• The Secret Of The Nagas (Shiva Trilogy-2)

    This is the second novel in the trilogy on Shiva by Amish Tripathy. The book ‘Nagaon Ka Rahasya’ is the Hindi version of the book originally written in English ‘Secrets of Nagas’.

  • Satyayoddha Kalki: Eye of Brahma

    After a defeat at the hands of Lord Kali, Kalki Hari must journey towards the mahendragiri mountains with his companions to finally become the avatar he is destined to be.

  • The Immortals of Meluha

    जब बुराई एक महाकाय रूप धारण कर लेती है, जब ऐसा प्रतीत होता है कि सबकुछ लुप्त हो चुका है, जब आपके शत्रु विजय प्राप्त कर लेंगे, तब एक महानायक अवतरित होगा।

  • तो कौन हे लूसिफर ? एक दानव या एक देवता !

    तो दोस्तो जैसा की आप सबको पता होगा की इस दुनिया में इंसान और बुरी आत्माएं दिनों ही बास करती है। क्यों के अंधेरा होने पर ही रोशनी की जरूरत होती है। और कुछ बुरी सक्ती हमेशा रोशनी को मिटाने के चक्कर में होती है। तो में आप सबको आज ये बताऊंगा के कैसे एक रोशनी के दूत ने अंधेरे का साथ दिया और बन गया अधेरा का सबसे ताकतवर शहंशह.

  • जब एक प्रेत आत्मा ने केहेर ढाया - अंतिम भाग

    वो आत्मा अपने बदले के चकर में इधर उधर घूम रहीथी। कैसे भी करके मुखिया जी का कबच हटे और वो अपना इन्तेक़ाम ले सके। उधर मुखिया जी के बुलाने पर उनके दोनों बेटे अपने अपने परिबार के साथ हवेली में आ पहंचे। बड़े बेटे की एक बेटी और छोटे बेटे की दो बेटे थे। आगे जानने के लिए यहाँ click करे.

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दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 5

 प्यार भरी दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 5 emotional love story in hindi

दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 5

रवाजे पे ध्रुब को देखते ही में सोचने लगी के, मेने जो आवाज़ सुनी थी अंदर क्या वो  मेरा बेहेम था। पर ऐसा केसे हो सकता हे? अब ये फिरसे केसी सवालों की गुथी आके मेरे सामने खड़ी होगाई थी। गेहेरी होती  हुई दोस्ती में फिर ये केसा भूचाल आगया। चंद घंटो के मुलाकात के बाद में ऐसे कैसे दावा कर सकती हूँ के कोई इंसान बिलकुल सच्चा और अच्छा होगा। कहीं में ध्रुब को पेहेचान ने में गलती तो नहीं रही ? या जो सब मेने अभी अभी सुना वो सब एक धोका था। ऐसे काईन अनगिनत सवालों से घिरा में जब अपने अंदर डूबा जा रहा था तब ध्रुब की आवाज़ आयी "अरे बानी तुम ?क्या कुछ काम हे ?" emotional love story in hindi

सवालों का जबाब में सवालों से नहीं देना चाहाती थी। मेने हस के जबाब दिया के " मेरे पास तुम्हारा रुमाल रह गया था। वही लौटने आयी थी। "मेने रुमाल लौटा ते वक़्त अंदर थोड़ा झाँकने की कोसिश की पर साफ साफ कुछ देख पाना मुमकिन नहीं हुआ। फिर ध्रुब को गुड नाईट बोलके में अपने फ्लैट में बापस आगयी।ध्रुब ने मुझे देख कर एक अछि स्माइल दी।  मन में सवालों के ढेर लेके लोट आयी। मेरे पास अब दो ही रास्ते थे। या तो में ध्रुब के ऊपर भरोसा करलूं या फिर पूरी खोज बिन करूँ। अपने कस्मकस में मेने पेहेले वाले को चुना। सायद में कुछ ज्यादा ही रिएक्ट कर गयी थी। लोगों से पराया पन का एहसास लेते लेते अपनों को ही गलत समझने लग गयी थी। खेर जो भी हो में अब धीरे धीरे ध्रुब के सादगी की और ढलने लगीथी। अच्छा लगने लगा था वो। दिन भर की थकाबट दूर होगयी उसकी स्माइल देख के। जी हाँ प्यार करने लगी थी में ध्रुब से। प्यार क्या हे कैसा हे इसके ऊपर कोई आईडिया नहीं था। फिर भी  प्यार का परिक्षया  देने के लिए तैयार हो गयी थी में। समये बीतता चला गया, और देखते ही देखते 6  महीने गुजर गए। emotional love story in hindi

