्ता भट ज्यादा ही लम्बा पड़ता हे। मैंने जब उनसे घुसा करने की वजह पूछी तो उहोने बताया की कैसे कल रत हम दोनों एक बुरी आत्मा के चंगुल में फास्ट फास्ट रह गए।  ये सुनते ही मेरे सर से पसीने आने लगे। उन्होंने बताया ये के कल रत जिस आत्मा से हमारा सामना हुआ था वो मादल था एक ऐसा सेटन जिसका सर नहीं होता पर उसे साँस लेने की तालाब होती रहती हे। वो इंसान के सरीर से उसके सांसो को धीरे धीरे सोख लेता हे। हमारी किस्मत अछि थी जो वहां अचानक दो अघोरी पहंच गए थे जिहने देख कर वो चला गया। वरना  कुछ भी हो सकता था। उनसे बचने का एक ही तरीका होता हे कभी भी एक जगह खड़े मत होइए। 

जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग






 

Share:

उससे कभी बी अपना नाम मत बताना 

 सेतनि चुड़ैल जिसे आपके नाम से प्यार हे।  rdhindistories

उससे कभी बी अपना नाम मत बताना


लेज के पास में ही एक खँडहर हुआ करता था। जिस मे जिंदगी ने बरसो पहले ही अपना सारा राबता तोड़ दिया था। अब उस खँडहर में सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा पसरता हे। अंदर जाना साफ साफ सब्दो में मना था। और कलेज का भी कहना था की जो भी उसके करीब घूमता हुआ दिखा उसे कलेज से निकाल दिया जायेगा। पर निशांत को रोक के रख पाना मानो जैसे नामुमकिन था। फोटो ग्राफिक का शौकीन निशांत कही न कही जाके अपने पसंद के फटो ले ही लेता था। अपना कैमरा उठाये निशांत निकल पड़ता हे उस खँडहर के तरफ । अंदर पहंच के उसे पता लगा के ये सब क्या चकर था। क्यों मनाही थी वहां आने जाने पर। rdhindistories

वो जगह बाहत ही ज्यादा गन्दी थी। टूटे फूटे दीवारों पे न सिर्फ मकड़ी के जाले, सीलन थे वल्कि अजीबसी बात ये थी के इन सब में भी एक अजीबसा सन्नाटा था। याहाँ तक छत पे जो काले कवे बैठे थे वो भी सान्त थे। मौत जैसे इस माहौल में भी निशांत को अपने फोटो खींचने की पड़ी थी। उसने अपना कैमरा लिया और ढेर सारा फोटो खींचने लगा। और फिर एक दूसरे कमरे में गया। उस कमरे में काईन सारे धब्बे बने थे वहां दीबारों पे। पास में जाके नाखुनो से खुरेद ने पर पाया के वो सारे धब्बे बहोत ज़माने पहले खून से बने थे। और दिलचस्ब बात ये थी के वो खून अभी भी हल्का हलका नम था। दिवार पे ध्यान से देखने पर पता चला के दीवारों में कुछ लिखा हुआ था ,पर क्या लिखा हुआ था कुछ समझ नहीं आ राहा था। निशांत ने जल्दी जल्दी सारे तस्वीर ली और छुपते छुपते अपने हॉस्टल में पहंच गया। सारे फोटो को लैपटॉप में डाल के चेक करने लगा। जैसे ही उस घर की दीवारों की तस्वीर को उसने खोला तो निशांत उस तसवीर में खो सा गया। बड़ी बारीकी से वो उन फोटो को देखने लगा। तभी उसके सामने एक फोटो आया जिसमे उससे सिर्फ एक साल दिखाई दिया 1965। फिर आगे और बारीकीसे देखने पर उसे दिखाई दिया एक औरत अपने बची को मार रही थी। इन आंकड़ों को तुरंत ही निशांत ने इंटरनेट पे सर्च करना सुरु कर दिया। बहोत सारे डॉक्यूमेंट देखने पर आखिर कार एक न्यूज़ पेपर का आर्टिकल मिला जो उस घटना से तालूक रखता था। उसमे लिखा था के 1965 में एक औरत जिसका नाम मीरा था उसने पागल होके  अपने दो बचो के टुकड़े टुकड़े करके उनको यही  पे दफ़न कर दिया था। और खुद भी खुद खुसी कर लिया था।  निशांत को मानो जैसे कोई कहानी लग रहाथा। rdhindistories

वो उन फोटो को इतने बारीकीसे देखने में इतना खो गया था के कब उसके पीछे उसके कमरे का दरवाजा खुला उससे पता भी नहीं चला। पर बाहर से अति हुई ठण्ड हवाएं जब निशांत के चेहरे को चुके निकली तब जाके निशांत को अंदाजा हुआ के उसके कमरे का दरवाजा खुला रह गया हे। जैसे ही निशांत अपने दरवाजे को बंद करने गया, किसीने उसे बहार से बंद कर दिया। हो न हो जो भी था वो आस पास ही होना चाहिए। निशांत तुरत दरवाजा खोल के कॉरिडोर के और भागा। पर बाहर कोई नहीं था। वहां कोई भी दिखाई नहीं दे राहा था। निशांत ने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में गया। पर जैसे ही उसने अपने कमरे की और देखा तो उसके आंखे सीधे कुर्शी की और गयी जो दरवाजे की और मुड़ा हुआ था। पर जब निशांत दरवाजा बंद करने गया था तो कुर्सी सीधी ही थी। निशांत कुछ देर तक उसी तरा खड़े होके कुर्शी की और देखता राहा। और सोचता राहा के आखिर कार ये हुआ क्या ? और फिर जब कुछ समझ नहीं आया तो उसने अपना लैपटॉप बंद किया और लेट ने चला गया। rdhindistories

उसने इन सब बातो पर ज्यादा सोचना बंद कर दिया और मोबाइल से दस्तो के साथ चैटिंग करने लगा। कुछ देर तक चाट करने के बाद जब वो सोने गया तो उसके मोबाइल से अभी बी किसी के चाट करने की आवाज सुनाई दी। गरमी के मौसम के वाबजूद उसके हात पैर ठण्ड से कम्पने लगे। उसने धीरेसे मोबाइल को उठाया तो देखा के उसमे बहोत कुछ टाइप होता जा रहा था। उसने मोबाइल को हात में लिया और देखा तो उसे कुछ समझ में नहीं आया। फिर थोड़े देर बाद टाइप होना बंद हो जाता हे। और निशांत को उन अजीबसी लिखाबट में भी वो दो सब्द दिखाई देते हैं जिन्हे उसने खुद कुछ देर पहले पढ़ा था।  वो थे माया और 1965। उसने बड़े ही घबराहट के साथ अपने टेबल पर रखे पानी  के गिलास को उठाया और पानी के दो बून्द ही मुश्किल से उसके हलक से निचे उतरे होंगे के तभी उसकी नजर दरवाजे की और गयी जहाँ पे एक सुन्दर सी औरत खड़ी थी। निशांत की जान उसके हलक में ही अटकी हुई थी। उसने जो कुछ थोड़ी देर पहले ही पढ़ा था, वो सब उसके आँखों के सामने था। वो औरत धीरे से उसके करीब आयी और उसने बड़े ही प्यार से पुछा " तुम्हारा नाम क्या हे ? निशांत उसकी आवाज सुनके थोडासा हल्का महसूस किया। उसने धीमी आवाज में रुक रुक के अपना नाम बताया। rdhindistories

"निशांत। ..... निशांत नाम हे मेरा। और तुम्हारा ? उस औरत ने अपना नाम मीरा बताया। इतना बता ते ही उस औरत ने निशांत के गले को कस के पकड़ लिया। और उसका गाला दबाने लगी। निशांत चाहा कर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। धीरे धीरे उसका साँस लेना भी मुश्किल होता गया। आँखों के सामने  सब कुछ धुंदला होता हुआ नजर आया। तभी अचानक उसकी नींद टूटी। उसने उठ के देखा तो कमरे में कोई भी नहीं था। आखिर कार उसे चैन मिला। पर अजीब बात थी सपने में उसके हात पैर मारने के वजेसे जो सामान कमरे में बिखरे थे वैसे ही सामान सच में उसके कमरे में बिखरे पड़े थे। उसने तुरंत अपना लैपटॉप खोला और ऐसे सपनो का क्या मतलब होता हे ढूंढ़ने लगा। बहोत ढूंढ़ने के बाद उसे हर जगा एक ही जबाब मिला :-

                                                                       "अकाल मृत्यु "

वो तुरंत भागा भगा अपने कमरे से निकला और अपने दोस्त के पास पहंचा। बड़े जोर जोर से उसने दरवाजे को खट खटया। उसका दोस्त सतीश ने दरवाजा खोला तो, निशांत  बहोत घबराया हुआ हे। उसने निशांत को पानी दिया और उसे अपने बिस्तर पर बिठाया फिर उससे पूरी बकिया सुनी। और जोर जोर से हसने लगा। मतलब के तेरी वाली भूतनी तो कमाल की हे यार।  सवाल का सही सही जवाब देने पर भी मारने निकल पड़ती हे। निशांत के लाख समझाने पर भी उसका दोस्त सतीश उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं था। उसने निशांत को अपने कमरे में सोने के लिए दुबारा से भेज दिया। और खुद भी चैन से सो गया। नीद खुलने के साथ ही सतीश ने हस्टेल के कॉरिडोर में अजीबसा सोर सराबा सुना। दरवाजा खोल के बाहर आके देखा तो उसके धड़कन ठन्डे पड़ गए। निशांत की लाश उसके बिस्तर पर पड़ी थी। और एक कागज का टुकड़ा उस के पास हवा में फड़ फडा रहा था। सतीश ने वो टुकड़ा उठा  के देखा तो उसमे लिखा था " चाहे कुछ भी हो जाये उससे अपना नाम मत बताना। rdhindistories

