• The Secret Of The Nagas (Shiva Trilogy-2)

    This is the second novel in the trilogy on Shiva by Amish Tripathy. The book ‘Nagaon Ka Rahasya’ is the Hindi version of the book originally written in English ‘Secrets of Nagas’.

  • Satyayoddha Kalki: Eye of Brahma

    After a defeat at the hands of Lord Kali, Kalki Hari must journey towards the mahendragiri mountains with his companions to finally become the avatar he is destined to be.

  • The Immortals of Meluha

    जब बुराई एक महाकाय रूप धारण कर लेती है, जब ऐसा प्रतीत होता है कि सबकुछ लुप्त हो चुका है, जब आपके शत्रु विजय प्राप्त कर लेंगे, तब एक महानायक अवतरित होगा।

  • तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

    तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। क्यों के अंधेरा होने पर ही रोशनी की जरूरत होती है। और कुछ बुरी सक्ती हमेशा रोशनी को मिटाने के चक्कर में होती है। तो में आप सबको आज ये बताऊंगा के कैसे एक रोशनी के दूत ने अंधेरे का साथ दिया और बन गया अधेरा का सबसे ताकतवर शहंशह.

  • जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग

    वो आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। आगे जानने के लिए यहाँ click करे.

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TOP HINDI MISTRY क्या होगा अगर हमारी प्यारी धरती घूमना बंद करदे तो?

 क्या होगा अगर धरती घूमना बंद करदे तो? 

TOP HINDI MISTRY क्या होगा अगर हमारी प्यारी धरती घूमना बंद करदे तो?



क्या होगा अगर हमारी प्यारी धरती घूमना बंद कर दे ? यह एक बेहद ही हैरान कर देने वाला सवाल है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर ऐसा वाकई में होता है तो क्या होगा इस संसार का और क्या होगा हमारा? तो चलिए जानते हे के क्या होगा अगर धरती घूमना बंद कर दे तो ?


हमारी धरती सूर्य मंडल का तीसरा ग्रह है. धरती सूर्य परिक्रमा करने में 365 दिन का समय लेती हे। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती हर सेकंड में करीबन आधा किलोमीटर (460 मीटर) तक का सफर पूरा करती हे। और इसके साथ हम भी उसी गतिसे रोज़ गति करतें हे। तो जरा सोच कर देखिए कि अगर आपका कोई भी गाड़ी  एक सेकंड में आधा किलोमीटर का सफर तय कर रहा हो और अचानक रुक जाए तो क्या होगा? आप अपनी सीट से उठकर काफी दूर जाकर गिरेंगे।  ठीक उसी तरह धरती के साथ-साथ हम भी उसके साथ गतिशील हे। सारी हवाएं सारे बस्तु यहां तक कि सारे भौतिक भी गतिशील होतें हे। अगर धरती थोड़ी देर के लिए रुक जाती है तो वैज्ञानिकों के अनुसार सारे समुद्र का पानी एक झटके में आपस में मिल जाएंगे और भयंकर सुनामी का रूप लेके पृथ्वी की सतह पर फेल जाएंगे। इसे धरती का 90 फ़ीसदी भाग महज चंद मिनटों में जल में निमग्न हो जाएगा। पर उससे पहले ही हवा के तेज़ दवाब के चलते सारे घर और बड़े-बड़े इमारत टूटकर गिरने लगेंगे। यहां तक कि एक घर्षण बल से दो परमाणु बम फटने के समान ऊर्जा पैदा होने की संभावना हे। इससे जितनी तबाही हो सकती है उससे कहीं ज्यादा तबाही की आशंका की गई हे।   वैज्ञानिकों का यहां तक भी मानना है कि अगर ऐसा होता है तो सभी बड़े-बड़े हिम खंड भारी तेजी से  टूटेंगे  और समुद्र में एक बड़े सुनामी करने में मदद करेंगे। यहां तक कि कई बड़े-बड़े गड्ढे धरती के सतह पर देखने को मिल सकती है. यह इसलिए होगा क्योंकि धरती के अंदर की ओर में जो मैग्नेटिक फील्ड मौजूद है उस पर भरी दवाब हेतु वह मैग्नेटिक फील्ड में काफी तेजी से बदलाव आएंगे। और सबसे आश्चर्य की बात यह होगी कि कहीं कहीं जगह चांद दिखना बंद हो जाएंगे। इस वजह से पृथ्वी का एक हिस्सा जो 6 महीने तक उजाले में और दूसरा हिस्सा अंधेरे में डूब जाएगा। बैज्ञानिकों की माने अगर ऐसा 3 से लेकर 4 साल तक चलता रहे तो धरती में जीवन की सत्ता पूर्ण रूप से नष्ट और समाप्त हो जाएगी। वैसे बैज्ञानिकों का कहना हे आज तक ब्रह्मांड में एसी विचित्र घटना का उदाहरण कभी भी देखने को नहीं मिला है। ये मात्र एक कल्पना हो सकती है। और आने वाले 400 से लेकर 600 सालों के अंदर ऐसी कोई घटना घटने की संभावना नहीं है। वैसे क्या आप जानते हैं कि अगर द्वितीय विश्व युद्ध नहीं होता तो आज परिस्थितियां कैसी होती और अगर जीते विश्व युद्ध में जर्मनी जीत जाता तो क्या होता जानेंगे हमारे लेख के अगले हिस्से में। तब तक हमारी और भी कहानियां पढ़ते रहिए और अपने कीमती सुझाव हमें देते रहिए।

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क्या हो अगर धरती का सारा पानी एक साथ सुख जाये तो?

 क्या हो अगर धरती का सारा पानी एक साथ सुख जाये तो? 

क्या हो अगर धरती का सारा पानी एक साथ सुख जाये तो?




क्या आपने कभी सोचा हे अगर हमारे धरती से सारा पानी जो नदी, झरने, सागर और तालाब में हे वह गायब हो जाए तो हमारे ऊपर क्या असर होगा? क्या मानव सभ्यता बिना पानी के जीवित रह पाएगी। और क्या हो अगर कल के कल हमारे पृथ्वी के सारे महासागर और सागर में से पानी सूख जाए। बड़ी विचित्र लगने वाली यह बातें अगर कभी सच हुई तो क्या होगा ?