                                                              "6  महीने बाद "

 गुजरते वक़्त के साथ हमारा रिस्ता धीरे धीरे और भी करीब आता गया। उसदिन के बाद कभी  किसी लड़की की आवाज़ नेही आयी। सायद मेरा बेहेम ही था। आज में और ध्रुब एक दूसरे के काफी करीब आ चुके थे। में धीरे धीरे ध्रुब को जानने लगी थी। काईन बार वो अपने किसी दोस्त के वारेमे  जिक्र करता था वो जो अब इस  दुनिया में नहीं हे। पल्लबी था उसका नाम। बहोत ही अछि दोस्ती थी दोनों में। जब भी वो उसकी बाते करता आसमानो में तारों की और इशारे करता हुआ केहता "क्या वाकई में हमारे दोस्त हमे छोड़  के ऐसे जा सकते हे? आने के टाइम साथ नहीं आ सके पर जाने के टाइम कमसेकम साथ में तो जा  सकते हे ना ?" मेरे आंखे भर आती। में उन्ही सितरों को देख के उसे बोलती के हमारे दोस्त कहीं भी हो हमसे मिलने जरूर आते हे। पल्लबी भी तुमसे मिलने जरूर आएगी। सच्ची दोस्ती पे एतबार रखो। एक दोस्त अपने दोस्त को कभी अकेला नहीं छोड़ता। पर कास ये मुमकिन हो पाता। कास पल्लबी आके एक दफा मिल जाती उससे। धीरे धीरे मेरे और ध्रुब की कहानी आगे बढ़ी। हम दोनों ने एक दूसरे के घर में एक दूसरे के वारेमे बताया।  हमारे सादी को लेके सब राजी भी होगये। तिथि और अपूर्बा भी रिश्ते को लेके काफी खुस थे। देखते देखते में एक छोटो सेहर की लड़की  आज अपने सबसे बड़े सपने के बहोत करीब थी। जिसे प्यार की उसीसे सादी भी कर रही हूँ इस्से बड़ी बात और क्या हो सकती हे। ध्रुब के परिबार वाले भी मुझे देख के सादी की तारीख तय करके चले गए। सादी की तारीख तय होने के बाद में वापस मुंबई आगयी। सादी को अभी 2 महीने और बाकि थे। तिथि अपने घर गयी थी। में अपने फ्लैट पे अकेली थी। अपने सपनो को सच होता हुआ देख अपने पुराने यादों के साथ खो गयी। थोड़ी देर बीस्तर में लेटी ही थी के अचानक डोर बेल बजा। इस वक़्त कौन होगा ? थकावट से चूर होक मेने दरवाजा खला तो देखा के सोसाइटी के सेक्रेटरी साहब थे। emotional love story in hindi


बानी तुम्हारे लिए कोई एक लेटर आया हे। ये कह कर उन्होंने मुझे एक लेटर थमा दिया। अजीब बात हे , इस इंटरनेट के ज़माने में लेटर कोन लिखता हे। लेटर सील था  खोला तो देखा के उसमे लिखा था की तुम्हारी जो भी ख्वाइश थी वो जरूर पूरी होगी। मुझे लगा सायद पिछली  बार जब में और ध्रुब मिलथे तब मेने अपनी कुछ छोटी  छोटी ख्वाइशें जाहिर की थी सायद ये साहब उसी बात का जबाब आज लेटर भेज के दे रहें हे। चिठ्ठी पढ़ के मुझे बहोत ही ज्यादा खुसी मिली। पर एक अजीब बात थी उस चिठ्ठी में। उसमे ध्रुब का एड्रेस तो था पैर ध्रुब का नाम  नहीं था। खेर मुझे तो अपने सपनो के दुनिया में घर भी मिल गयी थी। पर आने वाले कल को देख पाना इंसान के बस में कहां ? emotional love story in hindi