निशांत  के मौत के बाद सतीश एक दम सदमे था। कैसे भी करके उसने एग्जाम दिया और पास भी होगया। पर उसके दिल में हमेसा निशांत की बात रहेगी। अगर उसने निशांत को उस रात अपने साथ रहने दिया होता तो सायद आज निशांत जिन्दा होता। इसी बिच कलेज में नया एडमिशन सुरु हजाता हे। सतीश को रजिस्ट्रशन में बिठा दिया जाता हे। बहत सारे बचे अपना नाम और पता बतातेआते हे और सतीश लिखने लग ता हे । तभी अचानक एक लड़की वाहां फॉर्म भरने आयी। सतीश ने निचे देखते हुए उसका नाम पुछा। उसने काहा "मीरा " और तुम्हारा। सतीश ने निचे देखते हुए हुए काहा "सतीश"। पर जब सतीश ने पता पुछा तो उसने कहा पीछे वाला खँडहर के गली में । सतीश ने तुरंत ऊपर देखा तो एक लड़का खड़ा हुआ था और कह रहा था " अरे पुराना खँडहर नहीं पुराना बंदर गाह के पास जो गली हे वहां " rdhindistories
सतीश जान गया के उससे क्या गलती हुई थी। उसने अपना नाम बता दिया था। उससे। अब उसके पास  कम समये था। वो तुरंत भगा अपने कमरे में और सरे ऐसे चीज़ जिसे उसके जान को खतरा हो उन सबको उठा के पीछे के तालाब में फेक आया। दिन भर के थका बट से चूर होके आखिर कार उसे नींद आहि गयी। रात के करीब आधे पेहेर ही बीते होंगे, अचानक उसके पैर के निचे से कुछ आवाज़े आयी। उस आवाज़ से सतीश की नींद टूटी और उसने आंखे उठा के देखा तो एक कटार लेके एक औरत अपने बचो को मार रही थी। ये कोई और नहीं वही थी जिसको इस वक़्त आप सोच रहे हे। अगले ही सुबह सतीश की लाश उसके कमरे में मिली। rdhindistories

1965 में मीरा नाम की एक औरत काला जादू किया करती थी। काला जादू में और ताकत की लालसा ने उसे अँधा बनादिया था। एक दिन उसने पागल पन में आके अपनी  दो बेटियों को मर दिया । पर उनको मारने के बाद उससे इस बात का एहसास होता हे के उसने कितनी बड़ी बेवकूफी कर दी हे। और इसी के चलते वो खुद खुसी भी कर लेती हे। और आगे चल के दुबारा कोई ये गलती ना करे इसीलिए जो कोई भी इस घटना के वारेमे या मीरा के बारेमे जान लेता हे या फिर कहीं पर भी उसके बारेमे कुछ पढ़ लेता हे वो उसे मार डालती हे। rdhindistories

"वैसे देखा जाये तो अभी अभी आपने भी उसके वारे मे जान लिया हे। कोई अनजान औरत आपसे नाम                                               पूछे तो कहीं आप उसे अपना नाम मत बता बैठ ना। 

            " में हूँ रोहित, और आप पढ़ रहे थे rdhindistories

                                                                      आपका दिन सुभ हो। 



अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग 1


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग















Share:

जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग


Horrorstories के  इस भाग में जानेगे एक ऐसी घटना के बारेमे जिससे पूरा का पूरा गाऊँ तबाह होगया।


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग



आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक  बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। मुखिया जी ने उन्हें गाऊँ बुलाने का कारण नेहीं बताया था। मुखिया जी को हवेली में न पाकर दोनों बेटे लॉन में बैठे बैठे उनका इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद मुखिया जी किसी से बात करते हुए अंदर के और आये। तभी उनकी नजर उनके पुरे ख़ानदान पे पड़ी। बेटे ,बहू और पोते पोती सब उनके आँखों के सामने थे। पर उनके चहरे पे खुसी की एक झलक तक नहीं थी। क्यों के उन्हें पता था के वो बुरी प्रेत आत्मा कभी भी उनके परिबार पर हमला कर सकती हे। अपने पिता को  इतने तनाब में देख बड़े  बेटे ने इसका कारण पुछा। मुखिया जी जान गए थे के अब सचाई छुपाने से किसीका भी भला नहीं होने वाला। पर उनको सिर्फ एक ही बात का दर सत्ता रहा था। क्या सेहर में पढ़े लिखे उनके बेटे और बहु इस बात को मानेगे या फिर न चाहते हुए भी उनका मजाक बन जायेगा ? इसी सोच बिचार के चलते हुए उन्हों ने सचाई सब को बता  दिया। rdhindistories
बचपन से दूर रखा आपने हमे पिताजी। ना चाहते हुए भी हम आपसे दूर रहे। इतने बड़े मुसीबत  अपने पुरे जिंदगी अकेले किया। क्या आज हमे अपने बेटे होने का फ़र्ज़ अदा करने का एक मौका मिलसकता हे पिता जी? अपने छोटे बेटे के मुँह से ये सब सुन के मुखिया जी के आँखों में आंसू आगये। कहते हैं पिता की असली ताकत उसके बचो में होती हे। पर आपने हमे अपना ताकत क्यों नहीं बनने नहीं दिया पिताजी ? बड़े बेटे के इस सवाल का मुखिया जी के पास कोई जबाब नहीं था। आज पूरा परिबार आपके साथ हे पिता जी। हम दोनों  बहु नहीं आपके बेटी हे। कमसे कम आप हमे ये सब बता सकते थे पिता जी ? भले ही हम सेहरी रिवाज़ में पले  बड़े हे पर बड़ो की बात सुनना ये भी हमारे रिवाज़ में हे। अपने दोनो बहुओं से ऐसा साथ पाकर मुखिया जी के दिल को बहत सुकून मिला। मुझे माफ़ करदो मेरे बचो, न चाहा ते हुए भी मुझे तुम सब को इस मुसीबत से दूर रखने के लिए झूट का सहारा लेना पड़ा। लेकिन आखिर कार तुम सबने मिलके मेरे दिल का बोझ हल्का करदिया। rdhindistories

तो वो आत्मा अब कहाँ हे ? बड़े बेटे ने मुखिया से पुछा ? rdhindistories
वो कहाँ हे ये कोई नहीं जनता पर इतना मालूम हे के वो आज रात तुम सबको हानि पहंचाने जरूर आएगी। पर डरने की बात नहीं हे। मेरे होते हुए तुम सब को कुछ नहीं होगा। मुखिया जी ने तुरंत ही  जो पबित्र धागा लाये थे सबके हात में बांध दिया। बाबा ने कहा  धागे को  भी अपनी अलग नहीं करेगा। आज रात वो तपस्वी हमारे घर आएंगे माहा काल यज्ञं करने हेतु।  तुम  उस यज्ञं में हिसा लोगे। जब यज्ञं चल रहा होगा वो आत्मा  बहलाएगी फुसलायेगी और भड़कायेगी। पर हमे यज्ञं ख़तम होते तक उठना नहीं हे। ये यज्ञं किसी भी हाल में पूरा होना चाहिए। में खुद इस यज्ञं में  बैठूंगा। हमे सारा ध्यान यज्ञं पे ही रखना होगा। गाऊँ वालों को सख्त निर्देश  थे  सूरज ढलते ही अपने घर से बाहर न निकले। दोपहर  करीब पौने  3 के आस्स पास वो तपस्वी मुखिया जी के पास पहंचे और यज्ञं  सुरु करने लगे। तये समय समये के आस पास सारी तैयारी हो गयी। गाऊँ में अँधेरा छाते ही सब अपने अपने घरों में छिप गए। आज जो भी उस भटकती हुई रुह के सामने आएगा वो जिन्दा नहीं बच पायेगा। मुखिया जी के कुल पुरोहित ने माहा काल के त्रिसूल को बनाने के लिए पबीत्र आत्माओ का आवाहन करने लगे। पूजा की बिधि सुरु हो चुकी थी। वो तपस्वी ने मेहेल के चारों  और पबित्र जल का छिड़काब किया था ताकि  वो आत्मा मेहेल के अंदर न आसके। पर जल्द वाजी में उनसे मेहेल का पीछे वाले दरवाजे के और ध्यान ही नहीं गया। और बद किस्मती से वो दरवाजा खुला भी रेह गया था। जैसे जैसे पूजा की  बिधि पूरी होने लगी सब के मन में खुसी होने लगी। पुरोहित जी ने माहा काल त्रिसूल भी बनवा लिया। पूजा की समाप्ति होने पर सब खुस थे। पर मुखिया जी क आशर्य हुआ के वो आत्मा ने एक बार भी हुम्ला करने की कोसिस तक नहीं की। परिबार की सारे सदस्य बहत खुस थे। इसी बिच बड़ी बहु मिठाई लेने अपने कमरे में गयी। क्यों के उसने मिठाई का डिब्बा अपने कमरे में ही रख आयी थी। मुखिया जी के काफी सवाल तो थे पर आखिर कार उन्होंने भी अपने दिल को समझा  लिया। तपस्वी बाबा भी पूजा पूरी होने के खुसी में वापस चले गए थे। पूजा सन्ति पुर्बक सम्पर्ण हुआ। देखते देखते ही गाऊँ में ये खबर फेल  गयी। एक अजीबसी सन्ति छा  गयी थी। मानो तूफान के पेहेले के जैसी सन्ति हो। खेर अब सब ठिक   होगया था। इसी खुसी में मुखिया जी ने आसमान के और देख कर अपने पूर्बजों को नमन किया। फिर वो मुड़े ही थे घर के अंदर आने के लिए तभी उनकी नजर पिछले दरवाजे पे गयी जो की खुला हुआ था। दरवाजा खुला था ये परेशान की बात नहीं थी परेशान की बात ये थी के उस दरवाजे से किसी के अंदर अनेके पैरों के निसान थे। उन्हें समझ ने में ज्यादा देर नहीं हुई के जिसका डर था वही हुआ हे। वो घर के अंदर आ चुकी थी। rdhindistories