दोस्तों जैसे कि हम सबको पता है कि हमारी धरती की तीन-चौथाई हिस्सा जल और सिर्फ 1 भाग स्थल होता है । यानी कि सारा का सारा जो स्थल जीवन है वह सिर्फ एक भाग है । उसी तरह अगर पूरे पानी को शो फ़ीसदी पकड़ा जाए तो सागर और महासागर के पानी की तादात 97 फ़ीसदी होती है। ऐसे में अगर सारा सागर और महासागर का पानी सूख जाता है तो जाहिर सी बात है कि हमारे धरती पर अचानक से एक बड़ी संकट आ पड़ेगी।

तो चलिए जानते हैं क्या क्या होगा अगर  सारा पानी एक दिन सूख जाता है। वैसे तो यह बातें सिर्फ कल्पना में ही सत्य लग सकती है कि पृथ्वी का सारा पानी सूख जाए लेकिन अगर ऐसा बकेयी में हो तब भी ऐसा होते होते करोड़ों साल बीत जायेगा । वैज्ञानिकों का मानना है कि इस धरती पर पहले जीवन की रचना जल में ही हुई थी।  ऐसे में अगर सारा पानी  सूख जाता है तो पहली बड़ी आफत हमारे वायुमंडल पर गिरेगा। 

सागर और महासागर पृथ्वी के जलवायु को नियंत्रित करते हैं। ऐसे में अगर पानी सूख जाता है तो जलवायु अनियंत्रित हो जाएगा। ऋतू चक्र बिगड़ जाएगी जिसकी भरपाई नहीं हो पाएगी।  हालात यह हो जाएंगे कि विश्व का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तान में धीरे-धीरे परिवर्तित हो जाएगा। 

जाहिर सी बात है पानी खत्म हो जाएगा तो पहले हमारे पानी में रहने वाले जीव मर जाएंगे। सागर और महासागर का पानी सूखने के बाद 3 फीसदी जो हमारी झील और नदी आदि में बचे हुए होते हैं वह बाकि 97 फ़ीसदी पानी की कमी को नहीं भर सकेंगे। और धीरे-धीरे वह भी सूखने लगेंगे। 

 पानी के सूखने के बाद सूरज की रोशनी में जबरदस्त इजाफा होगा और हमारी धरती तब तक तपती रहेगी जब तक कि सारा का सारा हिस्सा रेगिस्तान में परिवर्तित नहीं हो जाता। पानी ना होने की वजह से तापमान में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। और सारे के सारे पेड़ पौधे सूखने लगेंगे। 

पेड़ पौधे सूखने के बजे से कई जीव खाने की कमी के वजेसे से धीरे धीरे मरने लगेंगे। इसके बाद एक भीषण भुकमरी का दौर शुरू हो सकता है।  भुखमरी और महामारी के कारण अब इंसानी बस्ती भी प्रभावित होना शुरू कर देंगे। अपने रोज़ मर्रा के जरूरतों को भी पूरा करपाना मुश्किल होता जायेगा। 

 पानी के अभाव में धीरे-धीरे इंसानी प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर आजायेगी, फिर पानी के नाम पर सुरु होगी एक भयंकर बिस्वा युद्ध। ताकतबर मुल्क छोटे छोटे मुल्क पर कब्ज़ा करेंगे पर ये जंग निसानी बस्ती का नमो निसान मिटा के रख देगा। 

क्या पता कभी हमारी ग्रह को दूसरे ग्रह के जीव यह देखने के लिए आये की पहले हमारी धरती पर जीबन कैसे हुआ करती थी। जैसे आज हम दूसरे ग्रहो के वारेमे जानने के लिए जाते हे। 

सूरज  की गर्मी बढ़ने के कारण पृथ्वी पर कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जेहरीले गैस बढ़ जायेंगे। पेड़ ना होने के वजेसे ऑक्सीजन की मात्रा ना के बराबर हो जायेगा। यहां तक कि ओजोन लेयर भी नष्ट हो जाएगा। ओजोन लेयर के नष्ट होने के साथ ही हमारी पृथ्वी पर जीवन की जो आखिरी उम्मीद होगी वह भी खत्म हो जाएगी। 

शायद इसीलिए जल को जीवन कहा जाता है। क्योंकि जल के बिना धरती पर जीवन कभी भी संभव ही नहीं हो पाता। तो दस्तो ये थी आज की हमारी पारी कल्पना आपको कैसा लगा जरूर बताइये। धन्य बाद। 

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कौन हे स्त्री ? क्या हे इसके पीछे का रहस्य ?

कौन हे स्त्री ? क्या हे इसके पीछे का रहस्य ?  

कौन हे स्त्री ? क्या हे इसके पीछे का रहस्य ?