में अपने आने वाले सपनो के साथ एक अलग  ही दुनिया में थी। घरसे अये  हुए मेहज दो दिन हुए थे। तभी ध्रुब का फ़ोन आया। तो मैंने लेटर के वारे मे पूछ ही लिया। पर अजीब  बात  थी ध्रुब  ने साफ साफ मना करदिया के  कोई भी लेटर मुझे नहीं भेजा हे। तो फिर ये लेटर किसने भेजा होगा ? मैंने तिथि से भी बात की पर उसने भी मना  करदिया। अजिब बात हे किसी ने भी इस लेटर को नहीं भेजा। पर उस वक़्त में अपने सादी वाले माहौल को ख़राब करना नहीं चाहती थी। चाँद  दिन ही  बाकि रह गए थे मेरे सादी को। माँ और पिताजी का रोज फोन आता था के घर कब आना हे। में वाकई में  खुस थी। देखते ही देखते मेरे घर जाने का टिकट भी बुक होगया अगले दिन मेरी ट्रैन थी। में सोने ही जा रही थी के तभी अचानक मेरे मोबाइल की घंटी बजी एक नए नंबर से कॉल आया।

हेलो कौन ? .........
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 काहानी का अगला और अंतिम भाग जल्द ही आपके सामने होगा।

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दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 4

emotional love story in hindi - प्यार भरी दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 4 rdhindistories

दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 4




"ये कहा गया हे , लिखा हुआ हे के जोड़े आसमान में बनते हे। हर इंसान का कहीं  ना कहीं कोई ना कोई साथी इस दुनिआ में हे। और जब  वो मिलते हैं, तो कायनात में  गीत गूंज ते हे। उसने भी तब इस बात पे यकीन किया जब उसने उसे देखा, पहली बार। "emotional love story in hindi

"लगता हे हवाओं से कूछ गेहरा नाता हे आपका। "
 ये आवाज़ पिछेसे आयी थी। और आवाज़ में वो कशिश नहीं थी जो मेरे नजरों को मजबूर कर सके एक दफा पीछे मूड ने के लिए। बेहरहाल मेने नज़र अंदाज़ करना ही सही समझा। 

"तो अब आपके आंखे कैसी हैं"? emotional love story in hindi
 ये सवाल अपने आप में ही एक बड़ा जवाब था, मेरे उन अनगिनत सवालों का। मेने नजाने कितने सवालों के साथ अपने पास में खडे उस सक्ख्स को देखा। आखिर कौन हो तुम जेहन से ये सवाल निकले इससे पहले ही वो अंजनसा लगने वाला सक्ख्स बोल उठा -" जी माफ़ करियेगा कल आपके आँखों में कचरा गिरा था तो मेने ही पानी लाने के लिए आपको इन्तेजार करवाके पानी लाने गया था। वापस आके देखा तो आप वहां थी नेही। तो अब आपकी आंखे कैसी हैं ?" emotional love story in hindi

बिलकुल वही आवाज थी  कानो में जो कलसे गूंज रहीथी। आपका सुक्रिया कैसे अदा करूँ ? ये केहने  के साथ ही में थोड़ा खुद को असहज मेहसूस किया, आखिर कार वो मेरे सामने था। आप को याहाँ देखा तो सोचा के आपसे आपके हाल के वारेमे पूछ लूँ के......... बात को बिच में ही रोकते हुए में बोल बैठी - आप अचानक यहाँ कैसे ? मेने अक्सर काईन लड़को को लड़कियों का पीछा करते हुए देखा हे। कहीं आप भी उन्हीमेंसे नहीं हे तो?
जी नेही ऐसा कुछ नहीं हे , बात जरासल ये थी के......... तभी अचानक पिछेसे अपूर्वा ने आके वोला, अजी अब क्या होगया हमारे साहब को ? बोल रहेथे हम तो गाड़ी में बैठेंगे हमारा मन नहीं करता के हम जाये। और यहाँ हम से चुप के बाते की जारही हे। अपूर्वा के ये सब्द से हम दोनो थोडेसे असहज हो उठे। ऐसे परिस्तिथि में आप वहां से पीछे नहीं हट सकते, हे ना ? emotional love story in hindi