कोई किधर नहीं जायेगा।  सब लोग एक  साथ रहो मुखिया जी चीलाते हुए बोले। क्या हुआ पिताजी ? अब घबराने की कोई जरुरत नहीं हे। वो आत्मा अब हमारा कुछ नहीं कर सकती। बड़े बेटे ने हस्ते हुए कहा। ये क्या ?  वो पबित्र धागा क्यों निकाल दिया ? जरासल पिताजी ये धागा चुभ रहा था तो हमने सोचा के अगर अब पूजा ख़तम हो गयी हे तो हम निकाल देते हैं। अरे चुप करो  सब मुखिया जी ने चीलाते हुए कहा। बड़ी बहु कहाँ हे ? वो तो ऊपर अपने  कमरे में गयी हे। मुखिया जी तुरंत ऊपर की और भागे। बाकि सब भी उनके पिछे पिछे भागे। ऊपर पहंच के उन्हने  देखा के उनकी बड़ी बहु खिड़की के पास खड़ी हे। खिड़की खुल हुई थी। बहु ? बहु ? काईन बार आवाज लगाने पर भी  बहु  ने जब कुछ जबाब नहीं दिया तो बेटे ने जैसे ही पास जाके बुलाया तो बडा सा खंजर उसके सिने से आर पार होते हुए उसकी छाती के दो कुकड़े कर डाल ती हे। देखते ही देखते वो आत्मा मुखिया जी के बड़े बेटे को मार डालती हे। कुछ देर के लिए तो कुछ समझ में नहीं आता। पर हातों में खंजर लिए जब वो  आत्मा अँधेरे मेसे रोशनी की और आयी तब जाके सबने उसके काले  चेहरे को देखा। आंखोसे खून टपक राहा था उसके। rdhindistories

तुम  सब ने क्या सोचा था में चली गयी। आज होगा खूनी खेल। में मेरे मन के आग को सांत करुँगी आज। उसके सफ़ेद आंखोसे मिकलती हुयी खून उससे और भी भयानक रूप दे रहीथी। अपने आँखों के सामने अपने बड़े बेटे को मरते हुए देख मुखिया जी के दिल ने धड़कना लगभग बंद कर दिया था। तू मरेगा मुखिया। में तुझे तड़पा तड़पा के मरूंगी। ये केहने के साथ ही वो आत्मा मुखिया को मरने के लिए खंजर लेके आगे बढ़ती हे। तभी अपने पिता को बचाने के लिए मुखिया जी का छोटा बेटा उनके सामने आजाता हे। अगले ही पल उसकी  कटी हुई सर जमीं पर गिरी मिलती हे। मुखिया जी के सामने उनका परिबार ख़तम हो रहा था और वो  कुछ भी नेही कर पा रहे थे। तभी उनके कुल पुरहित वहाँ से सबको निकालते हुए निचे की और भागे। पर वो घरसे निकल पाते इससे पेहेले माहा काल की वो त्रिसूल पुरोहित के छाती को चीरता हुआ आर पार निकल जाता हे। पुरोहित वहीँ मर जाते हैं। ये त्रिसूल तो अभीमन्त्रित थी, तो फिर इस त्रिसूल को उस प्रेत आत्मा ने उठाया कैसे ? पर ये वक़्त सवालों का नहीं था। वो किसी भी हाल में घर से निकल जातें हे। अपने छोटी बहु और तीन बचो के साथ वो उन तपस्वी बाबा के आश्रम के और निकल पड़ते हे। सिर्फ वही थे जो उनको बचा सकते थे। करीब दो  घंटे के बाद वो बाबा के आश्रम में पहंच ते हैं। उनकी ऐसी हालत देख कर  बाबा को भी समझ आजाता हे के क्या अनर्थ हो गया हे। मुखिया जी बाबा से पूछतें हे के वो त्रिसूल जिससे उस आत्मा ने कुल पुरोहित को मार डाला ऐसा कैसे मुमकिन हो सकता हे। rdhindistories

वो आत्मा पूजा बिधि से पहले ही घर में घुस चुकी थी। इसीलिए पूजा सफल नहीं हो  पाया। और अब दुबारा यज्ञं भी नहीं किया जा सकता। तो अब एक ही रस्ता बचा था। मुखिया जी  को वापस जंगल में जाके उस त्रिसूल को वापस उस आत्मा के कब्र पर रखना होगा। वो भी सूर्य उदय होनेसे पेहेले। पर इसमें उनकी जान का खतरा  भी था। पर  यूँ खड़े खड़े अपने परिबार को  मरते हुए देखना उससे अच्छा तो ये होगा के वो खुद ही उस आत्मा को मार दे। वो तुरंत अपने गाड़ी लेके जंगल की और निकल गए। उसके कब्र पर पहंच के देख तो पाया के वो त्रिसूल  वहां नहीं था। कुछ देर ढूंढ़ने पर उनकी नजर कालिया के लास के ऊपर गिरी। जरासल कालिया उस प्रेत आत्मा से बदला लेने आया था पर खुद मारा गया। उसके लास के थोड़े ही आगे वो त्रिसूल  गिरा था। पर वो उस त्रिसूल के पास पहंच पाते वो आत्मा वहाँ आगयी। मुखिया जी के  सामने खड़ी होगयी। पर जैसे ही उसने मुखिया जी को मरना चाहा तो मुखिया जीके  गले में पड़ा वो कबच मुखिया जी को बचा ले गया। इसका फ़ायदा लेते हुए मुखिया जी त्रिसूल उठाने भागे। पर तभी अचानक उनके बड़ी बहु पिछेसे छिलने लगी " पिता जी  मुझे इससे बचालो " मुखिया एक  पल के लिए रुक जाते हैं। उनके बड़े बहु के गले पर खंजर ताने वो प्रेत आत्मा खड़ी हुई नजर अति हे। मुखिया जी रुक जातें हे। rdhindistories

तुम्हे क्या चाहिए ? मुखिया जी पूछतें हे। मुझे तुम्हारी जान चाहिए। वो कबच निचे रखदो। अगर तुम वो कबच निचे रखदोगे तो में तुम्हारे बड़ी बहु को जाने दूंगी। मुखिया जी उसकी बातों पे राजी हो जाते हैं। और उनके कबच को उतार के निचे रख देतें हे। जैसे ही मुखिया जी ने अपना कबच उतारा , आत्मा ने उसी खंजर से  बड़े बहु के सर को धड़ से अलग कर दिया । मुखिया जी का आधा  ख़ानदान मर चूका हे। ये सोचते ही मुखिया जी का सीना फट पड़ा। उन्होंने उस प्रेत आत्मा से कहा " एक नासमझ इंसान ने तुम्हारे साथ बुरा किया। बदले में तुमने काईन मासूमों को मर डाला। "ये इन्तेक़ाम तुम्हे मुक्ति नहीं दे सकती। इन्तेक़ाम से  आज तक किसीको भी मुक्ति नेही  मिली। इतना कहते कहते मुखिया जी ने वो त्रिसूल उठाया और उस आत्मा के सीने में गाड़ दिया। वो आत्मा चीख उठी और दर्द से छिलाने लगी। इसके पहले वो आत्मा गायब  हो जाये उन्होंने उसी त्रिसूल से  ही उसके कब्र पे उस त्रिसूल को गाड दिया। कुछ समय बाद वो तपस्वी बाबा भी वहां आगये। उन्हने मुखिया जी से काहा के ये आत्मा की मुक्ति अब मुमकिन नहीं इसे हमे कैद करना होगा।हमेसा के लिए। तभी मुखिया जी ने इनकार करते हुए उस आत्मा के करीब गए। वो आत्मा दर्द से घुराह रही थी। rdhindistories

मुझे नहीं पता के मेरे दादा जी ने तुम्हारे साथ ऐसा क्यों किया। सायद तुम्हारे साथ जो हुआ वो गलत हुआ। तुमने दादा जी को मार डाला। जान के बदले जान ले लिया तुमने। पर आज तुमने मेरे दोनों बेटों को मार दिया बड़ी बहु को  मारडाला। में तो वैसे भी मरा हुआ हूँ। 70 साल के उम्र में अपने दोनों बेटों  को खो चूका हूँ। ये जंग  को खत्म करदो। मुझे मारकर तुम्हे सुकून मिले तो मुझे मार डालो, मेरे 3 बचो को मार के अगर तुम्हे  मुक्ति मिल सके तो मार दो हम सब को।  तुम खुद भी आजाद हो जाओ। ये कह कर मुखिया ने आत्मा के सरीर से त्रिसूल निकाल के दूर रख दिया। और छोटी बहु और 3 पोता पोतीओं के साथ उसके सामने आंखे बंद करके बैठ  गए। कुछ देर में सुबह भी हो गयी। जब आंखे खुली तो वो आत्मा वहां से गायब थी। सायद उसे भी समझ आगया था के माफ़ी, बदले से ज्यादा कीमती होती हे। किसीना किसीको तो माफ़ करना ही पड़ता हे। ताकि जिंदगी दुबारा पनप सके । इस हादसे के बाद सबने उस गाऊँ को छोड़ दिया। मुखिया जी अपने परिबार के साथ सेहर चले गए। केहतें हे आज भी वो आत्मा उस जंगल में भटकती हे। पर कभी किसी के मरने की खबर नहीं आयी। rdhindistories