1990 का दौर था जब बेंगलुरु भारत का आईटी हब नहीं हुआ करता था। तब बेंगलुरु के एक गांव में रात को आदमियों की अनजान तरीके से मौत होने लगी। कुछ दिन बाद इस गांव में ऐसी वारदातें बढ़ने लगी। और इसी के साथ बढ़ने लगी चुड़ैल की अफवाह। लोगों का मानना था कि एक चुड़ैल रात को दरवाजा खोलने को कहेगी और तुम्हारी किसी परिजन की आवाज निकालेगी। ताकि लोग दरवाजा जल्दी खोलें और परिजन भी ऐसा जो घर से बाहर का हो। और दरवाजा खोलने के बाद उस आदमी की मौत हो जाती थी। सब लोग परेशान हो चुके थे इसलिए लोगों की बढ़ती मौत को देखते हुए उनको किसी ने एक उपाय बताया। उपाय यह था कि सब लोग अपने दरवाजे पर नाले बा लिखले जिसका मतलब कन्नड़ में काल आना होता है। और वह चुड़ैल करती भी यही थी पहले तो वह दरवाजा खोलने को कहती थी लेकिन फिर नाले बा लिखा देख अगले दिन आती थी। और फिर अगले दिन दोबारा यह क्रम दोहराता रहता। कुछ दिन ऐसे ही चला लेकिन फिर जैसे बाकी अफवाहों का अंत हो जाता है वैसे यह बात भी शांत हो गई। लेकिन आज भी उस गांव के लोग उस चुड़ैल से बहुत डरते हैं। लेकिन यह बात आज तक नहीं खुली के इन लोगों को मारा ? और हर रात को कौन दरवाजा खोलने के लिए कहता था? इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आज बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में 1 अप्रैल को नलेबा दिवस मनाया जाता है। तमिलनाडु के आसपास भी ऐसी ही घटना के बारे में बातें होनी शुरू हुई। वहां पर भी ऐसी ही बात हुई कहा गया कि कोई चुड़ैल मर्दों को बुलाती है और उनका खून चूस उन्हें अपने साथ ले जाती है। या बात इतनी बढ़ गई कि लड़के अपने साथ लाठियां लेकर चलने लगे। हद तो तब हुई जब किसी ने यह कह दिया कि मंदिर की देवी का मंगलसूत्र टूट गया है। अब कलयुग खत्म होने वाला है। शहर और आसपास की सारी औरतें सुनार की दुकानों पर टूट पड़ी थी। अपने मंगलसूत्र नए बनवाने के लिए शहर में समान खत्म हो गया था। आस पड़ोस की जगह से मंगवाने पड़े थे मंगलसूत्र।तमिलनाडु की तरह यहां भी वही तरीका निकाला गया यानी दरवाजों और दीवारों पर वही बात लिखा गया लेकिन तेलुगु में। ऐसी और एक कहानी बिहार के छोटे-छोटे शहरों में भी फैली थी बूढ़ी औरत आती है प्याज मांगती है नहीं दो तो जान ले लेती है। इससे बचने के लिए लोगों ने घरों के बाहर वाले दरवाजे की दोनों तरफ हाथ के चिन्ह बनादिये। लोगों का मानना था ऐसा करने से उस आत्मा को रोका जा सकता है। ऐसे ढेर सारी घटनाएं भारत के कोने कोने में फैली हुई है। अब ये बस्तबिक है या फिर कोई अंधविश्वास ये एक बेहेस का विषय है।
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तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

 तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता ! 

तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !



तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। क्यों के अंधेरा होने पर ही रोशनी की जरूरत होती है। और कुछ बुरी सक्ती हमेशा रोशनी को मिटाने के चक्कर में होती है। तो में आप सबको आज ये बताऊंगा के कैसे एक रोशनी के दूत ने अंधेरे का साथ दिया और बन गया अधेरा का सबसे ताकतवर शहंशह। हम बात करेंगे लूसिफर के बारेमे। लूसिफर का जन्म स्वर्ग में हुआ था। खुद ईश्वर ने लुसीफेर को स्वर्ग लोक का सबसे कीमती पद प्रदान किया। देखते ही देखते वो स्वर्ग लोक का सबसे ताकतवर देवदूत बन गया। लुसिफर शब्द का अर्थ है सुबह का तारा। वो सभी देवदूतों मेसे अधिक ज्ञानी था। एक समय पे तो वो इस्वर का सबसे प्रिय देवदूत बन गया था। वो हर विषय पर अपना मंतव्य जरूर देता था ? हर एक उसकी बातों को सुनकर ये मानने लगे थे कि वह उन सब में से सबसे ज्ञानी है। सभी उसकी पूजा करने लगे।और उसे ईश्वर के समान मानने लगे। फिर इसी बात से लूसिफ़ेर में धीरे धीरे घमंड बढ़ने लगा। वो खुद को सबसे बड़ा मानने लगा। फिर भगवान ने जब जीसस को बनाया तो लुसिफर इसे देखकर हैरान था कि धीरे-धीरे कैसे सारे देवदूत जिसस के प्रति आकर्षित हुए जा रहे थे। बस यही बात उसे बैचैन करने लगी। और वह धीरे-धीरे अपना गुस्सा जाहिर करने लगा। एक बार ईश्वर ने जीसस के साथ स्वर्ग में किसी एक विषय पर चर्चा का आयोजन किया और उस चर्चा में सारे देव दुतो को निमंत्रण भेजा। लेकिन लुसिफर के आचरण के चलते ईश्वर ने लुसिफर को इस चर्चा में शामिल होने का निमंत्रण नहीं भेजा। इसके चलते लुसिफर बहुत ज्यादा गुस्सा हो गया। और ईश्वर से बगावत करने तक उतर आया। उसने ईश्वर के खिलाफ एक सम्मेलन का आयोजिन किया। उसके अपार शक्तियों के वजह से स्वर्ग लोगों के कई सारे देवदूत उसके आकर्षण में आकर सम्मोहन के शिकार हो गए। और उन सभी ने ईश्वर के बदले लुसिफर का साथ देना सही समझा। इसके चलते धीरे-धीरे स्वर्ग के एक तिहाई सदस्य लुसिफर के साथ हो गए। जब ईश्वर को इस बात का पता चला तो उन्होंने तुरंत ही लुसिफर को अपने पद से निष्कासित करते हुए उसे स्वर्ग से बाहर करने का फैसला लिया। और इसी के चलते लुसिफर और ईश्वर के बीच एक अनंत युद्ध की शुरुआत हो गई। लुसिफर जाते-जाते ईश्वर को यह चेतावनी देता गया कि वह ईश्वर के समस्त रचना को तब तक नष्ट करता रहेगा जब तक कि उनकी सारी रचना नष्ट ना हो जाए। ईश्वर ने लुसिफर के साथ-साथ उन सारे दोस्तों को भी स्वर्ग से निष्कासित कर दिया जिन्होंने लूसीफर का साथ देने का फैसला किया था। स्वर्ग से निकाले जाने पर लुसिफर ने तुरंत ही नर्क का यात्रा क्या। वहां उसने पापी आत्माओं को दंड भुगतते हुए देखा। और वहीं से उसने अपनी यात्रा की शुरुआत की। उस ने शपथ ली के वह ईश्वर के द्वारा रची गई अच्छी रूह को भी अपने शक्ति के बस में कर उनसे पाप करवा कर सभी को नर्क में कैद कर लेगा। हालांकि लुसिफर को कई लोग अच्छा भी बताते रहे हैं । लु सीफर के पास दो सफेद पंखे है।