 हालत को थोडासा नोरमल रखने के लिए मेने थोडासा मुस्कुरादिया। तिथि को बी अब ये बात समझ में आने लगती के मेरे ये मुस्कराहट वे वजह तो नहीं होसकते। मेने काईन बार अपने ज़ज़्बातों को बेआबरू होने से रोकने की कोशिश की पर नाकाम होती गयी। वैसे अपूर्वा तुमने अपने दोस्त का नाम नहीं बताया हमे, तिथि के ये सवाल थोडे पल की  खामोसी के साथ आईथी। ख़ामोशी को तोड़ते हुए अपूर्वा कुछ बोले इससे पहले किसी और की आवाज़ ने हमारा ध्यान अपने और खींच लिया। emotional love story in hindi

"मेरा नाम ध्रुव हे , फिर कुछ देर की खामोसी। शुक्र हे इन समुद्री हवाओं का जो बेमतलब ही खामोसिओं को तोड़े जारही थी। लगा  जैसे ये  हवाएं ही थी जो सारे सवालों के जवाब जानती थी। ये शुरुआत थी एक सफर की जिससे नाहीं मेने और नाहीं ध्रुव ने सुरु किया था। ये अब मायने नहीं रखता था के ये सफर कैसे सुरु हुआ ,बस सुरु होना ही सब कुछ था। अजीबसी एक बुदबुदाहट कानो के पास सुनाई दे रहीथी मुझे ,गौरसे सुनने पर यकीं हुआ के ये आवाज़ तो मेरे अंदर चल रहे लाखों करोडो अजीबसी एहसासों की थी। इन्हे जैसे मानो किसीने मेरे खिलाप बगाबत करने की पेशकस करदी हो। मेरे ही जज़्बात मेरे ही आपे से बाहार थी। ऐसे में अपूर्वा ने बातों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए कहीं खाने जाने का प्लान बनाया। अब धीरे धीरे हैं हम चारों की दोस्ती होने लगीथी। सच कहूं तो मेरे दील में ध्रुब क लेके अनगिनत सवाल उठ रहेथे। ऐसे सेहर जहाँ दो पल रुकने का भी समाये नहीं होता लोगों के पास, बहां किसीके मदत करना वो भी बिना जान पेहचान के ? सबलों से घिरी इस माहौल में दो पल दील की सुन लेती हूँ। आखिर वक़्त हे मेरे पास सवालों के लिए। पैर सायद ये पल कल को ठहरेंगे  नहीं। emotional love story in hindi

हम सब पास में हि एक रेसुरांत में खाना खाने जातें हे। दोस्ती के नए आयाम भी बनने लगतें हे बीते वक़्त के साथ। आखिर यहाँ क्यों आना हुआ ? मेने धीरेसे डाइनिंग टेबल में अपनी पेहली  छोटी मगर मोटी  सवाल पेश करदी। emotional love story in hindi

जरासल में और अपूर्बा दोनों बचपन के दोस्त हे। और अपूर्बा  के पापा एक मल्टी नेशनल कंपनी मे काम करतें हे। और मेरे पिताजी का भी अपना बिज़नेस हैं। और ग्रेजुएशन के बाद अपने पेरो पे खड़े होने के लिए हम मुंबई आए। मुंबई में बैचलर्स को घर मिलना बेहत मुश्किल हे , पर हमने किसी तरा ये फ्लैट किराये पे ले लिया। बातोसे तो ध्रुब बहोत ही सांत स्वभाब का लड़का लग राहाता। फिर धीरे धीरे सवाल जबाबों का सिलसिला चलता रहा।
तिथि ने सवालों के सिलसिले को रोकते हुए खाने की मेनू को मुझे थमा दिया। कुछ ही देर में हम सब खाने में मसगुल हो उठे। खाने के बाद मुंबई घूमने का दौर सुरु हुआ, दोस्ती का आलम कुछ ऐसा जमा के वक़्त का ध्यान ही नहीं रहा। रात के ११ बजे हम फ्लैट में पहंचे तो हम सब बहोत थक चुके थे। आज ध्रुब को जानने का मौका मिला। लड़का आछा हे। हमे हमारे रूम में छोड़ के वो दोनों अपने फ्लैट में चले गए। में बस फ्रेश होने के लिए जाने ही वाली थी के अचानक मेने देखा के मेरे पास ध्रुब का रूमाल रह गया था। सच कहूं तो लौटा ने का मन नहीं था, पर फिर इरादा बदला तो लौटा ने उनके फ्लैट में गयी। वहां पहंच के देखा तो फ्लैट के अंदर से किसी लड़की की आवाज आ रहीथी। थोड़ा और करीब गया तो वो आवाज मेरे करीब जाने के साथ और भी साफ तरीके से मुझे सुनाई दे रही थी। जैसे ही मेने दरवाजे के करीब अपने कान लेके गयी सुनने के लिए तो वो लड़की की आवाज़ एक झटकेसे बंद होगयी। और  तभी अचानक ध्रुब ने दरवाजा खोला। ........emotional love story in hindi