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2






जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 1



Share:

जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2


जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2


मुखिया जी के ख़ानदान पे जो मुसीबत आ पड़ी थी उससे वो भली भांति वाकिफ थे। कालिया ने मौत का खेल फिरसे सुरु करवा दिया था। कालिया का पूरा परिबार मारा जा चूका था। वो अब किसी भी हाल में उस प्रेत आत्मा को मारना चाहा ता था। लेकिन ये कोई भी नेही जनता था के आगे क्या होगा। मुखिया  जी  के दो बेटे थे जो सेहर में रहते थे। मुखिया जी  ने बचपन से ही उनको गाऊँ से दूर रखा था। पर मुखिया जी को उनकी चिंता सताने लगी। कहीं ये प्रेत आत्मा उनका नुकसान न कर बैठे। मुखिया जी ने बिना देरी किये गाऊँ के माहा काल मंदिर जाके अपने कुल पुरोहित से मिले । अब कुछ नहीं हो सकता, कुल पुरोहित ने बड़े ही निरसा से सर को झुका के गहरी सांसे लेते हुए कहा। वो आत्मा अब पहले से काई अधिक ताकत बर हो चुकि हे। उसके सामने जाना अपने मौत को दावत देने जैसा होगा। .माहा काल का कबच हटते ही उस आत्मा को अपनी असीम शक्तियां  वापस मिल गयी हे। और उसके अतृप्त इच्छाओं के साथ वो अब पहेले से काई ज्यादा खतनाक होचुकी होगी। कुल पंडित से निरास होने के बाद उनके पास एक ही रास्ता था के वो अपने परिबार को एकठा करले। और जितना हो सके उस भटकती रूह से दूर चले जाये। पर मुखिया जी को बहत जल्द एहसास होने वाला था के उनके ऊपर कितना बड़ा मुसीबत आने वाला हे। अगले दिन से उस प्रेत आत्मा ने अपना बदला पूरा करने के लिए एक एक कर के गाऊँ वालो को निशाना बनाना सुरु कर दिया। गाऊँ में मेहज  कुछ दिनों में ही कत्ले आम मच गया। हर रात कोई न कोई गायब होने लगा। हर परिबार जो मुखिया जी का सामान करता था उसे उस प्रेत आत्मा का ग़ुस्सा झेलना पड़ता था। धीरे धीरे ये बात साफ हो गयी के गाऊँ में अब जीना मुश्किल हो चूका था। गाऊँ में हवन और पूजा भी करवाया गया पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। गाऊँ वाले इससे परेशान होके गाऊँ छोड़के जाने लगे। ये सब मुखिया जी अपने आँखों के सामने होता हुआ देख रहे थे । इसी के चलते एक दिन मुखिया जी एक बहोत बड़े  तांत्रिक से मिलने जाते हे। और तांत्रिक को गाऊँ में लेके आते हे। तांत्रिक को देख लोगों में एक बिखरी हुई उम्मीद जागने लगता हे। पर खुनी सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले राहा था। गाऊँ में सायद ही अब कोई ऐसा परिबार होगा जिसने अपने परिबार मेसे किसीको न खोया हो। पर मुखिया के प्रति अपने सामान को जताने के खातिर कुछ परिबार अभी बी मुखिया के साथ खड़े थे। hindi stories

गाऊँ के हालत को देखते हुए तांत्रिक को ये जानने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा के गाऊँ पे किसी आत्मा का जबरदस्त केहर हे। उसने मुखिया जी से पूरी दास्ताँ सुनी। फिर उस तांत्रिक ने अपने झोले मेसे कुछ अभीर निकला और मुखिया  जी के घर के ठीक बीचो बिच बैठ गया। वो साधना में लीन होगया। इसीके साथ ही गाऊँ के लोगों में डर बढ़ने लगा। करीब एक घंटे तक साधना में लीन रहने के बाद वो उठा और जा के मुखिया जी के दादा जी के तस्वीर के आगे खड़ा होगया। "ये गाऊँ  सपित हो चुकी हे। वो प्रेत आत्मा बहोत सक्ति  साली हो गयी हे। उसकी अतृप्त इच्छाओं ने उससे और ताकत बर बना दिया हे। अब उससे रोकने का कोई रास्ता नहीं हे। " ये कह कर उस तांत्रिक ने मुखिया  जी के दादा जी के और इशारा किया। सब चौक गए। "क्या हुआ बाबा "मुखिया ने पुछा ? ये कौन हे ? तांत्रिक ने ईशारा करते हुए पुछा। ये मेरे दादा जी हे। मुखिया का जबाब सुनके तांत्रिक बोल उठा ये आत्मा इसके बंस के पीछे यानि के जब तक ये तुम्हारे ख़ानदान को मिटा नेही देती ये चैन से नहीं बैठेगी। मंटा हूँ इसकी दुश्मनी हमसे हे। हमारे से ख़ानदान से हे, तो फिर ये पुरे गाऊँ को अपना निशाना क्यों बना रही हे। मुखिया ने पुछा। वो आत्मा एक दुस्ट आत्मा बन चुकी हे। इसीलिए वो इस पूरे गाऊँ को तभा कर देना चाहती हे। hindi stories

पर इसका कोई इलाज तो होगा न ? मुखिया  जी बड़ी बेचैनी से ये सवाल पूछ रहे थे ।  इसका सिर्फ एक ही रास्ता हे। तांत्रिक ने बड़े ही धीमी आवाज़ में कहा। क्या उपाए हे बोलिये हम सब करेंगे ? तांत्रिक ने काहा के तुम्हारे गले में ये जो माहा काल का कबच हे उससे उतार दो। इस कबच के वजेसे वो आत्मा तुम्हारे नजदीक  नेही आ पारहि हे। और इसके चलते वो आत्मा इन मासूम गाऊँ वालों को अपना निशाना बना रही हे। ये सुनके मुखिया  जी एक दम सन होके अपने कुर्सी पे बैठ गये । गाऊँ  वालोँ के खुसी के खातिर अपने जीबन को खुर्बान  करना स्वीकार कर लिया।  hindi stories

पर सवाल अभी भी वही अटका हुआ था। क्या वो आत्मा सिर्फ मुखिया की जान लेके सबको छोड़ के चली जाएगी ? ऐसा मुमकिन होता हुआ नहीं दिख राहा था। वो कबच ही था जिसने मुखिया को अब तक बचा के रखा था। तभी मुखिया ने एक सुझाब दिया के जैसा कबच उसने पहना हे अगर वैसा ही कबच सारे गाऊँ वालों को पहना दिया जाये तो ? पर उसमे एक दिकत थी। उस कबच को बनाने की बिधि किसीको पता नहीं था। और  जिस किताब में ये बिधी लिखी हुई थी वो किताब कहाँ हे ये किसीको नहीं पता था। पर मुश्किल ये था के इतनेसारे कबच बनाने में बहोत दिन लग जायेंगे। तब तक वो आत्मा किसीको भी जिन्दा नहीं छोड़ेगी। मुखिया  जी को चारो और सिर्फ तबाही ही दिखनी लगी। आखिर कार अपने परिबार को बचाने की हर मुमकिन कोशिश भी ख़तम होती हुई दिख रहीथी। तभी अचानक तांत्रिक ने मुखिया जी को किसी सीधी प्राप्त बाबा का पता दिया। पर दिकत ये थी के वो बाबा हमेसा सीधी में लीन रहते थे। इसीलिए उनके दर्सन  बड़ा ही दुर्लभ था। पर एक आखरी उम्मीद सिर्फ वही थे। जो इस पुरे गाऊँ को बचा सकते थे। अगले दिन सुबह मुखिया जी अपने कुछ भरोसे मंद लोगों साथ उनसे मिलने गए पर उनसे मुलाकात हो पाती तभी तेज़ तूफान के चलते उन्हें एक जगह पर रुकना पड़ा। मुखिया जी को हालत का पूरा इल्म था इसीलिए उन्होंने अपने दोनों बेटों को अपने से दूर ही रखा था। पर सायद उन सबको पास बुलाने का वक़्त आगया था।  hindi stories

उन्होंने अपने दोनों बेटो को फ़ोन करके बुला लिया। इसी दौरान जहाँ उनका रुकना हुआ था वहा एक आदमी दूर एक कोने पे बैठा मुखिया जी को घूरे जा रहा था। कुछ देर बाद वो  खुद अपने जगह से उठ के आया और मुखिया जी के पास बैठ  गया। आप जिससे मिलना चाहते हे वो कहाँ हे में जनता हूँ। ये कहकर वो आदमी दूर काली पाहाडी की और इशारा करता हे । मुखिया जी तुरंत उसके बातये हुए रास्ते पे निकल गए। कुछ दूर चलने के बाद एक जगह पे उन्हें कोई बैठा हुआ दिखाई दिया।  ये वही थे जिनके  मुखिया जी वहां गए थे। वहां वो योगी अपने तपस्या में लीन थे। पूरी रात उनके पास बैठने के बाद जब सुभे सुभे उनकी आंखे खुली तो उनके सामने मुखिया जी खड़े थे। मुखिया जी को देखते ही वो सब जान गए। वो आत्मा तुम्हारे ख़ानदान को मिटा देना चाहती हे। और उससे बचने का कोई भी उपाए नहीं हे। योगी की बात सुन कर मुखिया जी लगभग  टूट ही गए। अब तो उनकी आखरी  उम्मीद भी बेकार हो जाएगी। तवी अचानक वो बाबा मुखिया जी को बोले के एक उपाए हे पर उससे कर पाना बेहद मुश्किल हे। होसकता हे तुम्हारी  जान भी चली जाये। मुखिया जी हर सर्त  पर राजी थे। hindi stories