जो देखने में देवदूत के समान है। क्योंकि लुसीफर पहले से ही एक देवदूत और ईश्वर का संतान हुआ करता था। वो हमेशा लोगों से बुरा काम नहीं करता है। वो लोगों को सम्मोहन करता है।लेकिन यह आखिरकार उस इंसान पर ही निर्भर करता है कि वह किस हद तक पाप करने को तत्पर है। लुसिफर को पाप का देवता भी माना गया है। क्योंकि लूसिफ़ेर अपनी शक्तियों से लोगों को सात प्रकार के पाप करवाने में समर्थ है। लूसीफर में एक अलग ही आकर्षण होता है। जिसे वह आम इंसान को अपने बस में तुरंत ही कर लेता है। लुसिफर नर्क के 8 राजाओं जितनी शक्तिशाली भी है। उसके पास नर्क के 8 राजाओं की शक्ति जोड़कर जितनी शक्ति होती है उतनी है। लुसिफर लोगों से जो पाप करवाता है उन्हें करवाने के लिए उसने अपने सात सेनापति को नियुक्त किया है। जो कि अपना काम बहुत ही अच्छेसे करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ईश्वर को प्रिय होने के कारण ईश्वर ने आज तक उसके गलतियों को माफ करते आएं है। पर अगर लूसिफ़ेर नहीं सुधरा तो ईश्वर उसे आखिर में दंड जरूर देंगे। अब इस बात में कितनी सच्चाई है क्या सच है क्या कहानी है इसे जान पाना तो संभव नहीं लेकिन मेरा यह जरूर मानना है कि अगर भगवान होते हैं तो उनके समान है शैतान जरूर होते हैं।

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भारत के कुछ ऐसे किल्ले जो अपने अंदर समाये हुए हैं कई राज़।

भारत के कुछ ऐसे किल्ले जो अपने अंदर समाये हुए हैं कई राज़।


हमारा देश भारत हमेशा से ही अद्भुत कला और संस्कृति का देश रहा है प्राचीन काल से ही भारत में कई महान राजाओं का जन्म हुआ जिन्होंने भारत की संस्कृति का प्रचार प्रसार करने का काम किया।महान राजाओं ने भारत में बहुत से बड़े बड़े किलों का निर्माण करवाया। इन किलों का इस्तेमाल संस्कृति और कला तक सीमित नहीं था। बल्कि वे यहां पे सेनापति जैसे महत्वपूर्ण लोगों को संरक्षण देते थे और इन किलों में युद्ध के हथियार समेत और भी जरूरी वस्तुएं रखी जाती थी। भारत में कई किले ऐसे ही बनाए गए जिनके निर्माण के पीछे कोई ना कोई रहस्य जरूर छिपा है । तो चलिए हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ ऐसे किलो के बारे में जो अपने आप में ही एक रहस्य है।

पहला है चुनारगढ़ का किला । चुनार गढ़ की धरती पर कई सारे तपस्वी ने तपस्या की है और यहां स्थित किला भारत के प्रमुख ऐतिहासिक विरासत और एक अनमोल धरोहर है। चुनार गढ़ किला इतिहास के पन्नों में एक महत्वपूर्ण स्थान है । क्यों कि ये किला लगभग 5000 साल पुराने इतिहास का साक्षी है। इस किले का निर्माण जिस पहाड़ी पर हुआ है वह पहाड़ी मानव चरण के आकार जैसी प्रतीत होती है ।और इसी वजह से इसका दूसरा नाम चरणद्री गढ़ भी है। ऐतिहासिक पर महाभारत काल कई शासकों से लेकर उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य और अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने राज किया और शासकों के बाद इसके लिए पर अकबर और शेर शाह सुरी जैसे मुगल बादशाहों ने शासन किया। इस किले कि लेकर कौन सारे रहस्य आज भी उजागर नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों द्वारा कहा जाता है किइस किले में एक योगी जी ने समाधि ली थी ।और उनकी अलौकिक आत्मा इस किले में घूमती है। चुनारगढ़ का किला भारत का सबसे ऊंचा किला है। और इस बात का प्रमाण इस के अद्भुत बनावट में मिलता है ।

दूसरा शनिवारवाड़ा किला। शनिवारवाड़ा किला भारत के सबसे डरावनी और रहस्यमई किलो में से एक है जो कि भारत के प्रमुख राज्य महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित है। इस किले का निर्माण 1746 में मराठा साम्राज्य को बुलंदियों पर ले जाने वाले पेशवा ने करवाया था। ये किला 1828 तक मराठों के अधिकार में रहा।और बेहतरीन कारीगरी को दर्शाता है। सन 1828 में इस किले में आग लग गई और इसका एक बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया और आग लगने का कारण आज भी एक रहस्य बना हुआ है। लेकिन यह बात यहीं तक नहीं रुकती क्योंकि बहुत से स्थानीय लोग बताते हैं कि इस किले से हर अमावस की रात एक दर्द भरी आवाज आती है और इस आवाज को आज भी यहां सुना जा सकता है। कई लोगों का कहना है कि इस किले मैं कोई आज भी बचाओ बचाओ की आवाज के साथ चीखता है। और यह एक ऐसे व्यक्ति की है जिसकी हत्या हो गई थी और हत्या के बाद उसके मृत शरीर को एक नदी में बहा दिया गया था । ऐसी मान्यता है कि बाजीराव की मृत्यु के बाद इस महल में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया था और ऐसी राजनीतिक दांवपेच और सत्ता के लालच में इस महल में महज 18 साल की उम्र में नारायण राव की हत्या कर दी गई थी कहते हैं कि उनकी आत्मा भी इस किले में मौजूद है।

तीसरा रोहतासगढ़ का किला। बिहार के रोहतास जिले में स्थित एक प्राचीन किला है। इस प्राचीन और मजबूत किला को अयोध्या के राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने करवाया था। यह बिहार के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से लगभग 55 और डेहरी आन सोन से 43 किलोमीटर की दूरी पर सूर्य नदी के बहाव वाले दिशा में एक पहाड़ी पर निर्मित है। ये किला समुद्र तल से करीब 15 मीटर ऊंचा है इसका इस्तेमाल युद्ध के दौरान चूपने के लिए किया जाता था। इसकी चारदीवारी का निर्माण शेरशाह सूरी ने किया था कई लोगों द्वारा कहा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर सिंह ने अंग्रेजो के खिलाफ स्वतंत्रता का पहला युद्ध इसी किले से लड़ा था। इस किले के वारेमे एक ऐसी कहानी प्रसिद्ध है जिसे जानकर आपकी रूह कांप जाएगी क्योंकि कई स्थानीय लोग द्वारा कहा जाता है के यहां के दीवारों से खून निकलता था। और अजीब सी आवाजें भी आती थी इसके पीछे का कारण आज भी अज्ञात है । कुछ स्थानीय लोगों के अनुसार कहा जाता है कि इसमें से भूत की आवाज भी आती है ।और ये आवाज बहुत ही शक्तिशाली है।