कौन थी वो लड़की ,क्या था उस आवाज़ के पीछे का राज़। .........

कहानी आगे भी जारी रहेगी। ...


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दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 3


emotional love story in hindi - प्यार भरी दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 3 rdhindistories

दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 3




चानक बिजलियाँ कड़क उठती हे। मानो जैसे मुझे तिथि के सवालों के तीर से बचाने की कोसिश की जा रही हो। सवालों के सिलसिलें को ऐसे अधूरे हाल में छोड़के जाना पड़ता हे तिथि को। .... लैंप जलाने ताकि अँधेरा मिट सके। पर उसदिन मानो हवाएं जैसे अपने आप्पे से बहार हो चुकीथी। देखते ही देखते हवाओं ने तूफान का रूप ले लिया।  इस तूफान में लैंप जलाने का कोई फ़ायदा नहीं हे, बारिश के बूंदे भी गिरने लगी मानो जैसे आज सबको जबाब चाहिए था। ऐसा लगा जैसे बारिशें आज रुकेंगी नेहीं, जब तक में कोई जवाब न दे दूँ। पर जवाब तो मुझे भी चाहिए था। ख़यालों के आगोश से बहार निकली तो देखा के आखिर कार बारिश थम गयी थी । उसे भी इस बात का एहसास होने चला था के जवाब किसी के पास नहीं। बारिशों के थमने के बाद मानो जैसे एक सनाटा पसर गया हो। इतना सनाटा की दिल की बेचैन धड़कनो  की आवाज साफ सुनाई दे सके। पीछे मूड़ के देखा तो, तिथि कब की सो गईथी। बस मेरे ही आँखों में नींद नहीं थी। जिसको देखा तक नहीं उसके लिए ये सब क्यों ? फिरसे एक सवाल ? और जवाब किसी के पास नहीं।आखिर कार में भी नींद की तलाश में निकल गयी और कब नींद ने मुझे अपने आगोश में भर लिया  पता नेही  चला। सुभे आंखे खुलने पर तिथि को किसीसे बात करते हुए  देखा दरवाजे पे खड़े होके। बारिश के वजेसे सोसाइटी कंपाउंड में  कल रात एक पेड़ गिरगया हे ऐसा तिथि का कहना था। खेर जो भी हो ऑफिस जाने के लिए तयार होना था  पर तिथि हे के बाते किये जारही हे। मेने तिथि  को बुलाना मुनासिफ नहीं समझा। तभी अचानक तिथि ने किसीको नमस्ते किया और दरवाजा बंद करते हुए एक आवाज ने  उससे फिरसे रोक लिया। मेने ये सब नजर अन्दाज करना सही समझा। तिथि वापस आयी  तो थोडेसे नाराजगी भरे लेहेजे से में पूछी "हमेसा  मुझे  तो बड़ा ज्ञान दिया जाता हे समये का , आज आपको क्या होगाया था जरा बताएगी।
 " मेरे घुसे भरी लफ्ज़ो में जो प्यार की चुटकी थी उसे भांपते हुए तिथिने बड़े ही प्यारसे  जवाब दिया :- "हमारे पड़ोसी आये  थे हमसे मिलने ,बस पडोसी धर्म  नीभा रहीथी। "  दरसल हमारे फ्लैट के पास में में ही एक फ्लैट  खाली था ,तो उसीमे अपूर्वा नाम का  लड़का किराये पे रहने  आया था। और हमारे पडोसी  होने के नाते  तिथि से बातें कर रहा था।
अब चलो भी देर हो रही हे ,ये कहकर  तिथि ने मुझे गले लगाया।  ये जो दोस्त है ना, इन्हे हमारी कमजोरी  पता होती हे। झटसे मना लेतें हैं हमे। ऑफिस में आज इतना शोर सराबा  नेही  था। तो तिथि के केहने पे हम लोग थोड़े सनंदर किनारे घूमने चले गए। समंदर किनारे खड़े  होके ऐसा लगा जैसे कोई मुझसे  केह रहा हो अपने सारे गमो  को भूल के आज़ाद होजाओं। ये पराया  सेहर आज मुझे अपना बनाने लगा था।