क्या थे वो सर्त ? आखिर उस प्रेत आत्मा को कैसे हराया जा सकता हे ? क्या होगा अगर मुखिया जी वो उपाए नहीं कर पाएंगे ? ऐसे अनगिनत सवालों के जबाब जानेगे कहानी के अगले और अंतिम भाग में। कहानी जारी हे।  hindi stories


rdhindistories



rdhindistories

Share:

जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 1

Horrorstories के  इस भाग में जानेगे एक ऐसी घटना के बारेमे जिससे पूरा का पूरा गाऊँ तबाह होगया। 

जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 1



बो केहेते हे न इंसानी ताकत एक जगह पे जाके ख़त्म होजाती हे। उम्र का तकाजा तो यही कहता हे की हमे हर फैसले से पहले हमारे बड़ों से बात करलेनी चाहिए। क्यों के उन्होंने हमसे ज्यादा जिंदगी देखि हुई हे। गाऊँ के सरपंच जी के के मौत के बाद गाऊँ के युबा अधक्ष्य गाओं के बिकास को लेके गाऊँ के मुखिआ जी के पास पहंचे। मुखिआ जी का गाऊँ बड़ा रुतबा था। लेकिन उम्र होजाने के वजेसे वो अब गाऊँ के काम काज में इतना दखल नहीं देते। दिन भर अपने हवेली में ही  रहते हैं। सरपंच जी के मौत के बाद दुबारा चुनाब होने में थोड़ी देरी थी। इसलिए इस मोके का फ़ायदा उठाते हुए गाऊँ का युबा नेता कालीचरण ने गाऊँ के बाग दौर संभालना  चाहा ता था। पर गाओं के लोग अभी बी मुख्या जी के बिना कोई बी काम नहीं करते थे। जरासल गाओं के बाहरी इलाकों में एक जंगल था जहाँ पे गाऊँ वालों को जाने की सख्त मनाई थी। ऐसा कहा जाता था के वहां पे किसी सेतनी  ताकत का बास हे। और इसी बात के चलते कालीचरण उर्फ़ कालिआ वो जंगल को लीज़ पे लेना चाहता था। उस जंगल की आधी जमीं सर्कार की और आधी जमीं मुख्या जी का था। इसीलिए कालिआ  मुखिआ जी से जमीन  लीज़ पे लेने की बात करने गया था। पर जैसे ही मुखिआ जी को उसने जमीन लीज़ पे लेने की बात बताई तो मुखिआ जी ने साफ साफ इनकार करदिया। पर अब वक़्त धीरे धीरे बदलने लगाथा। युबओं का दौर था ,और युबाओ का दौर होने के खातिर कालिआ को गाऊँ के युवाओं का काफी अच्छा खासा समर्थन हासिल था। और इस समर्थन के चलते मुखिआ जी को कालिया की बात को न चाहते हुए भी मान ना  पड़ा। पर जाते जाते कालिया को  मुखिआ जी ने काहा के जंगल में उनके पुरखो के समाधी हे वो उन्हें हात न लगाए। hindi stories

कालिया अपने अदमीओं के साथ मिलके जमीन खुदाई करने लगा। उससे किसी बिस्वस्त सूरतों से खबर मिलीथी के इसी जंगल में कहीं पे भगबान माहा काल का त्रिसूल जो की सोने का हे और जिसकी इंटरनेशनल बाजार में कीमत अरबो रुपए हे। इसी चकर में कालिया खुदाई करता राहा। करीब एक महीना खुदाई करने के बाद एक दिन उसकी नजर एक कब्र पर पड़ी। जहाँ पे कुछ लोहे की बेड़िया थी। उन बेड़िओं को हटाने का फैसला लिया कालिया ने। हो न हो ये त्रिसूल यहीं पे हे। और सच मूछ त्रिसूल वहीँ पे था। पर ये क्या वो सारे लोग मिलके भी त्रिसूल को उठाना तो दूर उसे हिला भी नहीं पा रहे थे। क्यों के कालिया एक लालची और बुरा इंसान था इसीलिए उससे वो त्रिसूल हिलाया भी नहीं जा रहा था। तभी उसने एक तरकीब सोचि, उसने अगले ही दिन अपने 8 साल के बेटे को वहां लेके गया और उससे त्रिसूल को हटाने को काहा। बचे तो भगवान के ही रूप होतें हे। जैसे ही ही उस बचे ने त्रिसूल को उठाया वो त्रिसूल वहां से हैट गया। कालिया को समझने में देर नेही लगी के ये त्रिसूल चमत्कारी हे। उसने मन ही मन उसकी कीमत अरबो से बढ़ा कर खरबो तक ले गया। इस बात से अनजान के उसने क्या गलती कर डाली हे, वो अपने घर आया तो देखा के उसके घर में उसकी दो भाई और उसके बीवी की लाश पड़ी हे। वो अब फिरसे केहर ढाने आगयी थी। कालिया के पेरो को निचे से जमीन खिसक गयी। वो भागता भागता  मुखिआ जी के हवेली में पहंचा। hindi stories

कालिया का ये हाल देख के  मुखिआ जी को ये जानने में देर नहीं हुई के जिसका दर था वही हगया हे। मुखिआ जी ने पूरी घटना कालिया के सामने उजागर किआ। बहोत साल पहले इस गाऊँ में एक सुन्दर लड़की हुआ करती थी। जिसके ऊपर मुखिआ जी के दादा जी का दिल आगया था। पर वो लड़की किसी औरसे प्यार करती थी। जब ये बात मुखिआ जी के दादा जी को पता चला तो उन्होंने उस लड़की और उसके प्रेमी को जिन्दा जमीं पे गाड़ दिया। पर मरते मरते वो लड़की ने श्राप दिया के वो बदला लेने जरूर वापस आएगी। दादा जी को उस् वक़्त इस बात का कतई इल्म नहीं था के मरते वक़्त जो बात वो लड़की बोली वो एक दिन सच हो जायेगा। दादा जी ने फिर सादी करली। पिताजी के जनम के डी महीने बाद ही एक  तरीके से दादी जी की मौत होगयी। फिर एक एक कर के घर के सदस्यों की मौत होने लगी। दादा जी क समझ में नहीं आरहाथा की ये सब क्या हो राहा हे। तभी एक तांत्रिक को बुलाया गया। जिसने ये काहा के इस हबेली पे किसी ताकत बर प्रेत का साया हे। और अब उसकी नजर मेरे पिता जी पर हे। जब तक वो उन्हें मर न देती वो नहीं जाएगी। इसके चलते दादा जी ने काई सारे हवन और पूजा करवाए  पर इसका कोई असर नहीं हुआ कुछ ही दिन में सारे परिबार वाले मरे गए सिर्फ दादा जी और पिताजी ही जिन्दा थे। तब मेरे दादा जी ने माहा काल यज्ञं करवाने को सोचा। पर इस यज्ञं में जान का भी खतरा था। पर दादा जी ने ये यज्ञं करवाने की थान लि थी। सारी तैयारियां हो गयी थी, तभी अचानक वो प्रेत आत्मा वहां  पहंच गयी। दादा जी उसे देख कर बिलकुल ही चौंक उठे। क्यों के ये वही लड़की थी जिससे दादा जी ने ही मरवाया था। माहा काल यज्ञं के अनुसार यज्ञं करता को यज्ञं पूरा होने तक अखंड जाप करते रहना होता हे। बिच में रुकने पे या बिच मेसे उठ के जाने से ये यज्ञं बिफल हो जाता हे। उस प्रेत आत्मा ने छलावा रचते हुए पिता जी के आवाज में मदत के लिए चीला ने लगी। पंडित जी के लाख रोकने पर भी दादा जी ने यज्ञं को आधे में ही छोड़ के उसे मारने चले गए। पर अफ़सोस दादा जी उससे मार न सके। दादा जी का कटा हुआ सर उसी यज्ञं कुंड में आके गिरा। दादा जी के  मरने के बाद सिर्फ मेरे पिता जी ही इस खानदान के आखरी वारिस बचे थे। उस प्रेत आत्मा ने कसम खाई थी के वो हमारे ख़ानदान में किसीको नहीं छोड़ेगी। इसीलिए जब वो पिताजी को मारने आयी तो पंडित जीने उसपे माहा काल का पबित्र जल छिड़क के उसे बस में कर लिया। पर उस प्रेत आत्मा को मार पाना उनके बस में नहीं था। इसीलिए समाये रहते उन्होंने पिताजी को वहां से लेके निकल लेना ही सही समझा। वो सीधा माहा काल के मंदिर पहंचे। और वहां एक कबच का निर्माण किया। पबित्र आत्माओ के सक्ति से अभिमंत्रित कबच को पिताजी को पहनाया। और उस वक़्त के सबसे माहान तांत्रिक स्वामी त्रिलोकानद के आसीर्बाद से एक माहा काल सस्त्र का निर्माण किया। और जहाँ पर वो लड़की को गाड़ा गया था बही पे माहा काल का त्रिसूल और कबच से हमेसा के लिए उस प्रेत आत्मा को कैद करदिया। जिससे कुछ ही पल पेहेले कालिया ने फिरसे आज़ाद करदिया था। hindi stories