चोथा ग्वालियर का किला मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर ग्वालियर का प्रमुख स्मारक है। अकेला प्राचीन मध्य भारत के अद्भुत कारीगरी और शिल्प कार्य का बेजोड़ नमूना है । इतिहासकारों के मुताबिक इस किले का निर्माण बघेल शासक ने किया था पर किले पर बघेल राजाओं ने लगभग 1000 सालों तक राज किया। इस किले में कई ऐसी मूर्तियां स्थापित हैं जो की बहुत ही पुरानी और मूल्यवान है। साथ ही इस किले की दीवारों को बहुत ही रहस्यमय ढंग से बनाया गया है। और इन दीवारों पर बहुत ही कुशल कारीगरों द्वारा बहुत ही शादी हुई नक्काशी की गई है। यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसे आज तक कोई जीत नहीं पाया था । कई खोजकर्ता और इतिहासकार बताते हैं यहां ढेर सारा खजाना छिपा हुआ है। किले में ऐसी बहुत सी सुरंग हैं जो आज भी एक रहस्य बनी हुई है । क्योंकि इन सुरंगों का रास्ता कहां जाता है इसके बारे में अब तक कोई नहीं जानता । प्राचीन इतिहासकारों के मुताबिक इस किले का निर्माण बखेल वंश के शासकों द्वारा कराया गया था। किले से जुड़ी एक बात आज भी लोगों के मन में संशय पैदा करती है । वह बात है इस किले का निर्माण की अवधि । क्योंकि स्थानीय लोगों के अनुसार इस किले का निर्माण जिन के द्वारा एक रात में किया गया था। इसलिए लोग किले में जाने से डरते हैं। लोग बताते हैं कि ये किला बहुत ही रहस्यमय और जिन आज भी इसमें छुपे खजाने की रक्षा करते हैं। पर आज तक इस बात की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है के यह किला एक रात में बनाया गया है या नहीं।

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भानगढ़ एक अनसुलझा रहस्य

भानगढ़ एक अनसुलझा रहस्य



भानगढ़ एक ऐसी भूतिया जगह हे जिसका जिक्र बहुत सारी किताबों में हुआ है। पर असल मायने में क्या हकीकत है यह जान पाना बहुत ही मुश्किल है। कहते हैं कई सारे अतृप्त आत्मा है भानगढ़ के किले में जो रात को निकलती तो है पर कोई नहीं जानता कि सुबह होते ही वह कहां गायब हो जाते हैं। पर वहां पर रह रहे लोगों का अक्सर यह मानना है कि रात होते ही अजीब अजीब सी घटनाएं घटने की आहट सुनाई देती है उनको। यूं तो भानगढ़ में हजारों ऐसे किस्से आपको मिल जाएंगे जिन पर यकीन कर पाना वाकई में मुश्किल है । उन सब में से एक घटना मै आजआपको बताने जा रहा हूं।
धवन नाम का एक लड़का अपने कॉलेज के कैरियर से ही फिल्मों में अपना स्क्रिप्ट देने के लिए बहुत उत्साहित था। वह अक्सर भूतों के ऊपर कहानियां लिखा करता था। उसने बहुत सारे जगह पर इंटरव्यू दिया। तभी उसकी मुलाकात एक डायरेक्टर से हुई जिसने उसे भानगढ़ के ऊपर एक शॉर्ट फिल्म स्टोरी लिखने को कहा । उन्होंने धवन को भानगढ़ जाने को कहा और वहां कुछ दिन रेहेके इस विषय पर काम करने को कहा । 
अगले दिन सुबह ही धवन अपने चार दोस्तों के साथ एक टीम बनाकर भानगढ़ के लिए निकल पड़ा। वहां पहुंचने के बाद वह अपनी स्क्रिप्ट को लेकर काम करना शुरू कर देता है। वहां पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों से उसे ऐसी कई सारी कहानियों के बारे में पता चलता है जिसमें भूतिया बातों का जिक्र हुआ हो। अपने काम को लेकर धवन इतना सीरियस था कि उसने सोच लिया था कि वह इस साल का सबसे बढ़िया भूतिया डॉक्यूमेंट्री बनाएगा। इसके लिए बो भानगढ़ में एक रात गुजारना चाहता था। उसने अपने सारे दोस्तों को मना लिया और वहां जाने की तैयारी करने लगा। लेकिन वहां शाम ढलने के बाद भानगढ़ के अंदर जाना नामुमकिन था। उन्होंने कुछ पैसे देकर भानगढ़ के एक कर्मचारी को मना लिया और अपना सारा सामान लेकर भानगढ़ में छुप गए। जैसे ही भानगढ़ बंद हुआ वह अपने काम में लग गए। सर्दी के महीने में भानगढ़ का सन्नाटा किसी भी इंसान को अंदर से हिला डालने की ताकत रखती थी। धवन के साथ प्रीति, अर्जुन और विवेक थे जो उसके साथी थे। प्रीति तो उसकी मंगेतर थी। 

जैसे जैसे रात बढ़ता गया भानगढ़ का सन्नाटा और शोर करने लगा। मनो जैसे खामोशी अपने आप में चिल्ला चिल्ला कर यह कह रही है कि निकल जाओ यहां से। धवन ज्यादा देर ना करते हुए अपना काम शुरू कर देता है। अपने साथ लेकर के सारे कैमरों को अलग-अलग जगह पर फिक्स कर देता है। अब वो सब एक जगह बैठ कर कुछ होने का इंतजार करते हैं। करीब 3 घंटे बीत जाने के बाद करीब रात के 10:45 बजे एक शोर सुनाई देता है। इतनी रात को कौन चिल्ला सकता है ? और वो भी किले के अंदर ? यह सवाल सबके मन में था लेकिन आवाज सबको बराबर सुनाई दे रही थी। सबने अपने कैमरा उठाए और जहां से शोर आरहा था उस दिशा में चल पड़े। वो सब कुछ ही क़दम आगे बढ़े ही थे कि उनके सामने एक औरत भागते हुए रोते हुए आ रही थी। और सीधा इन्हीं चारों के सामने एके रुक गयी। धवन और उनके साथियों को इस बात का यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि कोई और उनके सामने उनकी ओर भागते हुए आ रही है। कुछ ही देर के अंदर बो औरत इनके पास आकर खड़ी हो गई। वह काफी ज्यादा परेशान दिख रही थी उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे

प्लीज मेरे पति को बचा लीजिए प्लीज कुछ कीजिए वरना वो भूतनी इन्हें मार डालेगी। प्लीज मेरी मदद करो। धवन और उनके साथियों को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उनके अलावा किले में और कोई नहीं था। तो फिर ये औरत कहां से आई। यह कोई चुड़ैल या फिर प्रेतात्मा तो नहीं ! इसके बारे में सुबह गांव वाले धवन को बता रहे थे। गांव वालों ने धवन को कहा था कि कीले में ऐसे कई सारी प्रेत आत्मा है जो अनजान लोगों को परेशान करने के लिए किसी का भी रूप लेकर उनके सामने आ जाते हैं। और देखते ही देखते उन्हें मार डालते हैं। धवन ने पूरी सावधानी से उस औरत से पूछा 

कौन हो तुम ? और इतनी अंधेरी रात में अकेले ही इस कीले में क्या कर रही हो? पहले तुम यह बताओ कि तुम कीले के अंदर कैसे अयी ? इस पर प्रीति धवन की ओर देखकर यहां से निकलने को कहती है। पर वो औरत धवन के पैर पड़ जाती है। प्लीज मेरे पति को बचालो वो आत्माओं के चंगुल में फंस गए हैं। अगर हम वहां पर नहीं पहुंचे तो बो सब उन्हें मार डालेंगे। धवन को उस औरत की बात पर यकीन आ गया। उसने प्रीति को समझाकर उस औरत की मदद करने के लिए मना लिया। धवन को इसमें अपना ही फायदा नजर आ रहा था।वह इस औरत का इस्तेमाल अपने डॉक्यूमेंट्री पर करना चाहता था। पर अब सवाल यह था कि उसके पति को  ढूंढे कहां ? 

इसीलिए धवन ने प्रीति और अर्जुन को उस औरत के साथ किले की बाएं और भेजो। और खुद विवेक के साथ दाएं और गया । कुछ देर चलने के बाद धवन को एक आदमी दिखा जो एक कोने में छुप कर बैठा हुआ नजर आया। धवन को लगा कि शायद यह वही आदमी है जो आत्माओं के चंगुल में फंस गया था। उनसे बचने के लिए अब वह यहां आकर छुप कर बैठ गया है। धवन तुरंत ही उसके पास जाता है और उसे सारी बातें पूछता है। वो आदमी जैसे ही धवन और विवेक को देखा तो बोल पड़ा 

प्लीज मुझे बचा लो या आत्माएं मुझे मार डालेंगे मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। जो मैं रात को यहां पर रुका। मुझे मेरी बीवी की बात नहीं माननी चाहिए थी लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है प्लीज मुझे यहां से निकाल दीजिए। में यहांसे निकलने का और एक रास्ता जनता हूँ। यह सब बोलते बोलते उस आदमी की आंखों से आंसू गिरने लगे।
तुम्हें कुछ नहीं होगा हमने तुम्हें ढूंढ लिया है अब हम तुम्हें तुम्हारे पत्नी के पास ले चलेंगे। 
पत्नी !
वह तो मर चुकी है। आत्माओं ने मेरी पत्नी को मार डाला और वह मुझे भी जिंदा नहीं छोड़ेंगे। मैं बड़ी मुश्किल से यहां पर उन सब से छुपा कर बैठ गया था। अच्छा हुआ जो आप लोग मुझे मिल गए हमें यहां से तुरंत निकलना चाहिए नहीं तो वह आत्मा  हमें मार डालेंगे। 

यह क्या बोल रहे हो तुम तुम्हारी बीवी तो हमारे पास आई थी तुम्हारी जान बचाने के लिए हम से मिन्नतें कर रही थी। विवेक ने बड़े ही आश्चर्य होकर उस आदमी से इस सवाल किया।
हे भगवान इसका मतलब वह आत्माएं  आपके पास भी पहुंच गई है। यहां पर आप किसी पर भी भरोसा मत करिए वह आत्माएं किसी का भी रूप लेकर हमारे सामने आ सकती है। और हमें अपनी बातों से बहला-फुसलाकर हमारी जान ले लेते हैं। यह सब सुनके धवन के होस उड़ गए थे। आखिर अगर वह औरत एक भूत है तो फिर प्रीति और अर्जुन की जान खतरे में थी क्योंकि वह दोनों उस औरत के साथ ही गए थे। धवन ने तुरंत ही प्रीति को फोन लगाया। प्रीती और अर्जुन दोनों का फोन स्विच ऑफ आ रहा था। धवन ने उस आदमी को वहीं पर बैठने के लिए कहा वह अपने बाकी साथियों को लेकर उस आदमी के पास वापस लौटेगा ऐसा कहकर धवन तुरंत ही प्रीति और अर्जुन को ढूंढने निकल गया ।

वह दोनों उसे एक किले के एक छोटे से टूटे हुए कमरे में मिले। धवन को परेशान देखकर प्रीती बोल पड़ी की क्या बात है तुम दोनों इतने घबराए हुए क्यों  सच में भूत देख लिया क्या? 
जल्दी निकलो यहां से वह औरत जो हमारे साथ आई थी वो जरासर एक भूतनी है।  वह हमें फंसा रही है। यह क्या कह रहे हो तुम ? हमें उसका पति ऊपर मिला था वह बता रहा था कि उसकी पत्नी को भूतों ने मार डाला है। यानी कि हमारे पास जो औरत आई थी वो कोई और नहीं बल्कि एक भूतनी थी। तभी वह औरत सबके सामने आकर खड़ी हो गई। उसे देख कर धवन बोलने लगा यह वह भूतनी हे जो हमारे सामने खड़ी है। ये क्या बोल रहे हो आप मैं भूतनी नहीं हूं मैं यहां पर अपने पति के साथ एक घूमने आई थी। बस मेरे सामने ही उन्होंने मेरे पति पर हमला कर दिया। में जैसे तैसे जिंदा बच के यहां तक आपकी मदद के लिए आई। 