इसी बिच मेरे आंखे पीछे गयी तो मेने पाया तिथि किसी लड़के से हस हस के बाते कर रही थी। मेने ज्यादा ध्यान नेही दिया। समंदर की वो लेहेरे और हवाएं मुझे धीरे धीरे अपने गिरफ्त में ले रहीथी। दो पल सुकून से  जीलेना चाहती थी। रोज के भागम भाग से अच्छी तरहा से वाकिफ थी में। इसीलिए थोड़ा खुल के साँस लेना  चाहती थी।

"बानी इनसे मिलो ये हे अपूर्वा। हमारे नए पडोसी। सुबह जिसकी में बाते  राहा था।"
तिथि की आवाज़ को हवाएं रोक रही थी। ठीकसे सुनाई तो नहीं देरहा था क्यों के हवाओं शोर काफी  तेज़ था। फिर भी मैंने तिथि के बोलने के लहजे को समझते हुए मुस्कुराके अपूर्वा को हेलो कहा। बाते सुरु करने के लिए अलफ़ाज़ों की कमी सी मेहसूस हो रहीथी। तभी अचानक तिथि अपूर्बा को कुछ दिखाने के लिए ले जाती हे। मेरा उनके साथ जाना मुझे उस वक़्त मुनासिफ नेही लगा। में बस चुप चाप हवाओं से  गुफ्तुगू किए जा रही थी।
मुझे इंतजार था तो बस एक ही जवाब का।. ........




तो आप भी इंतज़ार कीजिये। मुलाकात होगी अगले भाग  में

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दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 2

emotional love story in hindi - प्यार भरी दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 2 rdhindistories

दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 2


मुंबई सेहर अपने साथ नजाने कितने सपनो को समेटे हुए चल रहा हे, ये सायद ही कोई बयां कर पाए। मेरे मुंबई पहंचने के बाद लता दीदी(हमारे बड़े ताऊजी की बेटी ) मुझे लेने आयी। मज़बूरी भरे लहजे में उन्होंने मुझे गले लगाया। उनके लहजे से ये साफ था के मुझे उनके पास रखना एक मज़बूरी का सिला हे बस। गाऊँ में पिताजी के उनपे कई एहसान थे। ताऊजी के गुजर जाने के बाद दीदी पिताजी से बहत  ही ज्यादा दुरी बनालि। खेर मेरे लिए ये मायने  रखता था की में कैसे अपने सपनो को पूरा कर सकूँ। कुछ ही महीनो में मुझे मुंबई को जानने का मौका मिला। रफतार को चुनौती पेस करते हुए इंसान ऐसे जैसे आपको नजर अंदाज करते हुए। आखरीकार  मुझे भी एक नौकरी मिलगई। सपने देखना मुझे भी तो पसंद थी। छोटेसे सेहर से आने के वाबजूद मेरे सपनो ने अपनी उड़ान नहीं छोड़ी। एक प्राइवेट कंपनी में फ़ूड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट में नोकरी लग गयी। चीज़ों को बारीकी से टेस्ट करना मेरा काम था। सुभे १० से लेके रात के  8 बजने तक ऑफिस में रहना पड़ता। लौटने पे दीदी के वो सक भरी निगाहों से किये गए सवाल, ऐसा लगता था कीमत सपनो से बड़ी होगयी हो। माँ की याद को दिल में रख के आंख बंद करके रहलेति थी। फिर लगा  के दीदी के घर से रुक्सत होने का बक्त आगया हे। सायद वो  भी रुक्सत होने के वजह से बड़े अछेसे वाकिफ थे ,इसीलिए जाते वक़्त  ज्यादा सवाल जवाब नहीं हुआ। अब मेरी सफर मेरे कदमो के साहारे सुरु होचुकी थी। सायद एहि वो पल था जिसने मुझमे डर पैदा किया। पीछे लौट जाने को बोलती हुई आवाज़े रूह तक को गमज्यादा कर जाती थी। किसी दोस्त के पास मेरे लिए वक़्त नहीं था। या यूँ कहूं तो में अब किसी के वक़्त के काबिल न रही थी। जिंदगी मुझे अपनी असलियत दिखाने में लागीथि। एक रोज की बात हे सुबह सुबह जल्दी जल्दी में ऑफिस के  लिए निकल ही रहीथी के आंखोमे एक कचरा नजाने कहांसे आ गिरा। दो पल के लिए आंखे बंद हुई तो पानी के तलाश में बैग में हात  डाला तो पता चला के पानी लाना तो में भूल गयी थी। दर्द के बढ़ने के साथ ही एक हलकी सी गरम सांसे मेरे आँखों के क़रीबसे बह गए। हालाकि दर्द अभी भी काम नहीं हुए थे पर दिमाग उसी बंद आंखोसे उस इंसान को ढूंढ रहीथी जिसने इस भागते हुए सेहर में दो लम्हा रुकने की हिमाकत कर डाली थी, वो भी मेरे लिए। क्या  यहाँ कोई किसी की मदत  कर सकता हे।emotional love story in hindi