क्या इस मुसीबत से मुखिया जी बच पाएंगे। आखिर क्या केहर ढायेगी वो प्रेत आत्मा जानने के लिए हमारे साथ बने रहिये।
hindi stories

जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - भाग 2






अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग 1



Share:

अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया - अंतिम भाग

अर्जुन ने तीनो के लास को देख के जैसे तैसे करके खुद को संभाला। उसके एक फेसलेने उसके तीनो दोस्तों की जान लेचुकि थी। कास उसने बिकाश को आगे बढ़ने को ना  काहा होता तो सायद आज उसके दोस्त जिन्दा होते। इतने घने जंगल में अकेले रहना खतरनाक होता ,ये सोच के जैसे ही उसने अपने मरे हुए दोस्तों को छोड़ के आगे कदम बढ़ाया तो उसे पीछे किसी के कदमों के आहट सुनाई दी। अर्जुन ने अपने आप को संभालते हुए पीछे चेहरा घुमाया तो उसने जो देखा उसके होस फाख्ता होगये। की एक काली साया ठीक उनके गाड़ी के पास कड़ी थी। और वो गाड़ी मेसे उसके तीन दोस्तों को खींच के जंगल में लेके जारहीथी। अर्जुन के पैर ऐसे हिल रहेथे जैसे मानो उसने अपने मौत को देख लिया हो। अर्जुन कर पता इससे पहले ही वो काली साया उसके तीन दोस्तों को लेके जंगल में कहीं गायब होगयी। अर्जुन के आंखोसे हलकी हलकी आंसुओं की लकीरे खीच गए। उसके वजेसे उसके दोस्त आज नहीं रहे। पर इससे पहले की अर्जुन सारी उम्मीद छोड़ देता, उससे अचानक कमल और बिकाश की दर्द भरी चीख सुनाई देती हे। उसके दिल में उम्मीद की एक नयी किरण खेल जाती हे। वो हिमत जुटा के जंगल की और भागा। तभी उसके दिमाग में एक सुझाव आया। उसने पुलिस को बुलाने की सोची ,पर  मोबाइल तो गाड़ी में रह गयाथा। वो तुरंत गाड़ी की और भागा।

मोबाइल मिलते ही उसने पुलिस को फ़ोन मिलाया। तभी उस तरफसे दबी हुई आवाज़ में किसी ने हेलो बोला तो अर्जुन ने घबराते हुए का म्पति  हुई जुबान से बोला :- हेलो।  .... हेलो। देखिये में अर्जुन बोल रहा हूँ। में यहाँ फस गया हूँ। मुझे और मेरे दोस्तों को निकालिये इस जंगल से। ...... तभी उधर से आवाज आयी :- आपको किसने कहाथा उस जंगल में जाने क लिए। अब उस जंगल में रात को कोई नहीं जाता। हम भी नहीं जा सकते। आपको सुबह होने का इंतजार करना पड़ेगा। ये सुनके अर्जुन के उम्मीदों को  तगड़ा झटका लगा। अब सुबह होने तक उस्से अकेले ही इस आत्मा को झेलना पड़ेगा। अर्जुन को ये भी नहीं पता के उसके दोस्त अभी तक जिन्दा हे भी या नहीं। अर्जुन जैसे ही अपने कदम जंगल की और बढ़ता हे तो वो काली साया ठीक उसके सामने आके कड़ी होजाती हे।
अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया - अंतिम भाग
मेरे दोस्तों को छोड़ दो.. बदलेमे मुझे मारडालो  ,अर्जुन ये कह के उसके आगे घुटने टेक के बैठ गया। नजाने उसके आंसुओं में ऐसी क्या ताकत थी जब अर्जुन की आंखे खुली तो वो आत्मा गायब होचुकीथी और जब अर्जुन ने पीछे देखा तो वहां लिखा था की "यहांसे चले जाओ। वापस मत आना। अर्जुन खुद को संभालता हुआ गाड़ी में बैठा। आया था दोस्तों के साथ पर उसकी नासमझी के वजसे उसे अकेले ही लौटना पद रहा हे। गाड़ी स्टार्ट किया और जैसे ही गाड़ी को पीछे खींचने लगा तो दूर से उसे कमल ,बिकास और दिलीप खड़े हुए दिखाई दिए और ठीक उनके पास वो काली साया भी कड़ी हुई दिखी। अर्जुन खुद को दोसी मान के गाड़ी चला ही रहता की तभी अचानक उसके गाड़ी के पास से एक ट्रक जोरसे हॉर्न देके निकली जिससे अर्जुन ने अपना संतुलन खोदिया और गाड़ी खाई में जा गिरी और निचे गिरने की साथ ही गाड़ी में जबरदस्त धमाका हुआ। और उसी धमाके के साथ अर्जुन की आंखे खुली तो उसने देखा गाड़ी हवाओं से बात करती हुयी HIGHWAY पे जारही हे। बिकाश गाड़ी चला रहा हे। पीछे दिलीप और कमल भी बैठे हैं। अर्जुन कुछ समझ पता तभी बिकाश ने जोरकी ब्रेक लगाई। गाड़ी दो रहे पे कड़ी थी। किधर जाएँ इस बात को लेके सबमे बेहेस होरहीथी। तभी अर्जुन बोल उठा :- "गाड़ी को पीछे लेलो" 

"कभी कभी हम इंसानी ताकत को सबसे बड़ी ताकत मान बेठ्तें हे ,पर कभी कभी इसके लिए हमे भारी कीमत चुकानि पड़ती हे। तो आपको अगर कभी किसी दो राहे में गाड़ी लेना पड़े तो..... "


अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया  rdhindistories









Share:

अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग २

गाड़ी के रुक जाने के बाद अर्जुन घूसे से बिकास को पूछता हे। ....
अबे तू ये बार बार गाड़ी क्यों रोक लेता हे ?  काहाना  गाड़ी साइड से  लेले। .फिर गाडीको खड़ा करदेना का क्या मतलब?

बिकास बोला :- मेने नहीं रोका हे गाड़ी। गाड़ी इस बार अपने आप ही  रुक गयी हे।
     
अचानक एक सनाटा पसर गया चारो ओर। गाड़ी से उतर ने की किसीकी भी हिमत नहीं हो रहीथी। अर्जुन ने हिमत करके गाड़ी से उतरने की कोसिस की। तब देखा की गाड़ी का टायर एक खड़े में फसा हुआ था। पर  अजिब बात ये थी के इतने बड़े खड़े में फसने के वाबजुत कोई झटका महसूस नहीं हुआ था उन चरों को।
अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग २
अर्जुन ने कहा :- अरे घबराने की कोई बात नहीं, गाड़ी में कुछ खराबी नहीं हे बस एक खड़ा हे सब  मिल के  उठालेंगे । पर अजब  बात हे गाड़ी से कोई आवाज़ नहीं आरही थी। दो तीन बार बुलाने पर भी जब कुछ जवाब नहीं मिला तो अर्जुन ने घुसे से कहा अबे सालों  सबको सांप सूंघ गया हे क्या ? ये कहते ही वो जैसे ही गाड़ी के आगे आया उसके सामने जो नजारा था उससे शब्दों में बयां नहीं किया जासकता। अर्जुन के सामने गाड़ी में कोई नहीं था। पूरा गाड़ी खाली पडाथा। .. .. अर्जुन को ये रात अब  डरने लगी थी वो एक अंजनी खोप से सेहमने लगाथा। भुत प्रेत के कहानियों पे कभी यकीन न रखने वाला अर्जुन आज एक दम खामोश था। सर्द रातों में अकेले जंगल में होने का एहसास भी अपने आप में खउफनाक था। अर्जुन को चिंता थी उसके दोस्तों की। वो अपने दोस्तों को आवाज देने लग गया। पैर उसकी आवाज दूर तक जाने के बाद उस अँधेरे में गम हो जाती थी। गाड़ी को छोड़ बिकास अब उस जंगल की और बढ़ने लगता हे अपने दोस्तों को ढूंढ़ने। उसके पैर कुछ ही कदम बढे होंगे तभी पीछे से आवाज आयी। ......

काहाथा न इस रास्ते मत आना। ......

अर्जुन तुरन्त पीछे मुड़ा। उसके पीछे बिकाश दिलीप और कमल खड़े थे। उन्हें देख के अर्जुन के होस फाख्ता होगये। अर्जुन ने बिकास का हात पकड़के बोला तुम तीनो कहाँ चले गयेथे यार. फिर बिकाश ने जो काहा उसपे यकीं करपाना अर्जुन के बस की बात थी. बिकाश ने कहा :- अरे में दिलीप और कमल तो गाड़ी में बैठे थे।

पैर तू अचानक पागलों के तरा जंगल की और भाग क्यों राहाथा। इसीलिए हम तीनो को गाड़ी से उतर के तुझे रोकना पड़ा। अर्जुन ये सब सुनके थोड़ा सांसे भर रहता के उसकी नजर सामने गयी जहाँ पे गाड़ी राखी हुयी थी अब गाड़ी वहां थी ही नेही। अर्जुन गाड़ी की और भागा और जैसे ही पीछे मुड़ा वहां कोई नहीं था। था तो सिर्फ एक डर का एहसास। ..... अब न गाड़ी थी और न ही अर्जुन के दोस्त। पीछे जा पाना भी अब मुमकिन नहीं था। ठण्ड उससे मारदे इससे पहले वो वहांसे कहीं चले जाना चाहता था। अब अर्जुन को यकीं हो चला था। उसने लेफ्ट लेके कितनी बड़ी गलती करदि थी। उस सुनसान रास्ते में कुछ दूर चलने के बाद एक गाड़ी दिखी अर्जुन खुस होगया सोचने लगा के सायद ये उन्ही की गाड़ी हो। और थोड़ी दूर आने के बाद अर्जुन कन्फर्म होगया की ये गाड़ी उनकि हे। जैसे ही वो भाग के गाड़ी के पास पहंचा तो देखा की गाड़ी में बाकि तीनो की लाश पड़िथी।  ... 