झूठ मत बोलो हमें तुम्हारा पति ऊपर मिला था वह बोल रहा था कि भूतो  ने उसकी पत्नी को यानी कि तुम्हें मार दिया है। तभी प्रीती बोली जो इंसान मर चुकी है वो हमारे सामने कैसे खड़ी हो सकती है?
यह सुनने के बाद वो औरत बहुत जोर जोर से हंसने लगी  ।

तो आखिरकार तुम्हें मेरी सच्चाई के बारे में पता चल ही गया।  मैं सच में एक भूतनी हूं और ऊपर जो मिला था वह मेरा पति ही था। पर अफसोस की बात अब तुम सब यहां से जिंदा बचकर वापस नहीं जा पाओगे। यह सुनकर धवन, प्रीति, अर्जुन और विवेक उसके पति के पास भागे। क्योंकि उसके पति को वहां से बाहर निकलने का रास्ता पता था। वो सब भागने के लिए ऊपर की ओर तोड़े जहां पर उसका पति बैठा हुआ था। सब लोग वहां पर पहुंचने के बाद भगवान ने सब को आगे बढ़ने को कहा। तुम कहां जा रहे हो धवन? प्रीति ने धवन से पूछा । तुम सब चलो मैं बस अपना कैमरा लेकर पहुंचता हूँ। 

 यह कहते हुए धवन जैसे ही उस कमरे में पहुंचा जहां पर उसने अपने सारे कंपनी लैपटॉप और कैमरा सेट किए हुए थे। उसने देखा कि कमरे के अंदर प्रीति और अर्जुन की लाश पड़ी हुई थी। उसे अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था। अगर यह दोनों यहां पर मर चुकी है तो फिर जो मेरे साथ थे वह कौन थे। जिंदगी में पहली बार धवन ने वास्तविक में किसी भूत को देखा था। उसे अब यकीन हो चला था कि आज की रात उसके लिए आखिरी रात है। फिर भी उसने अपने सारे डाक्यूमेंट्स उठाएं और वहां से निकलने के लिए निकल पड़ा। जैसे ही वो पीछे के रास्ते पर किले से बाहर निकलने के लिए क्या तो सारे के सारे फूल उसे मारने के लिए उसके पीछे पड़ गए। धवन के पास और कोई चारा नहीं था उसने एक पत्थर के नीचे छुपने का फैसला किया क्योंकि वह जानता था कि वह एक साथ इतने सारे भूतो से बच नहीं सकता। सुबह होने का इंतजार करने के अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं था। धवन पत्थर के नीचे छुपा आपने मौत का इंतजार कर ही रहा था कि तभी उसके फोन पर अचानक प्रीति का कॉल आया। धवन तुम जहां पर भी हो तुरंत पीछे वाले दरवाजे पर पहुंचो।

 धवन जान चुका था यह प्रीति नहीं बल्कि ये उसका भूत है। धवन ने पति से कहा तुम चाहे कितनी भी कोशिश कर लो मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला। प्रति रो रो के बोलने लगी हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है धवन। हां यह सच है कि मैं अर्जुन और विवेक मर चुके हैं । पर हम तुम्हें यहां से जिंदा निकालेंगे मुझ पर यकीन करो और वहां से पीछे के दरवाजे की ओर भागे। हम ज्यादा देर तक इन आत्माओं को रोक नहीं पाएंगे। धवन की आंखों से आंसू निकल आए। वह जानता था कि प्रीति उसे कभी भी झूठ बोल नहीं सकती। उसने हिम्मत जूता कर पीछे के दरवाजे की ओर भागना शुरू किया। उसने देखा कि प्रीति अर्जुन और विवेक उसकी बाकी भूतों से रक्षा कर रहे हैं। मरने के बाद भी उन तीनों ने अपनी दोस्ती का फर्ज अदा किया। धवन आखिरकार किल्ले के आखिरी दरवाजे से बाहर निकल आया। और जब वापस मुड़कर देखा तो दूर खड़ी प्रीती, अर्जुन और विवेक उसे हाथ हिला रहे थे। और वह पति पत्नी उसे दोबारा उस किले के अंदर बुला रहे थे। अपनी इच्छाओं को पूरा करते चले धवन ने अपने तीन सबसे करीबी दोस्त को खो दिया था। 

एक महीन के बाद जब धवन डायरेक्टर से मिलने आया तो उसने सारी बातें बताई। इसपर डायरेक्टर हस्ते हुए बोला :- इतना भी कहानी में घुसने की जरूरत नहीं है। भूत आम इंसान को नहीं दिखाई देते । लगता है बाहोत थक गए हो। मैने नीचे रिसेप्शन में एक चैक दिया है तुम्हारे नाम का ले जाना। धवन को पता था उसने जो देखा उसपे कोई यकीन नहीं करेगा। वो वहां से चुप चाप चला गया। नीचे जाकर देखा तो रिसेप्शन पे कोई नहीं था। बाहर बैठे चौकीदार से पूछा तो उसने कहा :- अरे जब डायरेक्टर साहब ही नहीं रहे तो फिर रिसेप्शन पर कोन होगा ?
क्या ? डायरेक्टर साहब?
हैं पिछले रात को ही उनकी मृत्यु हुई है।

वैसे भी ये भूत प्रेत आम इंसान को दिखते कहां है ?

आपका दिन शुभ हो।


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बुराई के बदले अच्छाई,कितना सम्भब ?

बुरे के साथ अच्छा और अच्छे के साथ बुरा क्यों होता हे ? 

बुराई के बदले अच्छाई,कितना सम्भब ?