"क्या आप ठीक हैं ?" ये लफ्ज़  पहली दफा सुनी मुंबई आने के बाद।  कौन हे ये। कास में देखलेति अभी। बार बार मेरे दर्द कम करने के कोसिस में वो इंसान मेरे दिल में उतरता जरहाथा। "रुकिए में पानी लेके आता हूँ "ये कह के वो सख्स पानी लेने गया ही था की मेरे एक दोस्त वहां आगयी। आँखों में पानी मरते ही ऐसा लगा की कोई सपना जैसे टुटा हो। वो सख्स गायब था। फिर भी आंखे एक बार उस सख्स को देखना चाहती थी जिसने बिना कोई जान पहचान  मेरी मदत की। पर वो नहीं लौटा। दिन भर ऑफिस में उसके वारेमे सोचती रही। उसके प्यार से बोले दो लफ्ज़ दिल को छूके रूह में उतर गयी थी।emotional love story in hindi

"ओए  बानी" (मेरा घरेलु नाम ) इस आवाज़ से ध्यान टुटा

हाँ
घर नहीं जाना ? रात के 9 बजने वाले हैं। किसके यादों में खोये हो।
नेही तो। ...... .....ऐसी बात नहीं हे तिथि (मेरी दोस्त ) . बस ऐसे ही emotional love story in hindi
तिथि :- ऐसे ही नहीं हे बानी जी। ..... कुछ तो हे आपके जेहन में ,जो हमसे छुपाने की नाकाम कोशिश की जा रही  हे।emotional love story in hindi
उफ्फ आपकी ये दोस्ती भरी निगाहों से कैसे बचूं। ...तिथि जी, (मेरे चहरे की मुस्कराहट कुछ तो बयां कर रहीथी उसदिन )

"आप जिंदगी में अपने दोस्तों से कुछ भी छुपा नहीं सकते। मेरे आँखों में उस इंसान की तलाश को सायद तिथि ने भाँप लिया था। अपने आंखोसे हजारो सवाल  लिए मुस्कुराना कोई तिथि से  सीखे। "
एक पराया सा लगने वाला सेहर आज नजाने क्क्यो अपनों जैसा लगने लगा था। emotional love story in hindi

आखिर ऐसा क्यों??????

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दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 1

"बनिता"ऊठ जाओ बेटी। आज दूद वाला नहीं आने वाला ,पिताजी भी नहीं हे तुम्हें ही लाना पड़ेगा। अब जल्दी जाओ बरना दूद ख़तम हो जायेगा। उठ जाओ बीटा जल्दी। ..... सुभे के १० बजने वाले हे। .... पंडितजी(पिताजी) के प्यार ने बिगाड़ दिया हे।