कहानी का अंतिम भाग जल्दी आपके सामने होगा। 

        काहानी का अगला भाग निचे दिए गए "NEXT" बटन पर क्लिक करके पढ़े


rdhindistories

rdhindistories









Share:

अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग 1

hindi stories में आज - कभी कभी इंसान को इशारे समझ लेने चाहिए। 

अँधेरी सड़क पे दिखा एक साया -भाग 1





















अर्जुन , बिकास, दिलीप,और कमल चार दोस्त अपने collage लाइफ पूरी होने के  खुसी में गाड़ी में पिकनिक मानाने निकले। गाड़ी तेज़ हवाओं से बातें  करते हुए जंगल के बिचसे निकल रही थी , गाड़ी में सर्द हावा  भी धीरे धीरे अपना कमाल दिखा रही थी।  बिकास गाड़ी चला रहा था... बाकि तीनो अपनी अपनी आंखे बंद करके होटल में पहंचने का इंतेज़ार  कर रहे थे. के तभी अचानक गाडीकी रुकनेकी बड़ी तेज़ आवाज़ आयी ,और उसी break  क झटके से बाकि तीनो की भी नीड टूट सी जाती हे..


अर्जुन ने बोला  :- अबे साले  नशा  करके आया हे क्या। इतनी जोर का  झटका क्यों दिया. .. मेरे हातों में हल्कीसी मोच आगयी। तभी पीछे बैठे दिलीप  और कमल भी बिकास पे चिलाने लगे। . 

तभी बिकास बोला :- अबे सालों  गाड़ी दो राहों पे हे।  और map दिलीप के पास में हे। 

तभी दिलपि बोल उठा :- क्या बात कर रहा हे , मेरे पास मैप नहीं हे. वो तो अर्जुन या कमल के पास होगा। 

तभी कमल और अर्जुन एक साथ बोल उठे :- हमारे पास कोई मैप नहीं हे।

वो सब मैप साथ में लाना भूल गयेथे। .. तभी बिकास ने कहा :- अरे होटल वाले से हि पूछ लेते हेना। 

पर जंगल में नेटवर्क नहीं मिल राहा था। . बौहत  इंतजार करने पर  भी जब कोई फ़ायदा नहीं हुआ तो अर्जुन ने कहा :- अबे पूरी रात इसी रास्तेपे सोच के बिताओगे क्या। तू एक काम कर गाड़ी लेफ्ट लेले। . 

बिकास बोला :- पर  ये रास्ता गलत हुआ तो। ...... 

अर्जुन :- अरे यार गलत हुआ तो हुआ थोड़ा इस रास्ते पे भी घूम लेंगे। .गाड़ी में पेट्रोल की कोई कमी नहीं हे.. और आगे कोई मिलेगा तो उससे रास्ता पूछ लेंगे। . 

सर्द भरी रातों में रुके रहने का कोई मतलब नहीं था वो सब लेफ्ट की और चल पड़े।  सर्द हवाओं ने फिरसे सबको अपने आगोस में ले  रही  थी की तभी फिर से बिकास के  पैर ब्रेक पे जा लगे । 

अबे  साले अब फिरसे क्या हुआ।  ये बोलके अर्जुन फिरसे चिलाने लगा।  पर इस बार माजरा कुछ और ही था। कई बार पुकारने पर  भी बिकास जबाब नहीं दे रहा था। मानो  जैसे किसी ने उसकी आवाज़ छीन ली हो। 

वो इशारो में चारों  को कुछ दिखाने  लगा। .सर्द  हवाओं के वजेसे सामने ज्यादा दूर देखपाना भी मुश्किल था। .इसीलिए बाकि तीनो को कुछ खास दिखा नहीं। .लेकिन बिकास की आंखे साफ साफ उससे देख सकती थी।

बिकास ने अर्जुन से काहा :- तुझे दिखाई नहीं देता क्या रे।  सामने वो........ जो। .....

बिकाश की कांपती  जबान से पत्ता लग राहता था की सामने कुछ तो हे जिससे देख कर बिकास डर राहा हे। पर  अर्जुन ने बिकास से काहा......

तू गाड़ी साइड से लेले ना, हमे उससे कोई काम नहीं हे तू चुप चाप गाड़ी को साइड से लेले।

अर्जुन की बाते  सुनके बिकास ने गाड़ी को उसके साइड से ले लिया। .

कुछ समये तक गाड़ी एक दम सही चलती रही पर कुछ देर चलने के बाद गाड़ी अचानक रुक गयी।

इसबार गाड़ी को बिकाश ने नेही  रोका था....... गाड़ी अपने आप ही रुक गईथी।।।।।।।।।।।।।।।।




      काहानी का अगला भाग  निचे दिए गए "NEXT" बटन पर क्लिक करके पढ़े


rdhindistories

















Share:

EK ANSUNISI KAHANI

आज प्रबिन को 26  साल पुरे हुए। फिर बी उसके चहरे पे बही सवाल जिसका जवाब वो पिछले 5 साल  से ढूंढ रहा हे। पर उसे आज  तक  उस सवाल का जवाब नहीं मिला। पेरेसान  होगया हे प्रबीन।  घर में कोई उसके इस सवाल का जवाब नहीं देता के आखिर उसके हर जनम दिन में उससे एक सपना क्यों आता हे के एक बुरी प्रेत आत्मा उसके सारे परिवार को मार् देती हे।  सीबाये उसके। .जब भी वो ये सवाल अपने घर के  किसी सदश्य से पूछता, सब इससे बस एक बुरी सपना कह क टाल देते। आज 26  साल का होगया हे प्रवीण। और उस आत्मा के  मुता बिक एहि वो साल हे।

प्रवीण तुम्हे ये गाड़ी केसी लगी बेटा। अछि हे DAD , थैंक्स
ाचा सुनो बेटा दादी की तबियत थोड़ी ठीक नहीं हे ात्ते टाइम दादी की मेडिसिन लेना यद् से। जी माँ
सामं होते होते होते दादी की तबियत और भी बिगड़ने लगी। डॉक्टर आये पैर टेस्ट एक डैम नौर्मल।

प्रवीण  : डॉक्टर साहब ऐसे कैसे
डॉ : बेटा में भी हैरान हूँ ५ साल से तुम्हारे दादी का इलाज कर रहा हूँ पैर ऐसी बात कवी नहीं देखि मेने
प्रवीण : क्या दादी को अब सही नहीं किआ जा सकता
डॉ : कुछ केह नहीं सकते

रात के ३ बजे
दादी चिल्ला ने लगी. वो मारदेगी मुझे।  मुझे बचालो
प्रवीण :कौन मरदेगा तुम्हे दादी
दादी : वो आगयी हे। उसने कहता वो आएगी। में मरना नहीं चाहती
प्रवीण :नहीं दादी कुछ नहीं होगा हम सब हेना।

अगले दिन सुबह जब प्रवीण दादी के कमरे में गया तो उसके होस उड़ गए

प्रवीण : माँ माँ. . .... ..... माँ। ...
माँ : क्या हुआ बेटा। .

दोनों उस समाये दादी को देख के अपने आँखों पे यकीं नहीं कर परहेथे
दादी एक सीसे का टुकड़ा लये अपने ही हटो को काट रही थी

प्रवीण : दादी ये आप क्या कर रही हो
दादी ने कहा : आज मेरा आखरी दिन हे में तो जा रही हूँ पर तू बाक़िओं को कैसे बचाएगा। .वो आ  चुकी हे

उसदिन दादी ने अपनी  आखरी सांसे लेते वक़्त भी... वो डर साफ साफ उनके आँखों से छलक  रहा था
दादी के जेने को अब दो दिन बीत चुके थे अचानक प्रवीण की माँ की तबियत कुछ बिगड़ ने लगी
अजीब से दोरे भी आने लगे प्रेवेन की माँ को

वो आगयी वो मुझे भी मरदेगी।  वो आगयी
अब प्रवीण का सब्र का बंद टूटने लगता कुछ तो था जो उससे जुड़ा हुआ था। ऊपर से उड़के दादी गुजर गयी माँ की हालत खराप क्या होरहा हे उसके साथ। उसने इस बारेमे अपने डैड से बात की

प्रवीण : डैड ये सब क्या होरहा हे आपलोग मुझसे क्या छुपा रहे हो। दादी गुजर गयी ,माँ की हालत नाजुक
डैड :बेटे अब सही समये नहीं आया। पहले हमे तुम्हारे माँ की इलाज क लिए सोचना चाहिए..
माँ की हालत को देख क प्रवीण मन गया.
अगले दिन सुबह जो हुआ सायद ये एक अम्म इंसान को पागल बना देने क लिए काफी था
प्रवीण ररत को अपने माँ क पास ही सोगया था। .सुबह को जब आंख खुली तो माँ बिस्तर पे नहीं थी वल्कि चाट पे उलटी लटकी हुई थी। .प्रवीण को लगा वो अभी भी सपने में हे। उसने जब नज़दीक जेक देखा तो उसके आंखोसे आंसू बह गए। उसकी माँ खुद अपने हटो को काट के खा रही थी। और अपना ही खून पी रही थी. अपनी माँ को इस हालत में सायद ही कोई बीटा देख पाए. प्रवीण ने अपने डैड को बुलाया पैर सभा होते होते बोहत देर हो चुकी थी अब उसकी माँ को भी समझ में आज्ञा था की वो अब जाने वाली हे। उन्होने प्रवीण को एक बार गले लगाया और कहा की परसो तक हम सब साथ में होंगे।  और वो चल बसी।