जिंदगी में आपको काईन बार ऐसा लगा होगा के मेरे ही साथ क्यों बुरा हुआ ? हेना जबकि असल में इस दुनिया में किसीके साथ बुरा नेही होता। परिस्तिथि हमे परखते हे। हमने खुस रहने का अपना ही एक अलग परिभासा बना लिया हे। इंसान ही एक ऐसा प्राणी हे जो अपने से किसी और को श्रेष्ठ नहीं मानता। हलाकि इस संसार में जनमे हर प्राणी अपने आप में ही श्रेष्ठ होते हैं। आज हम एक अनोखे कहानी के जरिये इस पुरे बकिये को समझ ने की कोशिश करेंगे। inspirational short stories about life

एक गाऊँ में सरत चंद्र नामके एक लेखक रहते थे। किताबे ही उनकी जीबन का आदर्श थे। परिबार में अक्सर इसी किताबी प्रेम के चलते उनको बाद बिबाद का भी सामना करना पड़ता था। फिर भी उनकी किताबों के प्रति कभी प्रेम में अंतर नहीं आया। सरत चंद्र जी के परिबार में उनकी एक बूढी माँ और उनके पत्नी के समेत दो बेटिया भी थी। सरत जी जितना भी लिखते पर अंत में  उनके जरूरत के आगे कम पड़ जाते। पर किताबों उन्हें गाऊँ का एक ज्ञानी ब्यक्ति का दर्जा दिलवाया था। सायद एहि वजह रही होगी के उन्होंने अपने ऊपर उठ रहे हर बाद बिबाद को नजर अंदाज कर जाते थे। स्वभाब में बड़े ही सरल थे सरत जी। पर पैसों की कमी के चलते उन्हें  काईन बार उधार में सामान लाना  पड़ जाता था। अपने सरल और सांत स्वभाब के चलते सरत जी को हर कोई पसंद करता था। पर कभी कभी उन्हें गाऊँ के गवार किराने वाले से अपने उधारी को लेके कुछ कटाक्षय सुनने को मिल जाते। लेखक जी को फुरसत मेले तो साहित्य में आलोचना भी अक्सर किया करते हे। inspirational short stories about life

सरत जी की पत्नी प्रतिभा देबि, उनके बारेमे आपको क्या कहें ? सरत जी की जीबन की प्रेरणा  रही हे वो। हलाकि परिबार में अनबन तो होती ही रहती हे पर ईंटे तकलीफ में भी सरत जी को अकेला नहीं छोड़ी। गाओं के स्कूल में पढ़ा ती थी। और घर का पूरा दारो मदार उनपे ही था। परिबार को परिबार बनाये रखने  ही योग दान रहा हे। परिबार में अनुसासन कैसेबनि रहे प्रतिभा जी इसपे काफी अनुध्यान करते थे। inspirational short stories about life

वहीँ दूसरी तरफ अपने गाऊँ के बड़े ब्यापारी के  तोर पे गोविन्द सेठ काफी मशहूर था। उसके बचे सरत  के साथ पढ़ते थे। काफी पैसे होने के वजेसे गोविन्द सेठ इंसानो की कदर नहीं  करते थे। दुसरो को अपने छल  कर अपने ब्यापार को बढ़ाया था उन्होंने। सायद ही कोई गाओं में होगा जिसक गोविन्द सेठ ने परेशान  हो। अपने परिबार के अलावा उसके लिए कोई भी मायने नहीं  रखता था। उसके बिपरीत अपने अभाब के वाबजुत सरत जी अपने से कमजोर की बहत मदत करते थे। एक दिन सरत के बड़े बेटो को बुखार हुआ। बुखार बढ़ता ही चला गया। पैसों के कमी के चलते प्रतिभा  को अपने गेहेने बेचने पड़े। उनका बेटा ठीक होगया। पर घर की माली हालत बहत ही बिगड़ गयी। वहीँ दूसरी और गोविन्द सेठ अपने कारोबार में ऊपर उठता ही गया। पर सरत जी  अभी भी दूसरों की मदत करते रहते थे। उनसे  पड़ता वो करते। एक दिन सरत जी के घर गोविन्द सेठ आए। उनकी नजर सरत जी के छोटीसी जमीं पर थी। पर इतने आर्थिक तंगी के वाबजुत सरत जी ने जमीन का सौदा करने से मना करदिया। और ये बात गोविन्द सेठ को खल गयी। एक रात उसने सरत जी के फसल में आग लगा दिया। सारा फसल गया।  वो फसल उनके आम  दानी का एक अहम् स्रोत था। ये बात सुन के सरत जी के  मा को इतना सदमा लगा के वो  चल बसी। परिबार की माली हालत और निचे गिर गयी। inspirational short stories about life

सब जानते थे ये काम किसने किया हे। पर किसीने भी गोविन्द सेठ के खिलाप सरत जी का साथ नहीं दिया। अंत में सरत जी ने अकेले ही उसके खिलाफ मोर्चा निकला। पर उससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ। परिबार के प्रति वो  जिम्मेदारी निभा नहीं सके। आखिर कार प्रतिभा उन्हें छोड़के चली गयी। उस हादसे को अब  दस  साल बीत चुके हे। जीबन ने उन्हें कभी कुछ नहीं दिया। बल्कि जो भी कुछ था वो भी उनसे चीन लिया ? सरत बाबू अपने घर में अकेले रह गए। अपने बचो से दूर।बच्चे कभी मिलने नहीं आए उनसे आज उनके पास खोने को कुछ नहीं हे ? गोविन्द सेठ आज भी अपने परिबार के साथ खुस हे ? और सरत बाबू किताबों के पनो में उलझी हुई उनके कुछ सवालों मेसे एक सवाल का जवाब आज भी ढूंढ़ते हुए  : - 

        बुरे के साथ अच्छा और अच्छे के साथ बुरा क्यों होता हे ?

लेखक के बिचार : -

इस पुरे कहानी में आप को गोविन्द सेठ बुरा और सरत बाबू सही लगे होंगे पर कहानी का एक दूसरा पेहलु भी हे। सरत जी ने कभी भी सचाई को परखने की कोसिस नहीं की। उन्होंने हमेसा परिस्तिथि के साथ बह चलना चाहा। अपने परिबार के प्रति अपने  जिम्मेदारिओं को पूरी तरा निभा न सके। प्रतिवा देबि एक औरत होते हुए भी परिबार के लिए परिश्रम करती रही। दुसरो के मदत करना उचित हे। पर अपने उपर आश्रित अपने परिबार को अलग करलेना ये भी उचित नहीं। परिबार का मुखिया होने का दर्जा वो खोचुके थे। तर्क का बिसाये अब ये नहीं के कौन सही या फिर कौन गलत ? पर सच ये भी हे के हम खुद हमारे परिस्थितिओं के लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार होतें हे। inspirational short stories about life

ये एक बिचार मात्र हे। कृपया comment bx में आप अपने बिचार देना मत भूलिए

कुलकत होगी अगले भाग में। inspirational short stories about life






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