उम्र कब निकल गया पता ही नहीं चला। माँ हमेसा ही मुझे कहती रही वक़्त किसी का सगा नहीं हे। आज समझ में आ रहा हे। उत्तरप्रदेश के एक छोटेसे गांव से आना होता हे हमारा। पिताजी पंडित हे। घर के बड़ी बेटी हे हम ,एक छोटा भाई भी हे हमारा। पिताजी का काफी नाम हे आस पास के इलाकों में। हमे बड़े प्यार से पाला  हे उन्होंने। स्वभाब से एक दम सांत हे हमारे पिताजी। भगबान पे काफी गेहरी आस्था हे उनकी। और माँ, वो तो हम सबकी आत्मा हे। घर को घर माँ ने ही तो बनाया हे। जिन्दगी एक फिसलती हुई डोर हे जिससे मेने कईं  बार थामने की कोशिश की पर न थाम  सकी । आज नौकरी लग गयी हे मुंबई में। सुबह सुबह उठने पे माँ की बेहद  याद आती हे। अगले महीने जब जाउंगी तो माँ के गोद  में सर रख के सो जाउंगी। यहाँ नींद भी तो नहीं  आती ठीकसे।  

दिन का तो चलो ठीक ठाक हे ,पर ये रात की खामोशियों का क्या किया जाये। क्या ये रात वाकई में इतनी गेहरी होती हे। अक्सर छत  पे जाकर  बैठा करती हूँ , उन खामोशियों को महसूस करने की जुस्तजू में अक्सर आंखे नम  हो जाती हे। पिताजी की एक बात याद आजाती हे की वो अक्सर काहा करते "जीबन में हमे कमजोर नहीं होना हे वल्कि खुद को इतना मजबूत बनाना हे की हम किसी को सहारा देने लायक बन सके "..... 

इस भाग दौड़ से भरी सेहर में आपका अपना कोई नहीं ये बात जानने में मुझे ज्यादा दिन नहीं लगे। जीने की होड़ में इंसान जीने का मतलब ही भूल चूका हे। पर एक बात समझ में आचुकी हे की आप इस भीड़ में  खड़े नहीं रह सकते, आपको भी भागना होगा।  इंसानी जज़्बात  की कीमत यहाँ सिर्फ इतनी हे के हवाओं को मुठी में कैद करने की एक नाकाम कोशिश जितनी। खेर आपको जीना तो होगा ही। सपने हमे जीने का नया आसार देती हैं। पर उनकी कीमत चुकापाना बेहत मुश्किल। आज की रात भी पुरानी रातो जैसी ही हे। दिसम्बर का महीना हे आसमानो में सर्दी  की एक हलकी फुलकी लहर भी मेहसूस हो रही हे। लेकिन गाडिओं की सोर देर रात तक आपके कानो में दस्तक देती रहेंगी। हमारा गांव तो अब चेन की सांसे लेके सो गया होगा। माँ और पिताजी भी सो गए होंगे ,या फिर वो दोनों भी मेरी तरा अपने आँखों से झूट बोल रहे होंगे।
दो लब्ज़ों की हे दिल की काहानी -भाग 1


आज ऑफिस से आने के बाद माँ से बात हुई , माँ के प्यारे प्यारे दो बातें सुनके आंखोसे जजबात गिरने लगे। बड़ी मुस्किलसे संभाला मेने खुद को। जिद भी तो मेने ही कि थी । गाऊँ में क्या हे ? यहाँ कुछ नहीं मिलने वाला। बड़े सेहर में नौकरी की अछि स्कोप हे। मेने ही मनाया था उन दोनों को। स्टेशन छोड़ने आयेथे मेरे पिताजी मुझे। यूँ तो बहत मजबूत दिल के हे , पर उनके आंखे भी मुझे जाने की इजाजत नहीं दे पा रहेथे उसदिन। ऐसा कहाँ लिखा हे एक पिता को अपने जज्बात दिखने का हक़ नहीं हे ? बस उनके लब्ज़ खामोस थे, वो अलग बात हे। हमारी एक दीदी रहती थी मुंबई में उनके भरोसे ही पिताजी ने हमे हमारे सपने पूरा करने भेजदिया यहाँ। मुंबई पहंचा तो दीदी आईथी स्टेशन मुझे लेने। पहली बार अपने आंखोके दायरे को में बढ़ा रहीथी,  तो आंखे थी के अपने आप पे यकीं नहीं कर रहे थे। मुंबई ,सपनो का सेहर। ......... 
क्या वाकई में ?

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