दो दिनों में परिबार क दो सदयों की मौत ने प्रबीन को मनो जैसे हिला क रख दिया हो.
अपने उदास दिल को लेके वो सैम को घर लौटा ही था की उसके डैड क कमरे से कुछ अजीब सी आवाजे सुनने में आया। वो तुरंत डैड क रूम में भगा।

दरवाजा खुल ते ही उसके आंखे फटी रह गयी। उसके डैड को उसी तारिक से दौरे  आने सुरु होगये थे।
डैड उठिये यहाँ से प्ल्ज़ उठिये
डैड: वो आगयी हे अब मुझे जाना होगा। वो सब को मर डालेगी उसीने तेरी माँ को मारा हे उसीने तेरी दादी को मारा हे उसीने सब किया हे।
प्रवीण :कौन डैड कौन। कौन हे वो। अब प्रेवेन को समझ आज्ञा था की वो जो भी हे वो किसीको नहीं छोड़ रही हे
उसने किसी तांत्रिक को बुलाने की बात सोची पैर वो अपने डैड को अकेले छोड़ क भी नहीं जासकता घर क किसी भी मोबाइल में कॉल नहीं लगरहा।
अचानक से उसके डैड को दौरे  आना बंद होगये। तवी प्रवीण ने पूछा डैड प्ल्ज़ मुझे सब सच बताइये क्या हो रहा हे तो उसके डैड  की घर क बेस मेन्ट में एक कमरा हे जहा पे एक बुरी आत्मा का साया हे वो कबसे हम सबसे बदला लेना चाहती हे और आज वो आजाद होगयी हे। उससे अब कोई नहीं रोक सकता। प्रवीण ने पूछा कोई तो रास्ता होगा।
डैड : नहीं अब बोहत देर हो चुकी हे। ये कह के वो चुप होगये। और प्रवीण से कहा बेटे कल सायद वो तुझे भी लेने आएगी। इतना कहते ही बेसमेंट में भट तेज़ी से कुछ टूट नेकी आवाज आयी। प्रवीण निचे भगा भगा गया पैर वहां तो कुछ नहीं था। .फिर जब वो वापस आया तो उसके डैड ने दरवाजा अंदर से लुक कर लिया था। .प्रवीण रात भर बाहर रोटा रहा और सुभे उठके उसके आँखों क सामने अँधेरा छागया। उसके डैड अब नहीं रहे। वो बेसमेंट के उसी रूम के आगे मरे पड़ेथे जिसकी बात वो कल रत को प्रवीण को बताया था।

सिर्फ 4 दिनों में एक परिवार ख़तम होगया था और आज सायद प्रवीण की बारी थी।

दिन ढल गया सैम होते होते प्रवीण ने भी खुद को एक रूम में लक कर लिया और उस आत्मा का इंतजार करने लगा। अब वो इस दुनिया में जी क क्या करे जहाँ उसके डैड माँ  दादी नहीं रही उसका परिवार नहीं रहा। रात क करीब १० बजे उसके मोबाइल में एक कॉल अत हे अचानक से। .वो देख ता हे उठा के तो उसकी आंखे फटी की फटी रह जाती हे। मोबाइल में उसके डैड का कॉल था।  उसने दर ते हुए फ़ोन उठाया तो उधर से आवाज आयी :-

क्यों बेटे कोई इतनी देर लगता हे फ़ोन उठाने में।  निचे आओ हम सब तुम्हे लेने ाएँ हे। ये सुन क प्रवीण फ़ोन काट देता हे।  फिर उसकी माँ का फ़ोन अत हे वो भी वही बाटे दोहराती हे। अब प्रवीण को यकीं होने लगताहै की वो अब सायद नहीं बचे।  फिर भी वो हिमत करके निचे हाल में जाता हे वहां उसे उसकी दादी , माँ ,डैड बैठे हुए नजर ातें हे। वो अपनी आँखों पे यकीं नहीं कर पता। जो उसके साथ हुआ क्या वो सब एक सपना था।  पैर ये क्या दादी की परछाई क्यों नहीं दिख रही। इसका मतलब ये सब मर चुकें हे. और मरचुकें हे तो फिर यहाँ कैसे आये।  तभी उसके डैड बोलतें हे ाजाओ बेटा  हमारे साथ ाजाओ बरना तुम्हे वो  बुरी आत्मा मार डालेगी। देखो माँ भी हे। हमारे साथ ाजाओ। प्रवीण कहता हे अप्प सब तो मर चुकें हे न तो में अप्प सब क साथ कैसे जाऊं। तभी उसकी दादी एक चाकू हात मेलेके बोलती हे में इस चाकू को तुम्हरे साइन में दाल दूंगी फिर तुम हमारे साथ आसाकते हो।
ये क्या होरहा था प्रवीण क साथ एक तरफ वो बुरी आत्मा इ तरफ उसके अपने ही घर बाले। .हर कोई उसे मरना चाहता था क्या ये सब सच था या एक सपना। ..... वो खुदको अपने कमरे में बंद करलेता हे पैर उसके दादी डैड और माँ वहां पहंच जाते हे और जोर जोर से दरवाजा पीटने  लगते हे। प्रवीण को कुछ समझ में नहीं आता क वो क्या करे। finally उसके रूम का दरवाजा भी टूट जाता हे और उसके दादी उस चाकू को लेके उसकी और बढ़ ती हे। वो उस चाकू को उसके साइन में दाग नहीं वाली होती हे की वो बुरी आत्मा उसी कमरे में अजा ती हे  जिसने उन तीनो को मराथा। और वही आत्मा प्रवीण क परिवार वालों के आत्माओ को भी नस्ट कर देती हे। .ये बात प्रेवेन को समझ में नहीं अति। उसके साथ जो हो रहता क्या वो एक आम इंसान क साथ होसकता हे।
उसने उस आत्मा से पुछा : तुम कौन हो तुमने मेरे परिवार को मार डाला और आज जब उन्होंने मुझे मारना चाहा तो तुमने मुझे बचाया ये सब क्या होरहा रे। तुम वही जो मेरे सपनो में अति थी। हेना कौन हो तुम........

वो आत्मा बिना कुछ बोले निचे चली जाती हे उसी बेस मेन्ट में प्रवीण भी उसके पीछे उसी बेसमेंट में चला जाता हे। जहा वो जेक जो कुछ भी देख ता हे उसे यकीं होजाता हे की ये सपना नहीं हे। उस रूम में भट साडी फोटो हे प्रवीण की बचपन की। .पैर ये क्या वो जिस औरत क हात में हे ये तो उसकी माँ नहीं हे। और उसके डैड की इस औरत क साथ सदी की फोटो कैसे।।।।।।।।।।।।।।।।

तभी एक छोटी सी लड़की वहां अति हे और प्रवीण का हाट पकड़ के कहती हे :- भया आप आगये। .
प्रवीण कुछ बोल नहीं पाता। आखिर एक छोटी सी लड़की जिसको वो जनता तक नहीं वो उससे भाई क्यों बुलाएगी।  तभी वो लड़की उसकी सारि राज़ से पर्दा उठती हे

लड़की:- हमारे डैड ने जिससे पहले सदी किती उनका कोई बचा नहीं हुआ उनसे। ये बात दादी को खटकती रही फिर दादी ने मेरी माँ से डैड की सदी करवादी. मेरी माँ गरीब घर की थी उनसे ये बात छुपाई गयी की डैड पहले से सदी सुदा हे। डैड मेरे माँ से प्यार का झूठा नाटक करते रहे। जब तुम पैदा हुए तो उनलोगोंने मेरी माँ से तुम्हे छीनलिया। और उन्हें इस बेस मेन्ट में बंद करदिया।  फिर एक साल बाद में पैदा होगयी। पैर में लड़की थी न तो मुझे प्यार करने वाला कोई नहीं था इस घर में। दादी ने माँ को एक बार भी तुमसे मिलने नहीं दिया।  पैर डैड क कहने पे मुझे ४ साल के होने के बाद वहाँसे ये कह क लाया गया के मेरी पढाई डैड करवाएंगे। में तुम्हे राखी बांधना चाहती थी हमेसा पैर डर क वजेसे नहीं बांध पायी कभी। फिर एक दिन दादी ने और बड़ी माँ ने मिलके मुझे भी मरवादिया और मेरी माँ को भी मरने छोड़दिया निचे। जिससे तुम हमेसा से एक बुरी आत्मा समझते आए हो वो तुम्हारी माँ हे। .और में तुम्हारी छोटी बेहेन.

उसदिन क बाद प्रवीण को किसीने नहीं देखा

क्या प्रवीण के जगह अप्प होते तो इस बात को मान पाते। .......

ये थी मेरी कहानी एक सफर सभी में।

Share:

Want to earn huge money click here

Wishpond

Recent Posts

Popular Posts

Sorotan

तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

  तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !  तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। ...

Categories

Blog Archive

Pages

Health Section (स्वस्थ सम्भदित तथ्य)

  • Lorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit.
  • Aliquam tincidunt mauris eu risus.
  • Vestibulum auctor dapibus neque.
  • Love stories

Follow on Instagram

want to get quick updates and information through instagram? Follow me in Instagram.

Contact Us

नाम

ईमेल *

संदेश *